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	<title>Comments on: नारद के लिये एक सुझाव</title>
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	<description>निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 04:30:43 +0000</pubDate>
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		<title>By: रवि</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/03/23/narad/#comment-1893</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Mar 2007 07:13:42 +0000</pubDate>
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		<description>वैसे तो मैं भी ऑपेरा फ़ीड रीडर से ही नारद को पढता हूँ. परंतु इसमें भी प्रविष्टियों के साथ पहली चंद लाइनें नहीं दिखतीं.

सवाल उन उपयोक्ताओं का है जो सिर्फ और सिर्फ नारद से पढ़ सकते हैं - (अकसर फ़ीड रीडरों के बारे में जानकारी नहीं होने से )</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे तो मैं भी ऑपेरा फ़ीड रीडर से ही नारद को पढता हूँ. परंतु इसमें भी प्रविष्टियों के साथ पहली चंद लाइनें नहीं दिखतीं.</p>
<p>सवाल उन उपयोक्ताओं का है जो सिर्फ और सिर्फ नारद से पढ़ सकते हैं - (अकसर फ़ीड रीडरों के बारे में जानकारी नहीं होने से )</p>
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		<title>By: उन्मुक्त</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/03/23/narad/#comment-1892</link>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Mar 2007 04:19:24 +0000</pubDate>
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		<description>मेरे विचार से इसके कुछ उपाय यह हो सकतें हैं।
१। हम नारद पर जा कर चिट्ठे न देखें पर जैसा रमन जी कह रहें हैं इसे फीड रीडर में देखें। मैम भी यही करता हूं। शायद आने वाले दिनो में हम सब यही करेंगे।
२। नारद में क्या कुछ अलग अलग श्रेणियां हो सकती हों तो जिनकी पोस्ट एक दिन में १ से ज्याद आती हो तो इसे अलग पेज में रखा जाय।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे विचार से इसके कुछ उपाय यह हो सकतें हैं।<br />
१। हम नारद पर जा कर चिट्ठे न देखें पर जैसा रमन जी कह रहें हैं इसे फीड रीडर में देखें। मैम भी यही करता हूं। शायद आने वाले दिनो में हम सब यही करेंगे।<br />
२। नारद में क्या कुछ अलग अलग श्रेणियां हो सकती हों तो जिनकी पोस्ट एक दिन में १ से ज्याद आती हो तो इसे अलग पेज में रखा जाय।</p>
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		<title>By: Raman Kaul</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/03/23/narad/#comment-1891</link>
		<dc:creator>Raman Kaul</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Mar 2007 20:31:54 +0000</pubDate>
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		<description>इस का इलाज मैं ने व्यक्तिगत तौर पर यह निकाला है कि मै ने गूगल रीडर में नारद की फीड डाल दी है, अपनी अन्य फीडों के साथ। वहाँ सब पोस्टों की एक लाइन दिखती है, और क्लिक करने पर उपलब्ध मसौदा दिखता है। दोबारा क्लिक करने पर आप ब्लॉग पर जा सकते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस का इलाज मैं ने व्यक्तिगत तौर पर यह निकाला है कि मै ने गूगल रीडर में नारद की फीड डाल दी है, अपनी अन्य फीडों के साथ। वहाँ सब पोस्टों की एक लाइन दिखती है, और क्लिक करने पर उपलब्ध मसौदा दिखता है। दोबारा क्लिक करने पर आप ब्लॉग पर जा सकते हैं।</p>
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		<title>By: रवि</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/03/23/narad/#comment-1888</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Mar 2007 12:48:45 +0000</pubDate>
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		<description>"...मेरे विचार से सब को अपनी पोस्ट के कुछ अंश नारद पर जरुर दिखाने चाहिए इससे पाठक निर्णय कर सकता है कि उसे पोस्ट पढ़नी है या नहीं। अगर कुछ लोग यह समझते हैं कि सिर्फ शीर्षक दिखा कर ज्यादा पाठक मिलेंगे तो वह गलत हैं। मैं अधिकतर ऐसी पोस्टों को छोड़ दिया करता हूँ।..."

मेरा भी यही विचार है. समरी न आ सकती हो तो पोस्ट की पहली चंद लाइनें , जैसा कि पूर्व के नारद में होता था, तो होनी ही चाहिएँ ताकि समझ तो पड़े कि बंदे ने क्या विषय उठाया है - पढ़ने लायक है भी या नहीं. और कभी शीर्षक से ही उत्तम चिट्ठा पढ़ने से छूट जाता है.

