बात जो बन गयी चुटकला

बूँद जो बन गयी मोती की तर्ज पे ही हम वो बात बता रहे हैं जो खत्म होते होते एक चुटकला बन गयी। ये वाक्या अभी कुछ दिनों पहले हमें दी गयी पार्टी का है, हमारे एक दोस्त अच्छा गाना गाते हैं तो जैसा कि पार्टी में होता है सब ने बोलना शुरू कर दिया उनसे गाना सुनाने के लिये। तो हमारे वो दोस्त बोले आज नही, आज गला खराब है तो गाना नही सुना सकते, उनकी बात सुनते ही हमारे दूसरे दोस्त की हमकदम हमनिवाला यानि कि बेगम साहिबा ने झठ से फरमाया तो ठीक है फिर हिमेश रेशमिया का कोई गीत सुना दीजिये।

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Tarun
निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारों की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की; संक्षेप में कहूँ तो ये है थोड़ी मस्ती थोड़ा चिंतन।

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3 Responses to “ बात जो बन गयी चुटकला ”

  1. बोत सई चुटकुला है जी, सुना हिमेश भाई नाक से गाने की बजाय गले से गाने की सोच रहे हैं तो आपके दोस्त का चांस बन जाएगा।

  2. :) हा हा. अक्सर ऐसी मजेदार बातें हो जाती हैं. :)

  3. वो कुमार सानु का भी गाना गा सकते थे. वैसे मेरे साथ भी बिल्कुल ऐसी ही घटना घटी कई वर्षों पूर्व जब गला खराब का बहाना बनाने वाले गवैय्ये से किसी ने शैलेन्द्र सिंह का गाना गाने को कहा.

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