23 Mar
Posted as क्रिकेट विश्वकप
Tags:क्रिकेट विश्वकप, Cricket, world cup 2007पाकिस्तान को मात देकर भारत बना वो चुकन्दर, भई जब जो जीता वही सिकन्दर कह सकते हैं तो जो हारा वही चुकन्दर क्यों नही। खैर चुकन्दर का गणित अभी बताता हूँ लेकिन उससे पहले एक बात, वो ये कि पाकिस्तान और पाकिस्तानियों को ये समझ लेना चाहिये कि भारत से बडा उनका कोई मित्र नही है। पाकिस्तानी बाहर हुए तो एक वफादार दोस्त की तरह भारत भी खुद मैच फेंक टूर्नामेंट से बाहर की राह हो लिया।
इस विश्व कप का जो होगा सो होगा लेकिन ऐसा लगता है ये खेल बहुत जल्द ही अपना “सभ्य आदमियों के खेल” का तमगा खोने वाला है।
वैसे हमने एक बात नोट की है और वो ये कि हर कोई यही कहता है कि भारत की टीम कागज में बहुत मजबूत नजर आती है यानि की सब मानते हैं ये टीम वाकई में कोई मजबूत टीम नही है। कागज की नाव कितनी ही मजबूत क्यों ना हो पानी में उतरते ही डूब जाती है वो ही भारतीय क्रिकेट टीम का हाल है।
आप ऐसे खिलाडियों का क्या कीजियेगा जिनके नाम तो हजारों रिकार्ड हों लेकिन सब मिलकर भी एक विश्व कप तक ना दिला सकें। बेहतर तो यही होगा कि मुनाफ को छोड पूरी टीम ही बदल दी जाये और नये लडकों को मौका दिया जाय, अगर भारत वाकई में क्रिकेट मुकाबलों में कुछ करना चाहता है तो उसे ये करना ही होगा, चयन की प्रक्रिया में आक्रामक होना ही होगा लेकिन राजनीति के चलते ऐसा संभव नही लगता।
भारत की हार में बाजर का भी बहुत बडा हाथ है जिन्होंने विज्ञापन के जरिये इन खिलाडियों को इतना पैसा दे दिया कि खिलाडियों को पैसा कमाने के लिये मेहनत की जरूरत ही नही रह जाती। वैसे तो ये बहुत मुश्किल सा लगता है लेकिन कल का मैच अगर इंग्लैंड को हरा केन्या जीत जाता है तो तीन बडी बडी मछलियां बाहर तडपती नजर आ सकती हैं।
अब आते चुकन्दरी गणित की तरफ, भारत को चुकन्दर का खिताब इसलिये जाता है क्योंकि वो अन्धों में काना राजा है यानि कि बाहर होने वाली टीमों में भारत का रन रेट सबसे ज्यादा है।
[टैक्नोराती टैग्स: क्रिकेट, वर्ल्डकप, क्रिकेट वर्ल्डकप, Cricket, WorldCup, Cricket WorldCup]
8 Responses
समीर लाल
March 23rd, 2007 at 8:22 pm
1बाहर होने वाली टीमो
समीर लाल
March 23rd, 2007 at 8:23 pm
2हमारी तो टिप्पणी भी इनकी हालत देख शरमा कर कट गई…वाह रे यह चुकंदर!!
अनूप शुक्ला
March 23rd, 2007 at 9:07 pm
3सच है। अब तो हारने की इतनी आदत हो गयी है कि जीतने की खबर से झटका लगता है!
श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
March 23rd, 2007 at 10:58 pm
4बहुत खूब धन्य हैं हमारे कागजी शेर !
Anunad Singh
March 23rd, 2007 at 11:06 pm
5“आपने विषय/समस्या तो बहुत ही गम्भीर उठायी है, किन्तु इसके उपचार के लिये कोई ठोस उपाय बताने से बच निकले, और शायद इसी लिये ऐसी बातों को लिख दिया जो शायद अप्रासंगिक हैं।”
आपने बहुत सही विचारा है। समस्या के ‘जड़’ पर ही प्रहार करना कारगर होता है, केवल पत्ती तो.दने से कुछ नही होता।
मृणाल कान्त
March 24th, 2007 at 7:57 am
6मेरे पोस्ट मे लिखे अपनी टिप्पड़ी मे इस पोस्ट का लिंक देने के लिए धन्यवाद। बात और स्पष्ट हो जाती है।
आशीष
March 24th, 2007 at 1:40 pm
7हम उम्मीद करते है कि भारतिय टीम अगले २-३ वर्षो तक ऐसे ही हारते रहेगी और इस खेल का धीरे बोरीया बिस्तर बंद हो जाये।
खेल जगत के लिये बी सी सी आई का दिवालिया होने का दिन एक स्वर्णीम दिन होगा, मुझे उस दिन का इंतजार् है !
निठल्ला चिन्तन » विजयी भवो: वत्स!
April 27th, 2007 at 6:12 am
8[…] क्रिकेट वर्डकप संबन्धित पिछली कुछ पोस्ट 1. विडियोः इंडियन क्रिकेट टीम 2. क्रिकेट २००७: जो हारा वो ही चुकन्दर 3. क्रिकेट विश्वकप में आप भी खेलें क्रिकेट […]
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