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अब होंगे चिट्ठाकार आमने-सामने

अब चिट्ठेकार होंगे एक दूसरे के आमने-सामने और स्थान होगा, ब्लागर्स पार्क। जी हाँ एक मनोरंजक मुकाबला होने जा रहा है जिसके माध्यम से चिट्ठेकार अलग अलग विषयों में रखेंगे अपने विचार। आमने-सामने यही है नाम उस मनोरंजक प्रयोगात्मक खेल का और इसे आपके सामने ले कर आ रहा है निठल्ला चिंतन। शायद ये किसी [...]

विजयी भवो: वत्स!

सारा माहौल गरमा गया है, लोग दो खेमों में बँट चुके हैं, पिछले कुछ समय से चलता ये द्वंद युद्ध अपने आखिरी मुकाम में आ ही गया। तटस्थ रहने का मतलब नही बनता इसलिये अब वक्त आ गया है ये बताने का कि आखिर हम किस खेमे में हैं। एक बार फिर इतिहास अपने को [...]

ईर बीर फत्ते

बहुत पहले ये गीत सुना था तब समझ नही पाये थे कि ये ईर बीर फत्ते हैं कौन? लेकिन लगता है अब समझ आ रहा है कि अरे ये तो अपने मीडिया वाले हैं। पहले थोड़ा इस गाने के बारे में बता दूँ, अमिताभ बच्चन का गाया हुआ ये शायद उनका पहला नान-फिल्मी एलबम गीत [...]

माई नी माईः ये माजरा क्या है?

लता मंगेशकर को तो सभी जानते हैं, हजारों गाने वो गा चुकी हैं लेकिन वो ऐसी गलती कर सकती हैं यकीन नही होता। किसी की तो है या तो लताजी की या फिर उस गीतकार की जिसने ये गीत लिखा। कई लोगों की तरह वो हमारी भी पसंदीदा गायिकाओं में से हैं, इसलिये हमें तो [...]

हरि अनंत हरि कथा अनंता

मुझे याद नही पड़ता ये किस ने कहा है शायद तुलसीदास या शायद कोई और दास, खैर शेक्सपियर की मानें तो नाम में क्या रखा है सीधे मुद्दे पर आते हैं। जाहिर सी बात है, पढ कर तो यही लगता है कि हरि के लिये ही कहा होगा आज तक सभी यही बताते भी आये [...]

[ More ] April 17th, 2007 | 13 Comments | Posted in खालीपीली |

नोटपैड की महिमा

आओ सुनाये प्यार की एक कहानी, एक था लड़का एक थी नोटपैड…, ये कब हुआ, कैसे हुआ हमको तो होने के बाद ही पता चला। शुरूआत में तो हम नोटपैड को तुच्छ ही समझते आये थे, कभी कभार एक नजर मार ली तो मार ली लेकिन अब तो ये आलम है कि इसके बिना जीना [...]

स्वागत कीजिये दो नयी महिला चिट्ठेकारों का

हिन्दी ब्लागजगत में दो नयी महिला चिट्ठेकार कदम रख रही हैं, ये दोनों ब्लागर्स पार्क में अपने चिट्ठे लिखा करेंगी। जहाँ इनमें से एक पहले से ही ब्लोग से अच्छी खासी परिचित हैं वहीं दूसरी ब्लोग से अनिभिज्ञ। सबसे पहले बात करते हैं कुहु की, ये वर्तमान में भारत में रहती हैं और काफी समय [...]

[ More ] April 11th, 2007 | 16 Comments | Posted in खालीपीली |

प्रयोग सफल लेकिन मकसद असफल

अब तक काफी लोग हमारी पिछली पोस्ट से वाकिफ हो गये होंगे, उस पोस्ट से हम देखना ये चाहते थे कि पाठक (या चिट्ठेकार) टिप्पणी टाईटिल को देखकर करते हैं या उस लेख में लिखे कंटेंट को देखकर। अगर पूरे प्रयोग को देखें तो पहला भाग था टाईटिल से पाठक को खींचकर लाना और दूसरे [...]

[ More ] April 11th, 2007 | 5 Comments | Posted in खालीपीली |

मोहल्ले में मुसलमान हिन्दू हुए हैरान

गुलाम अली की एक गजल है, “दिल में एक लहर सी उठी है अभी, कोई ताजा हवा चली है अभी” अगर इसी की तर्ज पर नारद को देखते हुए कुछ कहूँ तो वो कुछ यूँ होगा – “नारद में हिट बड़े हैं अभी, कोई धर्म की बहस चली है अभी”। उल्टे प्रदेश में कोई फरमान [...]

[ More ] April 10th, 2007 | 22 Comments | Posted in खालीपीली |
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