27 Jan
Posted as जरा हट के
Tags:जरा हट के, hindi blogging, radioसुनिये वर्जीनिया रेडियो पर अनुराग द्वारा आयोजित हिन्दी ब्लोगिंग वार्ता में देबाशीष, ईस्वामी, शुकुल जी और अनुराग के बीच हुई बातचीत। बीच में हम ने भी ट्राई मारा था अपनी टांग अडाने का लेकिन कामयाब नही हो पाये तो जिस दौरान हम स्काईप पर कनेक्टेड थे उतने समय की बातचीत रिकार्ड नही कर पाये, अन्यथा बीच बीच में बजने वाले गानों को छोडकर सभी कुछ रिकार्ड करने की कोशिश की है। तो आपमें से जो नही सुन पाये, यहाँ सुन सकते हैं। (सुनने के लिये प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
आगाज हुआ इसके साथ
फिर बातचीत परवान चढी ऐसे
ऐसे
और ऐसे
अन्त में कुछ यूँ हुआ समापन
20 Responses
सृजन शिल्पी
January 27th, 2007 at 9:50 pm
1तकनीकी कारणों से मैं भी इस बातचीत में शामिल नहीं हो पाया और यह कार्यक्रम सुन भी नहीं पाया। हालाँकि अनुराग, अनूप जी और देबाशीष जी के साथ कार्यक्रम के पहले हमारी बातचीत हुई थी। आपने बातचीत को यहाँ प्रस्तुत करके बहुत अच्छा किया। बहुत-बहुत धन्यवाद। पहली बार ई-स्वामी और अनूप भाई की आवाज सुनने को मिली, जिनके मँजे हुए लेखन के हमलोग कायल रहे हैं। यह चर्चा अच्छी रही। आशा है कि अनुराग इस तरह के आयोजन भविष्य में भी करते रहेंगे।
अनूप शुक्ला
January 27th, 2007 at 10:42 pm
2भाई हम भी इनटरनेशनल हो गये! लेकिन अपनी ही मधुर आवाज हम सुन नहीं पा रहे हैं! इसे जरा बातचीत को पोस्ट करो न! ऐतिहासिक वार्ता है यह भाई!
Jitu
January 27th, 2007 at 11:51 pm
3भई, हम भी तकनीकी,पारिवारिक और व्यक्तिगत वजहों से शामिल नही हो सके, इसके लिए इस शो के मेजबान से व्यक्तिगत रुप से क्षमायाचना कर चुके है। प्रोग्राम बहुत अच्छा रहा।
अनुराग, इसको आफलाइन रिकार्डिंग करने की कोशिश करेंगे। आप सवाल भेज दीजिए (अगले हफ़्ते के) हम जवाब रिकार्ड करके भेज देंगे।
संजय बेंगाणी
January 28th, 2007 at 1:13 am
4आपने यहाँ कार्यक्रम को रिकार्ड कर रखने का अच्छा कार्य किया है. मैं किसी भी रूप में इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाया था. यहाँ सुन कर अच्छा लगा. खाश कर ई-स्वामी का ‘अंग्रेजी लहजा’ व फुरसतीयाजी का हिन्दी आग्रह.
सुनील
January 28th, 2007 at 1:56 am
5अनूप, देवाशीष, ईस्वामी, अनुराग, तुम सब की आवाज़ें सुन कर बहुत अच्छा लगा और इस भेंटवार्ता को सब के लिए प्रस्तुत करने का धन्यवाद.
Jagdish Bhatia
January 28th, 2007 at 2:27 am
6बहुत ही मजा आया पूरी बातचीत सुन कर।
सभी भाग लेने वालों को बधाई तथा तरुन जी को धन्यवाद।
रवि
January 28th, 2007 at 4:59 am
7मजेदार बातचीत रही. खासकर (संभवतः) जूनियर देबू की बीच-बीच में आती विस्मय कारी आवाजें…?
और, बातचीत में खासतौर पर मुझे याद करने के लिए धन्यवाद. चाहता तो मैं भी था इस बातचीत में भाग लूं, परंतु मैं ठहरा ऑफ़लाइन जीवी, तो यह संभव नहीं हो पाया.
तरुण को धन्यवाद इस बातचीत को रेकॉर्ड कर यहाँ उपलब्ध कराने के लिए.
Divyabh
January 28th, 2007 at 5:01 am
8अच्छा लगा बातें सुनकर हमतक पहुँचाने का शुक्रिया…।कामना करता हूँ कि हमारी भाषा ऐसे ही लोगों के प्रयास से विश्व खिड़की को खोलती रहे…
समीर लाल
January 28th, 2007 at 9:18 am
9वाकई बहुत सार्थक कदम है और अनुराग जी को साधुवाद तथा अनूप भाई, देबु दा और ई-स्वामी जी को बहुत बधाई और धन्यवाद.
आशा है आप इसे एक लेख में परिवर्तित करके भी पेश करेंगे, हालांकि मैं प्रस्तुत रिकार्डिंग को पूर्ण्तः सुन पाया.
