हुआ, ना आश्चर्य!

अगर आप सोच रहे हैं कि कठोर सिंह नोएडा विजिट कर आयें हैं तो आप गलत हैं, ये कोई आश्चर्य की बात नही। सोचियेगा भी मत कि अमर सिंह समाजवादी पार्टी छोड कांग्रेस या बीजेपी ज्वाइन करने का मन बना लिये हैं,  क्या कहा आपने अपनी सरकार मेट्रो लेवल के शहर छोड छोटे छोटे शहरों में विकास कार्य चलाने जा रही है। ऐसे अनुमान लगायेंगे तो यही कहूँगा कि साल के शुरूआती दिनों में काहे मजाक करते हो। अब अगर आप ये कहने जा रहे हैं कि मीडिल ईस्ट के सारे राज्यों में डेमोक्रेसी और शांति हो गयी है तो फिर से गलत, क्या कहा मुस्लिम लीग और बीजेपी इस बार साथ साथ मिलकर चुनाव लडने वाले हैं? क्या हो गया है कैसे कैसे अनुमान लगा रहे हैं आप। अगर आप सोच रहे हैं कि सभी नेताओं ने मिलकर फैसला लिया है कि नये साल से इन लोगों कि आफिशियल ड्रैस बेदाग दिखायी देने वाले सफेद कुर्ता पायजामा कि जगह काले रंग का कुर्ता पायजामा होगा तो एक बार फिर से आप गलत।

थोडा सा और दिमाग का दही कीजिये, थोडा और अनुमान लगाईये कि ये आश्चर्य करने की क्या बात हो सकती है। अच्छा क्या कहा इस बार,  क्या कह रहे हैं कि न्यूज चैनल वालों ने फैसला किया है कि अलग से एक न्यूज प्रोग्राम बनायेंगे जिसमें देश भर के तमाम गड्डों में गिरने वाले बच्चों और लोगों के बारे में बताया जायेगा। आप भी ना (अपना सपना मनी मनी ईस्टायल में), संभव सी दिखने वाली बात कर रहे हो इसमें आश्चर्य जैसा क्या है। सोचिये सोचिये जरा जोर डाल के सोचिये, ये क्या बडबडा रहे हैं, “शाहरूख खान की ताजा खबर” नाम का न्यूज प्रोग्राम शुरू हो रहा है और आप वो तरकश धारी भाई साहेब आप क्या बडबडा रहे हैं, “ब्रेकिंग न्यूज, नेतागण आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी पुलिस की निषक्रियता से परेशान हो इसे बंद कर इनके काम को आउटसोर्स करने की दिशा में भी सोच रहे हैं”। इन्हें देखिये ये ई-पंडित क्या पोथी बांच रहे हैं, “सारे नेता लोग जातिवाद समाप्त करने के लिये संसद के इस सत्र में एक विधेयक ला रहे हैं”।

अब आप लोगों से मुझे कोई उम्मीद नही, अगर आप ये ही कह देते कि देश के सारे मोडलस क्रिक्रेटरस के खेलना छोड मोडलिंग पे ज्यादा ध्यान और वक्त बिताने से क्षुब्ध हो हडताल पे चले गये तो मैं आपको कुछ प्वांइट दे देता। चलो मैं ही बता देता हूँ, अपने लालू जी जो बिहार को जंगल राज तब्दील करने के जिम्मेवार माने जाते हैं अब वो आइ आइ एम के मैनेजमेंट वाले छात्रों को मैनेजमेंट के गुर सीखाने वाले हैं, यही नही ऐसी भी खबर सुनी थी कि अमेरिका के किसी कालेज से भी छात्र लालू से मैनेजमेंट के गुर सीखने आने वाले हैं। सोच में पड गये ना भला ऐसा कैसे करके हुआ, तो ये हुआ यों कि मुद्दतों से घाटे में चलने वाली भारतीय रेल इनके रेलवे मंत्री रहते फायदा देने वाले विभागों में दूसरे नंबर पर आयी है, तेल और गैस विभाग के बाद। यानि के रेलवे को २००५-०६ में १५, ००० करोड (१५० बिलियन रूपये) का फायदा हुआ है। ये सब कैसे करके संभव हो पाया यही वो उन छात्रों को बतायेंगे, हम और आप तब तक अपना सिर्फ सिर ही खुजा सकते हैं। 

और अब कुछ हटकेः तरकश द्वारा आयोजित उदयीमान ब्लोगर २००६, के सभी विजेताओं समीर, उन्मुक्त, शुऐब और सागर को जीतने पर बधाई।

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Tarun

5 Responses to “ हुआ, ना आश्चर्य! ”

  1. हटे वाले भाग के लिये…बहुत बहुत शुक्रिया. बाकी सोच भी उम्दा है. :) :)

  2. क्या लिख गए तरुण भाई, समझ नहीं आया, अपने ऊपर से तो बाऊँसर की तरह निकल गई यह पोस्ट!! समय मिलने पर दोबारा पढ़ समझने का प्रयास करूँगा। :)

  3. शीघ्र ही अबू सालेम भी किसी नामी गिरामी शिक्षण प्रतिष्ठान में अध्यापन करते देखाई दे सकते हैं. वैसे सच कहूं तो आश्चर्य बिलकुल नहीं हुआ - Impossible is nothing!

  4. किस्मत मेहरबान तो ‘गधा’ पहलवान। और क्या। :)

  5. Mujhe to yah ek vyang laga lekin problem of this essay is that ki kafi chote me bahut saare information laa diye is kaaran ese repeat karna pad raha hai.lekin nithala chintan ko aapne sahi swarup diya hai.

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