04 Jan
Posted as राजनीति
Tags:राजनीति, Nithari, Noida, politics, saddam, UP, uttar pradeshअभी अभी ये खबर पढी, वैसे कठोर सिंह से ज्यादा उम्मीद तो ना कभी थी ना कभी होगी लेकिन गद्दी के लिये कोई यहाँ तक जा सकता है पता ना था। नोएडा विजिट करने वाला कोई भी मुख्यमंत्री दुबारा मुख्यमंत्री नही बना आंकडे यही कहते हैं इसलिये कठोर सिंह ने नोएडा से किनारा करना ही उचित समझा, बावजूद इसके कि १७ मासूमों के नरकंकाल वहीं से बरामद हुए हैं। बगैर एकांउट नंबर लिखे चैक बांटने से अच्छा होता एक बार उन गरीबों के दर्द में शामिल होने के लिये जनाब अपना काफिला उस निठारी गांव में ले जाते। दिल्ली से नोएडा सिर्फ २० किमी ही होगा शायद इससे कम ही होगा। दूसरे मिट्टी के शेर का कठोर सिंह की सफाई में कहना था कि कठोर सिंह के छोटे भाई पी डब्लयू डी वाले मंत्री तो निठारी हो आये हैं और क्या चाहिये। गोया कल मुख्यमंत्री की फोटो भेज देंगे और कहेंगे फोटो ने तो विजिट कर लिया और क्या।
आप लोग सोच रहे होंगे कि कठोर सिंह जी दिल्ली में क्या कर रहे थे? ये जनाब सद्दाम को फांसी दिये जाने के विरोध में होने वाले धरना या रैली में हिस्सा लेने आये थे। सद्दाम को ईराकियों ने फांसी दिलायी और दी, इसमें किसी भी भारतीय या भारत का ना लेना एक ना देना एक। लेकिन दर्द इन कठोर सिंह की पार्टी के लोगों को कैसे हुआ खुदा गवाह, ऊपर के हिस्से से बिल्कुल खाली कुछ लोगों ने तो सद्दाम की फांसी के विरोध में एक टूरिस्ट बस में पथराव कर कई लोगों को घायल भी कर दिया।
अब ये बेचारे क्या करें इन कठोर सिंह का इतिहास भी कुछ ऐसा ही है, उत्तरांचल के लिये प्रदर्शन कर रहे निरीह निहत्थे पहाडी लोगों पे लाठी चार्ज करवाना तो सिर्फ एक उदाहरण है ऐसे दर्जनों उदाहरण ढूँढने से मिल जायेंगे। दुनिया में कहीं से भी सद्दाम की फांसी के विरोध में किसी राजनीतिक पार्टी का विरोध अभी तक तो मैने नही सुना, यहाँ तक कि पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम राज्य भी इस घटना में इतना नही बोले जितनी हुक इस समाजवादी पार्टी को उठ रही है। क्या ये करने से शियाईयों के वोट इस पार्टी को पक्के मिलेंगे? अब ये तो वक्त बतायेगा लेकिन जैसी राजनीति आजकल निठारी जैसी घटनाओं पे की जाती है उससे इतना तो पक्का है कि उत्तरप्रदेश के उल्टाप्रदेश बनने के कुछ ही दिन बचे हैं।
और अब ये कठोर सिंह के भाई की गल सुनो, इन निठारी के नरकंकाल की घटना पर इन साहेब का कहना है,
ये तो एक छोटी और रोज की घटना है, ऐसी घटना घटती रहती हैं, इस बार तिल का ताड बन गया।
कुछ हटकेः इस पोस्ट को लिखते लिखते न्यूज में देखा कि बिहार के मुख्यमंत्री रात को अनिल कपूर ईस्टायल में (याद है वो मूवी जिसमें अनिल कपूर एक दिन के मुख्यमंत्री बने थे, शायद नायक नाम था मूवी का) इधर उधर का दौरा कर रहे थे, लेकिन समझ नही आया इसका पता पहले से ही मीडिया को कैसे लग गया जो साथ साथ इसकी रिकार्डिंग भी करता जा रहा था। या पब्लिक को बेवकूफ बनाने का एक शगूफा था। खैर जो भी हम कुछ नही बोलेंगे।
12 Responses
समीर लाल
January 4th, 2007 at 8:43 pm
1कई बार “हम कुछ नही बोलेंगे। ” मे ही भलाई रहती है. मैने तो यही महसूस किया है.
