मेरे पांच जवाबः द लास्ट समुराई

मैथिली जी के पूछे गये पांच सवालों के जवाब।
पांच सवाल रूपी टैग नामक योद्धा से अभी तक लगभग सभी चिट्ठाकार लोग भिड चुके हैं, हम शायद लास्ट समुराई ही होंगे। अगर आप लोग ये समझते हैं कि हमने हिन्दी में सक्रिय रूप से चिट्ठा लिखना अपने हिन्दी प्रेम की वजह से किया था तो बिल्कुल गलत समझते हैं। हम वास्तव में अंग्रेजी चिट्ठे में अक्सर भिडंत के लिये तैयार बैठे इस टैग रूपी योद्धा से बचने के लिये हिन्दी चिट्ठा जगत में सक्रिय हुए अब क्या पता था ये मुआ यहाँ भी सताने आ जायेगा।

बल्कि एक बार तो हमने अंग्रेजी में मिले “आदर्श प्रेमी कैसा हो” पर ये सोचकर हिन्दी में लिख दिया कि शायद अगली बार टैग से बच जांयें (आवारा पागल दिवाना यानि कि परफेक्ट प्रेमी यहाँ पढें)। ऐसा कुछ हुआ नही अब तो इसने हिन्दी चिट्ठा जगत में भी पैर फेला दिये हैं अब कही बचके जाने की कोई वजह ही नही बची। औरों का तो पता नही लेकिन हम तो यही मनायंगे कि अमित उस “सपने रूपी प्रक्क्षेपात्र” का प्रयोग हिन्दी चिट्ठाजगत में ना करें जो उन्होंने अभी तक अपने तरकश में संभाल के रखा है, हमारे पास उसका कोई तोड भी नही है।

अब आते हैं पांच सवालों की तरफ -

प्रश्न १. आपका सबसे पसंददीदा लेखक कौन है?
सही बताऊँ तो कोई एक नही है क्योंकि मैं लेखक देख के किताब सलेक्ट नही करता बल्कि किताब की विषय वस्तु देखता हूँ, मैने लायब्रेरी जाना तब शुरू किया था जब मैं पांचवी या छटी कक्षा में होंउगा। तब से ही चाहे मैं किसी भी शहर में क्यों ना चला जाऊं सबसे पहले उस शहर की लायब्रेरी का पता करता हूँ और उसका मेम्बर बनता हूँ (नब्बे का दशक इसका अपवाद है)। मैने जहाँ शरत चन्द्र को पढा है वहीं सुरेन्द्र मोहन पाठक भी, जिस उत्साह से मैने इन्द्रजाल कॉमिक्स पढे उसी उत्साह से राजन इकबाल सीरिज भी। जहाँ अमर चित्र कथायें पढी है वहीं शैक्सपियर के भी २-३ नावेल पढे हैं, लेकिन कालेज खत्म होते ही मेरा स्वाद भी बदल गया और मैं फिक्शन छोड के नान-फिक्शन पसंद करने लगा, ओशो के द्वारा लिखी अधिकांश किताबें मैने पढी हैं। अब मुझे फिक्शन कतई पसंद नही आते।

प्रश्न २. आपने सर्व प्रथम किस हिन्दी चिट्ठे की किस प्रविष्टि को अपने कम्प्यूटर पर कापी कर के रखा.
जहाँ तक मुझे याद है फिलहाल तो अभी तक किसी को भी कॉपी नही किया हाँ एक दो पोस्टों को बुकमार्क किया था कहीं किसी में फिलहाल याद नही आ रहा कहाँ।

