बात जो बन गयी चुटकला
बूँद जो बन गयी मोती की तर्ज पे ही हम वो बात बता रहे हैं जो खत्म होते होते एक चुटकला बन गयी। ये वाक्या अभी कुछ दिनों पहले हमें दी गयी पार्टी का है, हमारे एक दोस्त अच्छा गाना गाते हैं तो जैसा कि पार्टी में होता है सब ने बोलना शुरू कर दिया उनसे गाना सुनाने के लिये। तो हमारे वो दोस्त बोले आज नही, आज गला खराब है तो गाना नही सुना सकते, उनकी बात सुनते ही हमारे दूसरे दोस्त की हमकदम हमनिवाला यानि कि बेगम साहिबा ने झठ से फरमाया तो ठीक है फिर हिमेश रेशमिया का कोई गीत सुना दीजिये।

बोत सई चुटकुला है जी, सुना हिमेश भाई नाक से गाने की बजाय गले से गाने की सोच रहे हैं तो आपके दोस्त का चांस बन जाएगा।
वो कुमार सानु का भी गाना गा सकते थे. वैसे मेरे साथ भी बिल्कुल ऐसी ही घटना घटी कई वर्षों पूर्व जब गला खराब का बहाना बनाने वाले गवैय्ये से किसी ने शैलेन्द्र सिंह का गाना गाने को कहा.