अनुराग मिश्र
January 4th, 2007 at 10:47 pm
2उत्तर प्रदेश से अब कोई उम्मीद नहीं रह गई है। समाजवादी पार्टी का विनाश काले विपरीत बुद्धि वाला हिसाब है, मगर एक समझदार विकल्प तक नहीं है।
संजय बेंगाणी
January 4th, 2007 at 10:52 pm
3आप इसी प्रकार ‘मत बोलते’ रहा करें.
अच्छा व्यंग्य किया है. गरीबों के मसीहा बने समाजवादीयों को बच्चो की निर्मम हत्या से कोई तकलिफ नहीं पर दुसरे देश ने एक तानाशाह को फाँसी दे दी उसमें इनकी तड़प देखते ही बनती है, इनके छत्रछाया में पलने वाले समर्थको का तो कहना ही क्या, पर्यटको के सर ऐसे फोड़े जैसे इन्होने ही इनके प्रिय को फाँसी दी हो.
ratna
January 5th, 2007 at 12:03 am
4सही कह रहे है,उत्तर प्रदेश को उल्टा प्रदेश बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है इन नेतायों ने।
Amit
January 5th, 2007 at 12:24 am
5अरे भईया ऐसा ही होता है, अपने बच्चों की चिंता नहीं और पड़ोसी के बछड़े के दर्द से तड़प रहे हैं, ई ही मंत्री की पहचान है!!
आशीष
January 5th, 2007 at 12:54 am
6उत्तर प्रदेश क्या सारे उत्तर भारत के हाल बुरे कर रखें है इन नेताओ ने। मै उत्तर भारत और दक्षीण भारत दोनो जगह रहा हूं।
विकास की बात देखी जाये मूल जरूरते है बिजली , सडक और पानी… सारे उत्तर भारत मे (उ प्र, म प्र, बिहार, राजस्थान) तिनो मे बुरे हाल है, वहीं दक्षिण मे इन तिनो की समस्या इतनी बडी नही है।
ऐसा नही कि दक्षिण मे राजनिती नही होती, यहां तो जयललिता और करुणानिधी स्टाईल की राजनिती हावी है जिसमे एक दूसरे की धोती, साडी तक खिंच दी जाती है लेकिन विकास कार्य भी होते है।
यहां कि जनता ज्यादा जागरूक है किसी को भी कभी भी पटखनी देने मे कोई कसर नही छोडते चाहे करुणानिधी हो, जयललिता हो, चंद्राबाबू हो, एंटनी हो … लोगो को कार्य से मतलब है।
भ्रष्टाचार भी है यहां पर, यदि पुल का निर्माण हो, कमीशन जरूर खाया जायेगा लेकिन पुल कागजो पर नही , वास्त्विक रूप से बनेगा।
लालफिताशाही है लेकिन ज्यादा नही, इसलिये हर उद्योगपति यहां आना चाहता है। चेन्नई आजकल भारत मे कार निर्माताओ के लिये केंद्र बन गया है।
समुचा दक्षिण भारत सुचना प्रोद्योगिकि का केन्द्र बन गया है। बंगलोर, हैद्राबाद , चेन्नई के बाद कोचीन, त्रिवेन्द्रम , कोयंब्टूर जैसे शहरो मे सुचना प्रोद्योगिकि की कंपनीया अपने केन्द्र खोल रही है !
उत्तर भारत मे गुडगांव , नोयडा, मोहाली के अलावा कोई और नाम नही है।
लिखने के लिये बहुत है, कभी अपने चिठ्ठे पर फुरसत से भडास निकालुंगा !
