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ऊंची दुकान फीका पकवान

पाकिस्तान क्रिकेट विश्वकप से बाहर, भारत का अगला नंबर। अडोसी और पडोसी दोनो को आज के ही दिन बहुत कम तजुर्बेकार टीमों ने दी धोबी पछाड। विश्वकप में अब तक के तीन सबसे बडे उलटफेर – जिंबाब्वे और आयॅरलैण्ड मैच टाई, बांग्लादेश ने भारत को दी पटखनी और आयॅरलैण्ड ने पाकिस्तान को शिकस्त दे बाहर का रास्ता दिखाया। अब चर्चा करते हैं विस्तार से।

आयॅरलैण्ड को सेंट पीटर्स के दिन जीत का तोहफा ही नही मिला बल्कि दूसरे दौर में पहुँचने की भी उम्मीद नजर आ रही होगी। उसकी जीत अब तक हुए मुकाबलों में निसंदेह सबसे बडा उलट फेर है। उम्र के हिसाब से दोनों टीमों की औसतन उम्र लगभग समान ही है (पाकिस्तानः 27.769, आयॅरलैण्डः 27.421) वहीं तजुर्बे पर नजर डालें तो पाकिस्तान आयॅरलैण्ड से बहुत आगे। विश्वकप खेल रही टीमों में पाकिस्तान 1654 मैचों के साथ तजुर्बे की तालिका में तीसरे नंबर पर और आयॅरलैण्ड महज 87 मैचों के साथ तालिका में सबसे अंतिम स्थान यानि नंबर १६ पर यानि कि पाकिस्तान के कई खिलाडियों का अकेला तजुर्बा ही आयॅरलैडं की पूरी टीम के तजुर्बे पर भारी।

अब आते हैं भारत के मैच की ओर, भारत की टीम को देख कर मैं यही कहूँगा कि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत”। पिछले 2-3 हफ्तों में जो कुछ पढा और जो कुछ टीम के सदस्यों के इंटरव्यू पढे या देखे उससे ही लगने लगा था कि भारतीय टीम का मनोबल कमजोर है। बांग्लादेश के साथ मैच के पहले ही घबराहट और कुछ पस्त सा हौसला भारतीय कप्तान के चेहरे पर दिखने लगा था। बांग्लादेश की टीम के कप्तान ने बहुत ही विश्वास के साथ कहा था कि वो भारत को 250 तक रोक कर लक्ष्य का पीछा करेंगे। बांग्लादेश की नौजवानों से भरी टीम जिस तरह से खेली उसे देख निसंदेह ये टीम आने वाले वक्त में और भी कई उलटफेर करेगी, (वैसे अब तक न्यूजीलैंड (वार्म-अप मैच) और भारत को ये टीम पटखनी दे ही चुकी है)। बांग्लादेश के 17-22 साल के युवाओं के सामने लगभग हर भारतीय की घिघ्घी बंधी हुई थी। फिल्डिंग, बोलिंग और बैटिंग हर क्षेत्र में उन्होंने भारतीय टीम को मात दी, छक्के चौके तो ऐसे आगे आ आ कर मार रहे थे जैसे किसी गली मोहल्ले की टीम के साथ खेल रहे हों। वहीं भारतीय टीम को एक-एक रन बनाने के लिये पसीने छूट रहे थे।

इस हार के साथ कागजी रणबाँकुरों के दूसरे राउंड में पहुँचने के बहुत कम आसार बच्चे हैं यानि कि उन्हें बाकि दोनों मैच बरमुडा और श्रीलंका के साथ जितने ही नही है वरन बहुत अच्छे रन अंतर से जीतने होंगे। कागजी रणबाँकुरे इसलिये कहा क्योंकि भारतीय टीम मैच और तजुर्बे दोनों ही हिसाब से नंबर वन पर है।

अब थोडा आंकडों पर नजर डालते हैं – भारत 2225 मैच खेल के नंबर एक की पोजिशन पर है वहीं बांग्लादेश को अभी सिर्फ 717 मैचों का तजुर्बा है, तालिका में स्थान 8वां। तेंदुलकर, गांगुली या द्रविड ने अकेल जितने रन बनाये हैं बाग्लादेश की टीम के सारे खिलाडियों के द्वारा बनाये गये रन उससे कहीं कम हैं। दोनों खिलाडियों की औसत उम्र में वैसे तो थोडा ही फर्क है लेकिन जहाँ बांग्लादेश की टीम में 10-25 साल के 12 खिलाडी हैं वहीं भारतीय टीम में इस रेंज में मात्र 7। बांग्लादेश की टीम जिंबाब्वे के बाद सबसे युवा खिलाडियों की टीम है। भारतीय टीम के खिलाडियों की औसत उम्र है 27.720 और बांग्लादेश के खिलाडियों की 24.115