दूसरी बात, अब चूंकि यहाँ चर्चा चल ही रही है, एक और सुझाव देना चाहूंगा (हालाकि यह मैं पहले भी दे चुका हूँ) क्लिक रेट को माउस होवर पर दिखाई दे ऐसा किया जाए तो हमारे कुछ साथियों के पोस्टों को जिन्हें क्लिक्स कम मिलते हैं, आगे चिट्ठे पोस्ट करने के प्रति उत्साह में कमी सी महसूस होती है - (कई दफ़ा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कहा गया है) उससे भी राहत मिलेगी.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;&#8230;मेरे विचार से सब को अपनी पोस्ट के कुछ अंश नारद पर जरुर दिखाने चाहिए इससे पाठक निर्णय कर सकता है कि उसे पोस्ट पढ़नी है या नहीं। अगर कुछ लोग यह समझते हैं कि सिर्फ शीर्षक दिखा कर ज्यादा पाठक मिलेंगे तो वह गलत हैं। मैं अधिकतर ऐसी पोस्टों को छोड़ दिया करता हूँ।&#8230;&#8221;</p>
<p>मेरा भी यही विचार है. समरी न आ सकती हो तो पोस्ट की पहली चंद लाइनें , जैसा कि पूर्व के नारद में होता था, तो होनी ही चाहिएँ ताकि समझ तो पड़े कि बंदे ने क्या विषय उठाया है - पढ़ने लायक है भी या नहीं. और कभी शीर्षक से ही उत्तम चिट्ठा पढ़ने से छूट जाता है.</p>
<p>दूसरी बात, अब चूंकि यहाँ चर्चा चल ही रही है, एक और सुझाव देना चाहूंगा (हालाकि यह मैं पहले भी दे चुका हूँ) क्लिक रेट को माउस होवर पर दिखाई दे ऐसा किया जाए तो हमारे कुछ साथियों के पोस्टों को जिन्हें क्लिक्स कम मिलते हैं, आगे चिट्ठे पोस्ट करने के प्रति उत्साह में कमी सी महसूस होती है - (कई दफ़ा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कहा गया है) उससे भी राहत मिलेगी.</p>
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	<item>
		<title>By: masijeevi</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/03/23/narad/#comment-1886</link>
		<dc:creator>masijeevi</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Mar 2007 08:44:23 +0000</pubDate>
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		<description>पता नहीं तकनीक कितनी इजाजत दे पाएगी लेकिन क्‍या ये संभव है कि कोई न्‍यूनतम समयसीमा बॉंधी जा सके, पहले पन्‍ने पर मौजूद रहने की ताकि अचानक आई पोस्‍टों की बाढ़ में गुम हो जाने से बचा जा सके। मसलन 12 घंटे ...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पता नहीं तकनीक कितनी इजाजत दे पाएगी लेकिन क्‍या ये संभव है कि कोई न्‍यूनतम समयसीमा बॉंधी जा सके, पहले पन्‍ने पर मौजूद रहने की ताकि अचानक आई पोस्‍टों की बाढ़ में गुम हो जाने से बचा जा सके। मसलन 12 घंटे &#8230;</p>
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		<title>By: Jitu</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/03/23/narad/#comment-1884</link>
		<dc:creator>Jitu</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Mar 2007 05:41:03 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=140#comment-1884</guid>
		<description>Summary dikhana Narad ke haath mein nahi hota, Yadi RSS feed mein summary aati hai, to hum dikhate hain.

Narad ke pahle page par post sankhya 30 kar dee gayi hain. Rahi baat ek blog se ek se jyada post aane ki, to bhai, ye bhejne wale ko bhi sochna chahiye, Hum blogs dikha rahe hain, newspapers nahi. Saamoohik resources par sanyatata baratni chahiye, sabhi ko.

Main chahoonga in vishaya par detail mein discussion ho, bina koi lafda/jhagda kiye hue. Jo sabhi log chahenge wahi hoga.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Summary dikhana Narad ke haath mein nahi hota, Yadi RSS feed mein summary aati hai, to hum dikhate hain.</p>
<p>Narad ke pahle page par post sankhya 30 kar dee gayi hain. Rahi baat ek blog se ek se jyada post aane ki, to bhai, ye bhejne wale ko bhi sochna chahiye, Hum blogs dikha rahe hain, newspapers nahi. Saamoohik resources par sanyatata baratni chahiye, sabhi ko.</p>
<p>Main chahoonga in vishaya par detail mein discussion ho, bina koi lafda/jhagda kiye hue. Jo sabhi log chahenge wahi hoga.</p>
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	<item>
		<title>By: श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/03/23/narad/#comment-1881</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Mar 2007 03:53:38 +0000</pubDate>
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		<description>मेरे विचार से सब को अपनी पोस्ट के कुछ अंश नारद पर जरुर दिखाने चाहिए इससे पाठक निर्णय कर सकता है कि उसे पोस्ट पढ़नी है या नहीं। अगर कुछ लोग यह समझते हैं कि सिर्फ शीर्षक दिखा कर ज्यादा पाठक मिलेंगे तो वह गलत हैं। मैं अधिकतर ऐसी पोस्टों को छोड़ दिया करता हूँ।

वैसे मेरे विचार से नारद पर नियमावली में पोस्ट की समरी दिखाया जाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। नारद का उद्देश्य ही तो यही है कि सबकी पोस्टों के बारे में जानकारी दे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे विचार से सब को अपनी पोस्ट के कुछ अंश नारद पर जरुर दिखाने चाहिए इससे पाठक निर्णय कर सकता है कि उसे पोस्ट पढ़नी है या नहीं। अगर कुछ लोग यह समझते हैं कि सिर्फ शीर्षक दिखा कर ज्यादा पाठक मिलेंगे तो वह गलत हैं। मैं अधिकतर ऐसी पोस्टों को छोड़ दिया करता हूँ।</p>
<p>वैसे मेरे विचार से नारद पर नियमावली में पोस्ट की समरी दिखाया जाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। नारद का उद्देश्य ही तो यही है कि सबकी पोस्टों के बारे में जानकारी दे।</p>
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