हिन्दी ब्लोगिंग वर्जीनिया रेडियो पर
सुनिये वर्जीनिया रेडियो पर अनुराग द्वारा आयोजित हिन्दी ब्लोगिंग वार्ता में देबाशीष, ईस्वामी, शुकुल जी और अनुराग के बीच हुई बातचीत। बीच में हम ने भी ट्राई मारा था अपनी टांग अडाने का लेकिन कामयाब नही हो पाये तो जिस दौरान हम स्काईप पर कनेक्टेड थे उतने समय की बातचीत रिकार्ड नही कर पाये, अन्यथा बीच बीच में बजने वाले गानों को छोडकर सभी कुछ रिकार्ड करने की कोशिश की है। तो आपमें से जो नही सुन पाये, यहाँ सुन सकते हैं। (सुनने के लिये प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
आगाज हुआ इसके साथ
फिर बातचीत परवान चढी ऐसे
ऐसे
और ऐसे
अन्त में कुछ यूँ हुआ समापन











This post has 19 comments
January 27th, 2007
तकनीकी कारणों से मैं भी इस बातचीत में शामिल नहीं हो पाया और यह कार्यक्रम सुन भी नहीं पाया। हालाँकि अनुराग, अनूप जी और देबाशीष जी के साथ कार्यक्रम के पहले हमारी बातचीत हुई थी। आपने बातचीत को यहाँ प्रस्तुत करके बहुत अच्छा किया। बहुत-बहुत धन्यवाद। पहली बार ई-स्वामी और अनूप भाई की आवाज सुनने को मिली, जिनके मँजे हुए लेखन के हमलोग कायल रहे हैं। यह चर्चा अच्छी रही। आशा है कि अनुराग इस तरह के आयोजन भविष्य में भी करते रहेंगे।
January 27th, 2007
भाई हम भी इनटरनेशनल हो गये! लेकिन अपनी ही मधुर आवाज हम सुन नहीं पा रहे हैं! इसे जरा बातचीत को पोस्ट करो न! ऐतिहासिक वार्ता है यह भाई!
January 27th, 2007
भई, हम भी तकनीकी,पारिवारिक और व्यक्तिगत वजहों से शामिल नही हो सके, इसके लिए इस शो के मेजबान से व्यक्तिगत रुप से क्षमायाचना कर चुके है। प्रोग्राम बहुत अच्छा रहा।
अनुराग, इसको आफलाइन रिकार्डिंग करने की कोशिश करेंगे। आप सवाल भेज दीजिए (अगले हफ़्ते के) हम जवाब रिकार्ड करके भेज देंगे।
January 28th, 2007
आपने यहाँ कार्यक्रम को रिकार्ड कर रखने का अच्छा कार्य किया है. मैं किसी भी रूप में इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाया था. यहाँ सुन कर अच्छा लगा. खाश कर ई-स्वामी का ‘अंग्रेजी लहजा’ व फुरसतीयाजी का हिन्दी आग्रह.
January 28th, 2007
अनूप, देवाशीष, ईस्वामी, अनुराग, तुम सब की आवाज़ें सुन कर बहुत अच्छा लगा और इस भेंटवार्ता को सब के लिए प्रस्तुत करने का धन्यवाद.
January 28th, 2007
बहुत ही मजा आया पूरी बातचीत सुन कर।
सभी भाग लेने वालों को बधाई तथा तरुन जी को धन्यवाद।
January 28th, 2007
मजेदार बातचीत रही. खासकर (संभवतः) जूनियर देबू की बीच-बीच में आती विस्मय कारी आवाजें…?
और, बातचीत में खासतौर पर मुझे याद करने के लिए धन्यवाद. चाहता तो मैं भी था इस बातचीत में भाग लूं, परंतु मैं ठहरा ऑफ़लाइन जीवी, तो यह संभव नहीं हो पाया.
तरुण को धन्यवाद इस बातचीत को रेकॉर्ड कर यहाँ उपलब्ध कराने के लिए.
January 28th, 2007
अच्छा लगा बातें सुनकर हमतक पहुँचाने का शुक्रिया…।कामना करता हूँ कि हमारी भाषा ऐसे ही लोगों के प्रयास से विश्व खिड़की को खोलती रहे…
January 28th, 2007
वाकई बहुत सार्थक कदम है और अनुराग जी को साधुवाद तथा अनूप भाई, देबु दा और ई-स्वामी जी को बहुत बधाई और धन्यवाद.
आशा है आप इसे एक लेख में परिवर्तित करके भी पेश करेंगे, हालांकि मैं प्रस्तुत रिकार्डिंग को पूर्ण्तः सुन पाया.
January 28th, 2007
तरुन जी को रिकार्डिंग पोस्ट करने का शुक्रिया। आप लोगों को कार्यक्रम अच्छा लगा, इसका भी धन्यवाद। कार्यक्रम के अनुभव मैं जल्दी लिखने की कोशिश करूँगा। भविष्य में क्या किया जा सकता है, ये भी विचार कर के जल्दी ही लिखुँगा।
January 28th, 2007
धन्यवाद!
बोलने से अधिक ध्यान तो इस बात में रहा की ससुरा स्काईप कनेक्शन ही ना टूट जाए!
January 28th, 2007
तरुण जी, धन्यवाद. सबको सुनना अच्छा अनुभव रहा. अनुराग मिश्रा जी,आपको भी बहुत धन्यवाद.
January 29th, 2007
रिकॉर्डिंग पोस्ट करने के लिये तरुण तुम्हें और अनुराग को इस आयोजन के लिये शुक्रिया! बड़ा ही रोचक और नया अनुभव रहा यह, हालांकि अनुराग ने मुझे मन भर बोलने नहीं दिया
ईस्वामी ने सही कहा कि हमें बोलने से ज़्यादा कनेक्शन की चिंता सताती रही, अनूप का संपर्क भी बीच बीच में टपकता रहा।
रवि भैया, जूनियर देबू तो तब तक सो चुके थे तो वो नन्ही आवाज़ किन की थी :), तरुण?
January 29th, 2007
आप सभी लोगों का शुक्रिया करने के लिये शुक्रिया :), और वो आवाज बीच बीच में लिटिल ड्रैगन की ही थी। अपने को पता नही था कि अपना सस्ता सा माइक्रोफोन इतना जबरदस्त है।
March 19th, 2007
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March 19th, 2007
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April 20th, 2007
वाह वाह बहुत ही अच्छा रहा यह आयोजन। ईस्वामी, देबु दा और फुरसतिया जी की आवाज को सुनना मजेदार अनुभव रहा। फुरसतिया जी को तरकश पर भी सुन चुके थे लेकिन स्वामीजी और देबुदा को पहली बार सुना। फैंटम की आवाज बड़ी मधुर थी।
बीच बीच में तकनीकी व्यवधान से मजा खराब होता रहा। तरुण भेजी को यह पॉडकास्ट उपलब्ध करवाने के लिए धन्यवाद अन्यथा हम इसे कहाँ से सुन पाते।
November 13th, 2007
पूरी वार्ता की पोस्ट लिख डालें तो, बढ़िया होगा।
June 5th, 2009
प्रभाव शाली चर्चा रही
बधाइयां
गिरीश बिल्लोरे मुकुल
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