मैं निशब्द मूवी की बात नही कर रहा, आज ये खबर पढी (देखी) और पढ कर कुछ कहते जैसा नही बना। क्या दोष बच्चों का है (क्या मुझे बच्चे कहना चाहिये?) या अभिवावकों का और या अध्यापकों का और या स्कूल के वातावरण या सिस्टम का? जिस तरह से इस तरह की घटनायें अमेरिकी स्कूलों में बढ रही है उससे तो यही लगता है कि आने वाले वक्त में बच्चों की मासूमियत या तो शब्दकोष में मिलेगी या इतिहास के पन्नों पर।

कक्षा 5 में पढने वाले 13 और 12 साल के दो लडके और 11-11 साल की दो लडकियां और इन्होंने ये सब किया क्लास में कुछ बच्चों के सामने। क्या कहा मैंने बताया नही क्या किया? वो आप यहाँ पढ सकते हैं और ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ भी देख सकते हैं।

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