चलो एक तो अच्छी खबर
अभी अभी जी खबर के हवाले से पता चला कि तिरूपति बालाजी के मंदिर में अब दलित भी जा पायेंगे, यही नही जो पुजारी हैं वो एक रात दलित बाडी में रहेंगे और उनके साथ खाना भी खायेंगे। यह बहुत ही स्वागत योग्य खबर कही जायेगी, अभी इस खबर का लिंक मिल नही रहा (मिलते ही यहाँ चेप दूँगा)। आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि ये सिर्फ एक सगूफा था या वाकई में एक बदलाव। जाति और धर्म की ये दिवारें जितनी जल्दी टूट जायें सबके लिये उतना ही अच्छा।




सचमुच में यह बहुत ही शुभ समाचार है। इसका स्वागत ही नहीं किया जाना चाहिये बल्कि इसी को हमारे सभी मन्दिरों का आदर्श आचरण बनाना चाहिये। अगर हिन्दू धर्म को अपने चर्मोत्कर्ष पर ले जाना है तो छूआछूत जैसे भ्रष्ट आचरण को त्यागना ही चाहिये और जो इसे किसी भी रूप में जिन्दा रखने की कोशिश करते हुए दिखें उनकी भर्त्सना होनी चाहिये।
हे भगवान क्या सचमुच ऐसा होने जा रहा है!
साधू साधू.
अच्छी खबर लाये हैं. हम खुश हुए.
[...] समीर लाल: अच्छी खबर लाये हैं. हम खुश हुए. [...]
bilkul sahi khabar hai aur bare paimaane par ho raha hai….