अब थोडा बात करते हैं इस खेल को लेकर जुनुनी और उन्मादी भारतीयों की, मैने देखा-सुना और पढा था कि कोई एक युवा अपनी एक किडनी बेच कर मैच देखने वेस्ट इंडीज जाना चाहता था, अच्छा हुआ कि ऐसा नही हो पाया आधा घायल तो वो किडनी बेच के हो जाता बाकि आधा शायद हार्ट अटैक से। मिडिया और पत्रकारों ने इस खेल और इस खेल से जुडे खिलाडियों को कुछ ज्यादा ही कवरेज देकर सिर पर चढाया हुआ है। गौरतलब है कि क्रिकेट भारत का राष्ट्रीय खेल नही है मुझे ताजु्ब्ब नही होगा अगर ज्यादातर युवा पीढी इस खेल को भारत का राष्ट्रीय खेल बताने लगे।

भारतीयों के पागलपन और जुनून का ये आलम है कि जिसे देखो हवन पूजा और ना जाने क्या क्या करने में लगा है, इनका अंधविश्वास सबके सिर पर चढके बोल रहा है और मीडिया इस तरह की खबरों को क्या खूब तवज्जो दे रहा है। कहीं भारतीय खिलाडियों के नाम के पान मिल रहे हैं तो कही मिठाईयां और वहाँ जहाँ खेल का जौहर दिखाना है वहाँ अपने सूरमा फिलहाल तो ऐसा कुछ विशेष जौहर दिखा नही पाये हैं। शायद ये भारत में ही संभव है जहाँ क्रिकेट खिलाडी खेल से बडा और कलाकार कला से बडा बना दिया जाता है।

चलते चलतेः अनुँगूज में अभी तक शायद एक ही एंट्री आयी है और १३ दिन शेष, कहीं ऐसा ना हो कि अनुँगूज का डिब्बा भी पाकिस्तानी टीम की तरह वक्त से पहले ही गोल ना हो जाये। ये घटनायें भी ना चैन से अपना काम नही करने देती सोचा था कुछ दिन गायब रहेंगे लेकिन रहने नही देती।

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5 Responses to “ऊंची दुकान फीका पकवान”

  1. समीर लाल Says:

    बहुत सही एनालिसिस है. और रही अनुँगूज की बात तो अब लिखते हैं वाकई समय कम बचा है. क्या समय बढ़ा न्हीं सकते?

  2. अनूप शुक्ला Says:

    मैच जीतने के लिये मेहनत करनी होती है। भारतीय टीम में अब खिलाड़ी रहे कहां? सब देवता हो गये हैं। देवता केवल पूजा करवाते हैं- पसीना नहीं बहाते!

  3. सागर चन्द नाहर Says:

    हार या जीत दो पहलू है खेल के पर जिस तरह भारत की टीम ने मैच को गँवाया बहुत बुरा था।
    इस मैच को देखने के बाद यह लगता है कि भविष्य में बंग्लादेश की टीम कई ऊंचाईयाँ छूऐगी। जिस सहजता से खिलाड़ी खेल रहे थे कहीं नहीं लगा कि यह नौसखिया या कमजोर टीम है।
    भारत की टीम के बारे में अभी से कुछ कहना तो जल्दबाजी होगी पर इतना जरूर कहूंगा कि बहुत निराश किया इन्होने।
    एक विज्ञापन में चार खिलाड़ी दःइरे से शेर में परिवर्तित होते हैं अब इस विज्ञापन को बदल कर उन्हें गीदड के रुप में बदलते दिखाना चाहिये।

  4. suresh chiplunkar Says:

    सुबह-सुबह एक अच्छी और एक बुरी खबर मिली… अच्छी यह कि पाकिस्तान बाहर हो गया और बुरी यह कि भारत भी लगभग बाहर हो गया है (अब हमें बरमूडा को अच्छे मार्जिन से पीटना पडेगा… जो कि ये गधे शायद ही कर पायें और साथ-साथ ही श्रीलंका को भी पीटना पडेगा) दोनों काम तो इनके बाप से भी होने से रहे… इसलिये हम भी बाहर… इसे कहते हैं सद्भावना पडोसी बाहर तो हम भी बाहर… कम से कम अब तो पाकिस्तान को हमसे सम्बन्ध सुधार लेना चाहिये…

  5. nikhil anand Says:

    bhai,
    badhiya likha hai aapne/….mujhe to lagtaa hai abhi kai ulat pher baaki hain.kahi final ireland aur banglaaadesh kaa na ho jaaye…..!!!!!! ek analysis mere taraf se….
    INDIA-jitne log yaha crickt khelte hain,,,pure world cup ki baaki sabhi countries me milaakar bhi utne log cricket ke baare me nahi jaante..fir bhi hum to bhai haarne kaa shauq rakhte hain..ab kyaa karein haar kar apni opponent team kaa dil jeetne waale ko hi to BAAZIGAR kahte hain……..
    lage raho india………….

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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