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हिंदी चिट्ठाजगत और २ बरस का सफर

वैसे तो ये पोस्ट हमें दो दिन बाद लिखनी चाहिये थी लेकिन हमें मालूम है कि आज नही लिख पाये तो फिर शायद ही इसका नंबर आयेगा। इसलिये आज को ही २६ तारीख समझ आप भी ये पोस्ट पढ लीजिये। कभी सोचा नही था कि टाईप कर कर के कुछ पोस्ट करने का सिलसिला यूँ [...]

[ More ] February 24th, 2007 | 11 Comments | Posted in खालीपीली |

कोई मुसल्लों की वॉट लगाये कोई किसी को धर्म सिखाये

आजकल हमारी जालस्थल और चिट्ठाजगत दोनों से दूरी बढती जा रही है और ये बदस्तूर आने वाले काफी वक्त तक जारी रहेगा लेकिन आज जब फुरसत के क्षण में नारद को ऊपर से नीचे तक एक सरसरी निगाह डाल के पिछले कुछ दिनों में पहने उसके कपडो में नजर डाली तो लग गया कि नारद [...]

फिल्म समीक्षाः एकलव्य और दो बोनस

फिल्म की लम्बाई की तरह ही छोटी समीक्षा की जायेगी, लेकिन जितनी बढिया फिल्म है शायद उतनी बढिया समीक्षा ना हो पाये। विदु विनोद चोपडा की अभी तक मैने सारी फिल्म देखीं हैं और आज ही एकलव्य भी देख कर आये। उन्होने इस फिल्म के साथ भी अपना ट्रैक रिकार्ड बरकरार रखा है जिसका मतलब [...]

[ More ] February 19th, 2007 | 3 Comments | Posted in फिल्म समीक्षा |

व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर टिप्पणी

आजकल व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर बहस चालू है, बहुतों ने बहुत कुछ लिखा, विवेचन किया तो मैंने सोचा बजाय हर आलेख पर टिप्पणी करने के क्यों ना उस टिप्पणी को पोस्ट की शक्ल दे दी जाय। व्यावसायिकता की बातें तो बहुतों ने पहले ही कर दी इसलिये मैने सोचा कि क्यों ना चिट्ठाकारों (हिन्दी और अंग्रेजी [...]

बात जो बन गयी चुटकला

बूँद जो बन गयी मोती की तर्ज पे ही हम वो बात बता रहे हैं जो खत्म होते होते एक चुटकला बन गयी। ये वाक्या अभी कुछ दिनों पहले हमें दी गयी पार्टी का है, हमारे एक दोस्त अच्छा गाना गाते हैं तो जैसा कि पार्टी में होता है सब ने बोलना शुरू कर दिया [...]

देखिये फिल्म – इंटरव्यू

आखिरकार फिल्म पूरी हो ही गई, फिल्म जगत के इतिहास में ये शायद पहली फिल्म होगी जो किसी ब्लोग या चिट्ठे में रीलिज हुई हो। पहले कहानी टीपने का इरादा था लेकिन बाद में खुद की स्क्रिप्ट लिखनी पढी, आवाज देने को कलाकार पूरे नही मिले इसलिये पूरा मजा लेने के लिये टाईटिल पे भी [...]

[ More ] February 15th, 2007 | 16 Comments | Posted in फिल्म और खेल |

नमः शिवाय बैंक

क्या आपने कभी इस नाम के बैंक के बारे में सुना है, अगर नही सुना तो ये पढ लीजिये। ये बैंक है उत्तर प्रदेश के एक शहर काशी में, अब आप लोग जरूर सोच रहे होंगे ये कहीं कोई विदेशी बैंक तो नही। जी नही ये विदेशी नही बल्कि खालिस देशी बैंक है। इस बैंक [...]

[ More ] February 15th, 2007 | 3 Comments | Posted in बस यूँ ही |

आओ जानें वर्डप्रेस हैडर

आज मैं आपको बताता हूँ वर्डप्रेस हैडर के बारे में, इसके बाद आप भी अपनी साईट में हैडर आराम से बदलने लायक हो जायेंगे। शिल्पी जी ने मुझसे पूछा था कि ये हैडर कैसे बदलते हैं तो मैने सोचा क्यों ना अगली पोस्ट इस पर ही लिख दूँ। हैडर किसी भी साईट का वो हिस्सा [...]

[ More ] February 14th, 2007 | 6 Comments | Posted in ज्ञान विज्ञान |

उनकी कमीज मेरी कमीज से सफेद कैसे

इंडी ब्लागीज के दूसरे चरण के लिये पहुँचे चिट्ठों की घोषणा हो चुकी है, कुल मिलाकर 175 चिट्ठे इस मुकाम तक पहुँचे। हमने भी हाथ आजमाये थे, हिन्दी और बेस्ट डिजायन की कैटगरी के लिये। हिन्दी में तो हमें पता था कि हम से एक से एक धुरंधर बैठे हैं इसलिये हमारे जैसे चिट्ठे उनके [...]

[ More ] February 11th, 2007 | 5 Comments | Posted in बस यूँ ही |
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