श्रीश । ई-पंडित
January 5th, 2007 at 6:10 am
7हाँ जी खूब याद है यही कठोर सिंह बाअदब थे जिनके इशारे पर आँदोलनकारी महिलाओं से दुर्व्यवहार हुआ। इन्हीं के इशारे पर यशोधर बेंजवाल, राजेश रावत और एक अन्य युवक को शहीद किया गया। अब इराक में सद्दाम को फांसी दी जाती है तो इन्हें दर्द होता है।
श्रीश । ई-पंडित
January 5th, 2007 at 8:26 am
8हाँ जी खूब याद है यही कठोर सिंह बाअदब थे जिनके इशारे पर आँदोलनकारी महिलाओं से दुर्व्यवहार हुआ। इन्हीं के इशारे पर यशोधर बेंजवाल, राजेश रावत और एक अन्य युवक को शहीद किया गया। अब इराक में सद्दाम को फांसी दी जा रही है तो इनके पेट में दर्द हो रहा है।
निठल्ला चिन्तन » हुआ, ना आश्चर्य!
January 7th, 2007 at 7:22 pm
9[...] « वाह! इनका क्या कहना [...]
Global Voices Online » Blog Archive » The Hindi Blogosphere: Nithari and the New Year
January 8th, 2007 at 6:32 am
10[...] With just about every person in Nithari village of Noida & news media in an uproar on the issue of missing children and the subsequent discovery of their skeletons, Hindi Blogosphere isn’t far behind in expressing their reactions. Tarun was criticising the Uttar Pradesh chief minister Mulayam Singh for not even bothering to visit Nithari to atleast console the grieving parents whose kids were abducted, sexually molested and then killed brutally and whose remains where recently found months after they disappeared. Chandra Prakash is also upset on this issue and saying that Nithari is one of those faces of the corrupt Indian system to hide which efforts are being made by those who can make such efforts. He also says that the day we understand these things will be the day when we will be able to recognise these diseases and think of ways to eradicate them. [...]
全球之声-全球博客内容中文翻译版 » Blog Archive » 北印度语部落格圈: 失踪儿童的遗骨与新年
January 14th, 2007 at 12:11 am
11[...] 在NOIDA工业区的Nithari村里,当地所有居民和新闻媒体,都因为失踪儿童的议题及之后发现这些儿童的遗骨而陷入一片骚动,这时北印度语部落圈当然也不忘表示他们的意见。Tarun批评北方邦的首长Mulayam Singh甚至没有到访Nithari,慰问那些哀伤的父母,他们的孩子被绑架、性骚扰,而后被残忍地杀害,他们的尸骸在失踪后数月才被发现。Chandra Prakash也因此感到惆怅,并表示,Nithari象徵着腐败的印度制度亟欲隐藏的一张脸,尽管藏也藏不住。他也说,当我们瞭解这些事实,我们才能找出这些弊病,并加以根除。 [...]
全球之聲 » Blog Archive » 北印度語部落格圈: 失蹤兒童的遺骨與新年
January 14th, 2007 at 4:09 am
12[...] 在NOIDA工業區的Nithari村裡,當地所有居民和新聞媒體,都因為失蹤兒童的議題及之後發現這些兒童的遺骨而陷入一片騷動,這時北印度語部落圈當然也不忘表示他們的意見。Tarun批評北方邦的首長Mulayam Singh甚至沒有到訪Nithari,慰問那些哀傷的父母,他們的孩子被綁架、性騷擾,而後被殘忍地殺害,他們的屍骸在失蹤後數月才被發現。Chandra Prakash也因此感到惆悵,並表示,Nithari象徵著腐敗的印度制度亟欲隱藏的一張臉,儘管藏也藏不住。他也說,當我們瞭解這些事實,我們才能找出這些弊病,並加以根除。 [...]
RSS feed for comments on this post · TrackBack URI
Leave a reply
अनमोल वचन Quotes
Any man who is under 30, and is not a liberal, has not heart; and any man who is over 30, and is not a conservative, has no brains - Sir Winston ChurchillCategories
Archives
Meta
Subscribe
कंट्रोल पैनल
Recent Entries
Recent Comments
Most Commented
निठल्ला चिन्तन is proudly powered by WordPress - BloggingPro theme by: Design Disease