अनुराग मिश्र
January 28th, 2007 at 11:07 am
10तरुन जी को रिकार्डिंग पोस्ट करने का शुक्रिया। आप लोगों को कार्यक्रम अच्छा लगा, इसका भी धन्यवाद। कार्यक्रम के अनुभव मैं जल्दी लिखने की कोशिश करूँगा। भविष्य में क्या किया जा सकता है, ये भी विचार कर के जल्दी ही लिखुँगा।
ई-स्वामी
January 28th, 2007 at 2:26 pm
11धन्यवाद!
बोलने से अधिक ध्यान तो इस बात में रहा की ससुरा स्काईप कनेक्शन ही ना टूट जाए!
rachana
January 28th, 2007 at 10:56 pm
12तरुण जी, धन्यवाद. सबको सुनना अच्छा अनुभव रहा. अनुराग मिश्रा जी,आपको भी बहुत धन्यवाद.
देबाशीष
January 29th, 2007 at 1:05 am
13रिकॉर्डिंग पोस्ट करने के लिये तरुण तुम्हें और अनुराग को इस आयोजन के लिये शुक्रिया! बड़ा ही रोचक और नया अनुभव रहा यह, हालांकि अनुराग ने मुझे मन भर बोलने नहीं दिया
ईस्वामी ने सही कहा कि हमें बोलने से ज़्यादा कनेक्शन की चिंता सताती रही, अनूप का संपर्क भी बीच बीच में टपकता रहा।
रवि भैया, जूनियर देबू तो तब तक सो चुके थे तो वो नन्ही आवाज़ किन की थी
, तरुण?
Tarun
January 29th, 2007 at 8:06 pm
14आप सभी लोगों का शुक्रिया करने के लिये शुक्रिया
, और वो आवाज बीच बीच में लिटिल ड्रैगन की ही थी। अपने को पता नही था कि अपना सस्ता सा माइक्रोफोन इतना जबरदस्त है।
सुन सुना at नुक्ताचीनी
February 3rd, 2007 at 12:37 pm
15[…] सुन सुना 0 minutes पूर्व ज़िंदगी आनलाईन श्रेणी में प्रकाशित टैग: wuvt,hindi,podcast,indicast,indibloggies इस चिट्ठे के नियमित पाठक रेडियो जॉकी बनने की मेरी छुपी अभिलाषा के बारे में पढ़ चुके होंगे, और यह भी कि कैसे मैं अवसर मिलने पर भी यह पूर्ण न कर सका। पर हाल के दिनों में दो ऐसे अवसर मिले जब मुझे श्रव्य माध्यमों पर बोलने का मौका मिला। पहला मौका था रेडियो पर सीधे प्रसारित एक कार्यक्रम में शुमारी का। गीत संगीत में पिरोये इस कार्यक्रम को वर्जीनिया, अमेरिका साथी चिट्ठाकार अनुराग मिश्र WUVT 90.7 FM पर भारतीय श्रोताओं के लिये सप्ताहांत में प्रस्तुत करते हैं। मेरे साथ थे धुरंधर चिट्ठाकार अनूप शु्क्ला और ईस्वामी। तरुण और सृजन शिल्पी भी शामिल होने वाले थे पर दुर्भाग्यवश हो न पाये। अगर आप ने अब तक न सुना हो तो हिन्दी तथा भारतीय भाषा में चिट्ठाकारी पर हुई इस चर्चा के कुछ अंश तरुण के ब्लॉग पर सुन सकते हैं। […]
Null Pointer » Blogging with my vocal chords
February 3rd, 2007 at 12:45 pm
16[…] I had never used Skype before but am I happy to have used it now. Last fortnight I, along with few blogger friends from the Hindi blogdom, were invited to a live radio show of WUV Radio, a student owned raio station at Verginia tech, which is hosted by fellow blogger Anurag Mishra, where we talked about Hindi blogging, and probably first time ever on radio. […]
nikhil anand
March 19th, 2007 at 7:23 am
17do visit
www.swar-samvedna.blogspot.com
www.bura-bhala.blogspot.com
nikhil anand
March 19th, 2007 at 7:25 am
18plz do visit www.swar-samvedna.blogspot.com
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श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
April 20th, 2007 at 11:14 pm
19वाह वाह बहुत ही अच्छा रहा यह आयोजन। ईस्वामी, देबु दा और फुरसतिया जी की आवाज को सुनना मजेदार अनुभव रहा। फुरसतिया जी को तरकश पर भी सुन चुके थे लेकिन स्वामीजी और देबुदा को पहली बार सुना। फैंटम की आवाज बड़ी मधुर थी।
बीच बीच में तकनीकी व्यवधान से मजा खराब होता रहा। तरुण भेजी को यह पॉडकास्ट उपलब्ध करवाने के लिए धन्यवाद अन्यथा हम इसे कहाँ से सुन पाते।
हर्षवर्धन
November 13th, 2007 at 10:40 am
20पूरी वार्ता की पोस्ट लिख डालें तो, बढ़िया होगा।
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