नारद के लिये एक सुझाव
आजकल अपन लोगों की भी जनसंख्या काफी तेजी से बड रही है, पहले पन्ने पर जगह अब सिर्फ चन्द लम्हों के लिये ही नसीब होती है। लेकिन आजकल के ज्यादे चि्टठों की फिड में पोस्ट टाईटिल, चिट्ठाकार का नाम और ब्लाग के नाम के अतिरिक्त कुछ होता नही है यानि कि आप को पढने के लिये उस ब्लाग में जाना ही पडेगा। लेकिन फिर भी इस तरह के पोस्टों की फीड थोडा बहुत जगह तो घेर ही लेती है।
अगर ये संभव हो तो क्या ऐसा किया जा सकता है कि नारद में आने वाली फीड को दो ग्रुपों में बांट दिया जाय, एक वो जो चंद शुरूआती लाईनों के साथ आते हैं और दूसरा वो जो सिर्फ टाईटिल के साथ। दोनों ही पहले पन्ने पर बने रह सकते हैं यानि कि एक कॉलम में पहले ग्रुप की फीड दूसरे कॉलम में दूसरे ग्रुप की फीड जैसे कि रिसेंट पोस्ट वाला ब्लॉक है वैसे भी इसका (रिसेंट पोस्ट) पहले पन्ने पर कोई सेंस नजर नही आता।
ये सिर्फ एक सुझाव है, मेरी व्यक्तिगत राय अगर आपके पास कोई और उपाय हो तो जरूर बतायें।











This post has 11 comments
March 23rd, 2007
मेरा तो यह सुझाव है कि एक दिन में एक चिट्ठे की सिर्फ़ एक ही पोस्ट दिखाई जाये न कि नन्दी ग्राम और हाशिये टाईप पूरा पन्ना एक ही पोस्ट से बार बार घेर लेने वाली…यही हाल कई चिट्ठों का है दिन भर पोस्ट करते रहते हैं और बाकि सब हाशिये पर चले जाते हैं..कुछ तो करना होगा. !!
March 23rd, 2007
आपका सुझाव उत्तम है। जीतू सोचेंगे इस बारे में। वैसे अभी उन्होंने पहले पन्ने पर पोस्टों की संख्या बढ़ाई है।
March 23rd, 2007
बढिया सुझाव है, उम्मीद है नारद जी सुनेंगे
March 23rd, 2007
ठीक है कुछ सोचते हैं!
March 23rd, 2007
मेरे विचार से सब को अपनी पोस्ट के कुछ अंश नारद पर जरुर दिखाने चाहिए इससे पाठक निर्णय कर सकता है कि उसे पोस्ट पढ़नी है या नहीं। अगर कुछ लोग यह समझते हैं कि सिर्फ शीर्षक दिखा कर ज्यादा पाठक मिलेंगे तो वह गलत हैं। मैं अधिकतर ऐसी पोस्टों को छोड़ दिया करता हूँ।
वैसे मेरे विचार से नारद पर नियमावली में पोस्ट की समरी दिखाया जाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। नारद का उद्देश्य ही तो यही है कि सबकी पोस्टों के बारे में जानकारी दे।
March 24th, 2007
Summary dikhana Narad ke haath mein nahi hota, Yadi RSS feed mein summary aati hai, to hum dikhate hain.
Narad ke pahle page par post sankhya 30 kar dee gayi hain. Rahi baat ek blog se ek se jyada post aane ki, to bhai, ye bhejne wale ko bhi sochna chahiye, Hum blogs dikha rahe hain, newspapers nahi. Saamoohik resources par sanyatata baratni chahiye, sabhi ko.
Main chahoonga in vishaya par detail mein discussion ho, bina koi lafda/jhagda kiye hue. Jo sabhi log chahenge wahi hoga.
March 24th, 2007
पता नहीं तकनीक कितनी इजाजत दे पाएगी लेकिन क्या ये संभव है कि कोई न्यूनतम समयसीमा बॉंधी जा सके, पहले पन्ने पर मौजूद रहने की ताकि अचानक आई पोस्टों की बाढ़ में गुम हो जाने से बचा जा सके। मसलन 12 घंटे …
March 24th, 2007
“…मेरे विचार से सब को अपनी पोस्ट के कुछ अंश नारद पर जरुर दिखाने चाहिए इससे पाठक निर्णय कर सकता है कि उसे पोस्ट पढ़नी है या नहीं। अगर कुछ लोग यह समझते हैं कि सिर्फ शीर्षक दिखा कर ज्यादा पाठक मिलेंगे तो वह गलत हैं। मैं अधिकतर ऐसी पोस्टों को छोड़ दिया करता हूँ।…”
मेरा भी यही विचार है. समरी न आ सकती हो तो पोस्ट की पहली चंद लाइनें , जैसा कि पूर्व के नारद में होता था, तो होनी ही चाहिएँ ताकि समझ तो पड़े कि बंदे ने क्या विषय उठाया है - पढ़ने लायक है भी या नहीं. और कभी शीर्षक से ही उत्तम चिट्ठा पढ़ने से छूट जाता है.
दूसरी बात, अब चूंकि यहाँ चर्चा चल ही रही है, एक और सुझाव देना चाहूंगा (हालाकि यह मैं पहले भी दे चुका हूँ) क्लिक रेट को माउस होवर पर दिखाई दे ऐसा किया जाए तो हमारे कुछ साथियों के पोस्टों को जिन्हें क्लिक्स कम मिलते हैं, आगे चिट्ठे पोस्ट करने के प्रति उत्साह में कमी सी महसूस होती है - (कई दफ़ा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कहा गया है) उससे भी राहत मिलेगी.
March 24th, 2007
इस का इलाज मैं ने व्यक्तिगत तौर पर यह निकाला है कि मै ने गूगल रीडर में नारद की फीड डाल दी है, अपनी अन्य फीडों के साथ। वहाँ सब पोस्टों की एक लाइन दिखती है, और क्लिक करने पर उपलब्ध मसौदा दिखता है। दोबारा क्लिक करने पर आप ब्लॉग पर जा सकते हैं।
March 24th, 2007
मेरे विचार से इसके कुछ उपाय यह हो सकतें हैं।
१। हम नारद पर जा कर चिट्ठे न देखें पर जैसा रमन जी कह रहें हैं इसे फीड रीडर में देखें। मैम भी यही करता हूं। शायद आने वाले दिनो में हम सब यही करेंगे।
२। नारद में क्या कुछ अलग अलग श्रेणियां हो सकती हों तो जिनकी पोस्ट एक दिन में १ से ज्याद आती हो तो इसे अलग पेज में रखा जाय।
March 25th, 2007
वैसे तो मैं भी ऑपेरा फ़ीड रीडर से ही नारद को पढता हूँ. परंतु इसमें भी प्रविष्टियों के साथ पहली चंद लाइनें नहीं दिखतीं.
सवाल उन उपयोक्ताओं का है जो सिर्फ और सिर्फ नारद से पढ़ सकते हैं - (अकसर फ़ीड रीडरों के बारे में जानकारी नहीं होने से )
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