प्रश्न ३. बचपन की कौन सी घटना आपको अब तक याद है?
वैसे मेरी याद्दाश्त इतनी अच्छी नही है लेकिन एक घटना अभी कुछ दिनों पहले ही मृदुला की एक पोस्ट को पढके आयी थी वो ही बता देता हूँ। मैं चौथी या पांचवी क्लास में था और हमारा वार्षिक जलसा होने वाला था उसमें सांस्कृतिक प्रोग्रामों में मैने भी भाग लिया था। तो ऐसे ही एक नाटक के लिये हमें कुछ नकली गहने या ड्रैस चाहिये थे जो हमारी टिचर जल्दी में अपने घर भूल आयी। उन्होंने मुझे और मेरे एक सहपाठी को अपने घर वो चीजें लाने के लिये भेजा। हम दो नन्हें मुन्ने बच्चे खुशी खुशी चल दिये, टिचर के घर जाकर सामान लिया लेकिन जैसे ही कमरे से बाहर निकले तो आंगन के दरवाजे पर अपने से डबल साईज के दो कुत्ते जो हमें देखते ही हमारे पीछे दौडे और हम उन कुत्तों को देख मकान के पीछे की तरफ दौडे। मकान के पीछे शायद गाय वगैरह बांधने की जगह होगी क्योंकि हमारे पैर में बहुत कुछ लग चुका था। कुत्ते अभी भी पीछे थे थोडा और भागने पर आगे रास्ता बंद लेकिन नीचे कुछ दूरी पर सडक दिखायी दे रही थी। सडक और जहाँ हम खडे थे उसके बीच में थी खतरनाक बिच्छू झाडियां (जिस उत्तरांचल में कंडाली भी कहते हैं), जिसके शरीर में लगते ही ऐसी खुजली शुरू होती है कि पूछो मत। तो अपना हाल ये था कि आगे कुंआ (बिच्छू घास) पीछे खाई (कुत्ते), जायें तो जायें कहाँ। जब कुत्ते हमें दबोचने ही वाले थे तो हमने बिच्छू झाडियों में छलांग लगा दी। उसके बाद हम दोनों कैसे वापस स्कूल पहुँचें और कैसे नाटक में अपना अपना पार्ट अदा किया वो हम ही जानते हैं अब आपको क्या बतायें, खुद ही सोच लीजिये क्या हाल हुआ होगा हमारा।

प्रश्न ४. आपने अपने कम्यूटर में हिन्दी में सबसे पहले किस साफ़्टवेयर में टायप किया और कब?
हमने कंप्यूटर में सबसे पहले इधर उधर वाले रमण जी के हिन्दी के लिये बनाये टाईपराइटर को यूज किया था जोकि आजकल यूनिनागरी के नाम से है और ये शुरू किया था कोई २ साल पहले। आज भी हम उसी को उपयोग में लाते हैं।

प्रश्न ५. कौन सा एसा काम है जिसे आप करना चाहते थे पर आपने नहीं किया, पहले किसी दूसरे ने कर लिया और आपको इसका अफ़सोस हुआ.
ऐसे बहुत से काम थे जो हम करना चाहते थे लेकिन देखा कि पहले ही किसी ने उसे कर दिया है, पहले थोडा अफसोस होता है और था कि हमने क्यों नही पहले किया लेकिन बाद में याद भी नही रहती इस बात की।

ये थे हमारे पांच सवाल, अब चूंकि टैग करने को कोई बचा नही जिन्हें हम अपना शिकार बनाना चाहते थे सबके सब शिकार हो चुके हैं और अब तक हुए सभी शिकारों के उत्तर भी हमने पढे हैं इसलिये बगैर किसी को अपना शिकार बनाये इस टैग रूपी पोस्ट को विराम लगाते हैं।

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Tarun
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13 Responses to “ मेरे पांच जवाबः द लास्ट समुराई ”

  1. सुरेन्द्र मोहन पाठक को तो बहुतेरे पढते हैं, पर स्वीकार विरले ही करते हैं.
    आपके बचपन की घटना काफी डरावनी है

  2. आप के जवाब पसन्द आए।

    आपने स्वप्नों के टैग वाला खेल याद दिला ही दिया। मैंने देखा था उसे कुछ दिन पहले ही - क्या नाम लें, अब नाम ले कर कड़ी देने से तो इस के संक्रमण की संभावना बढ़ेगी ही। वैसे भी ज्ञानी जनों ने तो देखा ही होगा।

  3. सही है। इति श्री कथा अंतिमों अध्याय समाप्त: लिख दो अंत में!

