अभी अभी जी खबर के हवाले से पता चला कि तिरूपति बालाजी के मंदिर में अब दलित भी जा पायेंगे, यही नही जो पुजारी हैं वो एक रात दलित बाडी में रहेंगे और उनके साथ खाना भी खायेंगे। यह बहुत ही स्वागत योग्य खबर कही जायेगी, अभी इस खबर का लिंक मिल नही रहा (मिलते ही यहाँ चेप दूँगा)। आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि ये सिर्फ एक सगूफा था या वाकई में एक बदलाव। जाति और धर्म की ये दिवारें जितनी जल्दी टूट जायें सबके लिये उतना ही अच्छा।

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