वैसे तो ये पोस्ट हमें दो दिन बाद लिखनी चाहिये थी लेकिन हमें मालूम है कि आज नही लिख पाये तो फिर शायद ही इसका नंबर आयेगा। इसलिये आज को ही २६ तारीख समझ आप भी ये पोस्ट पढ लीजिये।
कभी सोचा नही था कि टाईप कर कर के कुछ पोस्ट करने का सिलसिला यूँ २ […]

आजकल हमारी जालस्थल और चिट्ठाजगत दोनों से दूरी बढती जा रही है और ये बदस्तूर आने वाले काफी वक्त तक जारी रहेगा लेकिन आज जब फुरसत के क्षण में नारद को ऊपर से नीचे तक एक सरसरी निगाह डाल के पिछले कुछ दिनों में पहने उसके कपडो में नजर डाली तो लग गया कि नारद […]

फिल्म की लम्बाई की तरह ही छोटी समीक्षा की जायेगी, लेकिन जितनी बढिया फिल्म है शायद उतनी बढिया समीक्षा ना हो पाये। विदु विनोद चोपडा की अभी तक मैने सारी फिल्म देखीं हैं और आज ही एकलव्य भी देख कर आये। उन्होने इस फिल्म के साथ भी अपना ट्रैक रिकार्ड बरकरार रखा है जिसका मतलब […]

आजकल व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर बहस चालू है, बहुतों ने बहुत कुछ लिखा, विवेचन किया तो मैंने सोचा बजाय हर आलेख पर टिप्पणी करने के क्यों ना उस टिप्पणी को पोस्ट की शक्ल दे दी जाय। व्यावसायिकता की बातें तो बहुतों ने पहले ही कर दी इसलिये मैने सोचा कि क्यों ना चिट्ठाकारों (हिन्दी और अंग्रेजी […]

बूँद जो बन गयी मोती की तर्ज पे ही हम वो बात बता रहे हैं जो खत्म होते होते एक चुटकला बन गयी। ये वाक्या अभी कुछ दिनों पहले हमें दी गयी पार्टी का है, हमारे एक दोस्त अच्छा गाना गाते हैं तो जैसा कि पार्टी में होता है सब ने बोलना शुरू कर दिया […]

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