  4. बहुत सही, तरुण. सधे हुये जवाब. न ऊधो का ले केना ना माधव का देना. यूँ ही जवाब अच्छे रहते हैं. :)

  5. जब सब आपको पास करने पर तुले हुए हैं तो हम क्या मीन-मेख निकाले. आपको पास घोषित करते है :)

  6. भई पढने के मामले में तो आपकी और हमारी पसंद बिल्कुल मिलती है, सिवाय ओशो को छोड कर….और ये कि नान फोक्शन और फिक्शन दोनो पर समान स्नेह रखता हूं

    मैथिली जी, हम भी खूब पढते हैं ना सु मो पा को..और स्वीकार भी करते हैं :)

  7. आपके जबाबों की धार तो समुराई की तलवार से भी ज्यादा तेज निकली…. प्रश्नों को चीरती हुई निकल गयी.
    मगर कुच्छ कुत्ते सिर्फ भौंकने वाले होते हैं काटने वाले नही..आपने कैसे पता लगाया कि यह तो काटने वाले ही है ?

  8. तरुण भाई!
    आपने शेक्सपीयर के नाटक पढे होंगे. हमने भी वही पढ़े हैं .

  9. नितिन जी,
    मैं भी सु मो पा को बहुत पसंद करता हूं. कभी कभी तो बातचीत से पता चल जाता है कि अमुक व्यक्ति सु मो पा को पढता है.

  10. खूब तरूण भाई, अब तो आपने अपना भय स्वीकार कर अपने को फ़ंसा लिया। आपको तो अब अवश्य शिकार बनाऊँगा!! ;)

    सुरेन्द्र मोहन पाठक को तो बहुतेरे पढते हैं, पर स्वीकार विरले ही करते हैं.

    ऐसा सिर्फ़ वे करते हैं जो हिन्दी उपन्यास पढ़ना स्वीकार करने को हीन समझते हैं, और इस कारण वे किसी भी उपन्यासकार को पढ़ें, स्वीकार नहीं करेंगे।

    सुरेन्द्र मोहन पाठक को मैं भी पढ़ता हूँ, लेकिन सिर्फ़ विमल और सुनील सीरीज़, विमल का तो मैं फ़ैन हूँ। इसी तरह मैं अनिल मोहन के देवराज चौहान सीरीज़ को भी पढ़ता हूँ, वह किरदार भी मुझे बेहद पसंद है। :)

  11. वाह तरुण भाई अच्छा जवाब दिया!!! :)
    लगा कुछ छिपाया भी पर उढेला ज्यादा…!!!

  12. आप सभी लोगों के जवाब पसंद आये शुक्रिया :)

    @मोहिन्दर भाई ८-९ साल के बच्चे को कहाँ पता होता है कि भौंकने वाले और काटने वाले कुत्तों में फर्क होता है। अब देखिये ना आदमी को पता होता है कि शेर तभी शिकार करता है जब भूखा होता है लेकिन फिर भी अगर आदमी को शेर दिख जाये तो भागने में ही भलाई समझता है, इंतजार नही करता ये देखने का कि शेर का पेट भरा है या खाली। :)

  13. मैंने एक बात नोट की तरुण भेजी आप हमेशा बहुत संतुलित किस्म का लिखते हैं।

    कंडाली का स्वाद तो यहाँ पर बस आप और मैं ही जान सकते हैं या फिर वो जिसने चखा हो। :)

    वैसे कंडाली Vs कुतों में आपका चुनाव सही था।

    हमने कंप्यूटर में सबसे पहले इधर उधर वाले रमण जी के हिन्दी के लिये बनाये टाईपराइटर को यूज किया था जोकि आजकल यूनिनागरी के नाम से है और ये शुरू किया था कोई २ साल पहले। आज भी हम उसी को उपयोग में लाते हैं।

    आज भी उसी को उपयोग में लाने से आपका मतलब सिर्फ ऑनलाइन उपयोग हेतु है या हमेशा उसी को उपयोग करते हैं ? ऐसा है तो कॉपी पेस्ट करने में बहुत वक्त लगता होगा।

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