अब तक हम बहुत सारी बातें यूँ हीं जाया कर चुके हैं, लेकिन इस बार हमने सोच ही लिया कि अपने लिटिल ड्रैगन की बातों को अपनी पोस्ट में जगह देनी ही है। आखिर बच्चों की निठल्ली बातें निठल्ला चिंतन में नही होंगी तो कहाँ होंगी।
कुछ महीनों पहिले हमने अपने साहेबजादे को समझाया था कि टूडे से एक दिन बाद को टुमोरो और एक दिन पहले को यस्टरडे कहते हैं, दो चार उदाहरण भी दिये, बच्चा जब समझ गया तो बात आयी गयी हो गयी। लेकिन अभी कुछ दिनों पहले अपने नटखट ने मुझसे पूछा, “पापा वैह्न आइ एम गोइंग टू बी 5 एंड हॉफ ईयर ओल्ड” (पापा, मैं साढे पांच साल का कब होंऊगा)। हमने बडी सहजता से बता दिया कि तुम 29 मार्च को साढे पांच साल के होओगे, ये सुनकर अपना बेटा बोला, “डू यू नो (know), यस्टरडे आफॅ 29th मार्च रिगो इज गोइंग टू बी 5 एंड हॉफ”। हमारे साहेबजादे के कहने का मतलब था कि 29 मार्च से एक दिन पहले उसके क्लास का कोई दोस्त साढे पांच साल का होने वाला है, जिसका जन्मदिन अपने लिटिल ड्रैगन से एक दिन पहले पडता है। ये सुनकर हम अपने बेटे की बात पे मुस्कुराये बिना ना रह सके।
(आजकल थोडा व्यस्त चल रहा है, लेकिन ये बात याद आयी तो तुरंत ही लिख डाली। ऐसी ना जाने कितनी बातें थी कहने को लगभग भूल ही गये अब)
6 Responses
Divyabh
January 17th, 2007 at 2:01 pm
1hi Tarun,
बड़ी सहजता से बातों को लिख देते है…
बचपन की सरलता का बोध इस अनमने
वक्त मे ना हो तो जिंदगी बोझिल हो जाये…
इंतजार होगा व्यंगात्मक वही पुराना…
निट्ठला चिंतन का…धन्यवाद
समीर लाल
January 17th, 2007 at 3:10 pm
2बाल्यमन की सरलता पर कौन न मुस्करा देगा. और भी सुनाईयेगा.
आशीष
January 18th, 2007 at 5:01 am
3तरुण भाई,
बहुत बडी गलती कर चुके है आप
भैये, अब ऐसे ही लिटील ड्रैगन उवाच छापते रहीये !
श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
January 18th, 2007 at 5:29 am
4बहुत प्यारा लिटिल ड्रैगन लगता है।
प्रेमलता
January 18th, 2007 at 10:39 am
5सच्चा हास्य!!! बहुत खूब।
अनुराग
January 18th, 2007 at 1:22 pm
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The greatest discovery of my generation is that a human being can alter his life by altering his attitudes of mind. - William JamesCategories
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