06 Apr
Posted as समाज और समस्या
Tags:समाज और समस्या, fifth grade student arrestedमैं निशब्द मूवी की बात नही कर रहा, आज ये खबर पढी (देखी) और पढ कर कुछ कहते जैसा नही बना। क्या दोष बच्चों का है (क्या मुझे बच्चे कहना चाहिये?) या अभिवावकों का और या अध्यापकों का और या स्कूल के वातावरण या सिस्टम का? जिस तरह से इस तरह की घटनायें अमेरिकी स्कूलों में बढ रही है उससे तो यही लगता है कि आने वाले वक्त में बच्चों की मासूमियत या तो शब्दकोष में मिलेगी या इतिहास के पन्नों पर।
कक्षा 5 में पढने वाले 13 और 12 साल के दो लडके और 11-11 साल की दो लडकियां और इन्होंने ये सब किया क्लास में कुछ बच्चों के सामने। क्या कहा मैंने बताया नही क्या किया? वो आप यहाँ पढ सकते हैं और ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ भी देख सकते हैं।
6 Responses
SHUAIB
April 7th, 2007 at 3:47 am
1है तो शर्म की बात। अब इस पर क्या अच्छा बुरा लिखूं या लिखूं कि भाड मे जाएं आजके बच्चे? किसको ज़िम्मेदार टहराएं स्कूल वालों को, बच्चों के माता पिता को या सिस्टम को? मुझे तो शर्म आई ऐसी खबर पढकर, मगर आजके दौर मे तो आम सी बात हुई, उस उम्र मे हमें ऐसा सोचने को भी शर्म मेहसूस करते थे और अब के बच्चों ने करके भी दिखाया - और आज इसको तरक्की कहते हैं पता नहीं कौनसी राह पर जारहे हैं।
समीर लाल
April 7th, 2007 at 3:30 pm
2कल ही देखी यह न्यूज टी वी पर-अब क्या कहा जाये. विषय बहुत गंभीर है और गहरे चिंतन की माँग करता है.
उन्मुक्त
April 7th, 2007 at 9:47 pm
3तरुन जी मेरी पिछली टिप्पणी किसी दूसरी चिट्ठी के लिये थी इसके लिये नहीं कृपया उसे मिटा दें। यह गम्भीर विषय है।
निठल्ला चिन्तन » प्रेम कविता - एक बार फिर
April 8th, 2007 at 5:13 pm
4[…] « निशब्दः बच्चे कितने मन के सच्चे? […]
निठल्ला चिन्तन »
April 10th, 2007 at 8:44 pm
5[…] उन्मुक्त: तरुन जी मेरी पिछली टिप्पणी किसी दूसरी… […]
अनुराग मिश्र
April 10th, 2007 at 10:48 pm
6मेरी एक मित्र जिसने बचपन में एसी ही जगह से पढ़ाई की है, उसने बताया कि वहाँ कुछ लड़के इस कक्षा तक (उम्र इस कक्षा के हिसाब से ज्यादा ही होती है) हद से ज्यादा बदमाश हो जाते हैं। स्कूल बस के अंदर हस्त मैथुन तक कर डालते हैं और साथ वालों का जीना मुश्किल हो जाता है। एसी जगहों की सामाजिक आर्थिक स्थिति भी अन्य जगहों से अलहदा होती है।
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