हम तो विरोध करेगा
कुछ दिनों से गहमा गहमी सी है इंडी ब्लोगीज के नोमिनेशन के तरीके को लेकर, जिनको पसंद नही आया बैठ गये विरोध में लिखने। हो सकता है किसी को ठीक भी लगा हो लेकिन जैसा कि होता है कि ज्यादातर लिखना विरोध के लिये ही होता है तो किसी ने कहा नही कि तरीका बुरा नही है। सबसे आसान तरीका है किसी बात का विरोध करना क्योंकि इसमें किसी का कुछ नही जाता, हम भी करते हैं, दूसरे लोग भी करते हैं, हम तो खैर अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं विरोध में लिखना। विरोध करने का सबसे बढा फायदा ये है कि ये हमारे अहं की संतुष्टि करता है वहीं अगर हमें तारीफ के दो लफ्ज बोलने पडें तो अपना अहं आडे आता है।
अब अपने राजनेताओं को ले लो, कभी किसी बात पे सरकार का समर्थन करते नजर आये क्या, कैसे आ सकते हैं अगर समर्थन कर दिया तो फिर विरोधी पार्टी के कैसे कहलायेंगे। सचिन को ही देख लो रनों का अम्बार लगा दिया है लेकिन फिर भी कोई ना कोई विरोध में कुछ बोल ही देता है। हर एक धर्म के भगवानों के भी विरोधी रहे हैं तो इंसान क्या चीज है। देबाशीष ने इंडी ब्लोगीज शुरू किया, चलो अच्छा किया शायद हमें भी कुछ मिल जाये लेकिन ये क्या ना पहले साल मिला, ना दूसरे, ना ही तीसरे में नंबर आया, और तो और आगे के चांस भी धूमिल ही लग रहे हैं तो अब क्या। अब क्या, क्या? दलबदल लेते हैं विरोधियों में शामिल हो जाते हैं, बदनाम होंगे तो क्या कुछ नाम तो होगा। लगे एक के बाद एक करके कहने कि इतना ही अगर दिमाग होता तो क्या ब्लोग लिख रहे होते, चलो मान लिया कि इतना दिमाग नही कि आसान सा तरीका भी समझ ना आये लेकिन इतना तो है कि कोई तरीका ही ईजाद करके बता दें।
हर एक चीज की शुरूआत होती है गल्तियों के पुलिंदों के साथ, आइडिये आते हैं और उसमें सुधार होता जाता है। जब कमरे जितना कंप्यूटर आया था पहले-पहले, अगर तब कोई कह देता कि ये क्या बना दिया इसको कोई यूज कैसे करेगा तो शायद ना आज कोई पुरस्कार होता ना उसके लिये नोमिनेशन और ना ही विरोध, ना आप विरोध कर रहे होते ना हम। अब सवाल ये है कि जब तरीका इतना दुष्कर है तो इतने सारे नोमिनेशन आ गये, अगर ये आसान होता तो क्या होता? किसी साहेब को इस बात की भी शिकायत थी कि मदद खुले आम क्यों मांगी अलग से मेल लिखकर मांगनी थी। अब अलग से मेल लिखकर कोई कितनी मदद करता है ये तो अभी कोई बता नही सकता। लेकिन हाँ, अगले साल के नोमिनेशन के लिये तरीके तो सुझा सकता है।
हो सकता है कि इंडी ब्लॉगीज के नोमिनेशन में सुधार की जरूरत हो लेकिन कितने लोगों ने नये आइडिये बतायें हैं, मेरी नजर में तो कोई नही आया। अगर किसी को प्रोब्लम है तो दूर रहे इससे और अगर दूर नही रह सकते तो लिखते रहें वो ही सब। हो सकता है इससे कुछ और लोगों को पता चल जाये इंडी ब्लॉगीज का। हमने तो शुरूआत में ही कह दिया था हम तो विरोध करेगा, उन्होंने इंडी ब्लागीज के नोमिनेशन का किया हमने उनका किया अब आपकी बारी है, हमारा कीजिये या उनका, कुछ नही सूझे तो इंडी ब्लागीज तो है ही ना ;)।




भईया, हम इस पंगे मे नही पड़ेंगे, हम खुद जुगाड़ मे लगे हैं. अगर नामिनेट हो गये गल्ती से, तो वोट दे देना भाई. कुछ शक्ल दिखाने लायक छोड़ना. ऐसी भी क्या नाराजगी…
विरोध तो कुछ लोग करेंगे ही! अब नामीनेशन के लिये ही यह सुविधा भी थी कि लोग मेल कर दें लेकिन रोने के बिना मजा नहीं आता न!
कमर कस ले, हर प्रयास का विरोध तो होता ही है. वैसे हिन्दी वालो में किसने विरोध किया है?
हमने तो गुजराती ब्लोगरों को भी इस बारे में बताया था. खुद का नामांकन नहीं किया. कहीं जीत जाते तो?
इंडिब्लोगीज के प्रचार में कुछ कमी अवश्य रह गई है. ज्यादातर लोग हाँफते पाए गए कि नोमिनेशन कैसे करें, कितनों को तो पता ही नहीं कि कोई आयोजन भी हो रहा है.
पर यहाँ सच है कि विरोध क्ररना बहुत आसान है. पर किसी आयोजन के पीछे की गई मेहनत किसी को नहीं दिखती.
इतना बड़ा-बड़ा लिखा है ‘हम तो विरोध करेगा’, सुना है सारे बामपंथी तरुण को ढ़ूंढ़ने में लगे हुये हैं.
करो जी विरोध बिदास होके, हिन्दुस्तानियों का ये तो जन्मसिद्ध अधिकार है।
Tarun bhai,
अगर विरोध न हुआ तो समझते है; आप फ्लाप हो गये…आजकल तो लोग पैसे दे कर विरोध करवाते है…जितना विरोध होगा मसला उतना ही हिट होगा…यही भारत की परंपरा है…मैने भी कोशिश की है पता नहीं नोमिनेसन लगा की नहीं…मसला चुनकर उठाया है—Thnx.
भाई, हमें तो इतना ही पता है जो भी हो रहा है, चाहे हमें समझ आए या न आए उसके विरोधियों में हमारा भी नाम लिख लीजिए । खैर यह तो था मजाक , पर सच में विरोध करने से सरल कुछ भी नहीं ।
घुघूती बासूती