जी टी वी न्यूज: एकदम बकवास
जब बरदास्त से बाहर हो गया तो सोचा चलो आज इस बारे में लिख ही लिया जाय। अमेरिका में जी टी वी ३ बार ३० मिनट के न्यूज प्रोग्राम देता है, सुबह ८ बजे का तो पता नही लेकिन शाम ६:३० बजे और रात के १०:३० बजे की खबर देख के खबर बचकानी ही लगती है। आगे कुछ कहने से पहले कल जनवरी १, २००७ १०:३० बजे रात की खबर का मुलहायजा फरमाईये - पहले के १३ मिनट किसी बच्चे के गड्डे में गिरने की खबर (एक ही बात ६-७ बार बतायी गयी), फिर १-२ मिनट के विज्ञापन, फिर ६ मिनट देहली के कोहरे की खबर, उसके बाद २ मिनट के लिये राजस्थान में पड़ने वाली ठंड की खबर, फिर विज्ञापन और अंत में ५ मिनट की क्रिकेट की खबर। अब आप ही बताईये दिनभर की ३० मिनट की क्या कुछ ऐसी ही खबर होनी चाहिये। अक्सर इसी तरह से खबर दी जाती है, खबर चाहे कैसी हो लेकिन मिनटों का हिसाब ऐसा ही होता है।
शायद जी वालों को २४x७ के न्यूज चैनल और ३० मिनट की न्यूज का फर्क नही मालूम, कई बार तो आप बैठे ही रह जाओगे लेकिन जिस खबर के लिये शुरू में बोला होता है अंत तक आती ही नही। कभी न्यूज कब खत्म हो जाती है पता ही नही चलता, और कभी तो जी में आने वाले सीरियल की ही खबर देने लग जाते हैं। बाकी कुछ और लिखने से बेहतर है १-२ पोस्ट पढ़के उन पर ही कुछ टिप्पणी कर ली जाय। आप एक बार जी टी वी, अमेरिका की खबर देख सुन लीजिये खुद ही जान जायेंगे।


hi Tarun, Good to see ur Thoda Masti Thoda Chintan
Blog good comment on the recently fast growing Tv News Channals.
किस-किस से शिकायत करूं
किस-किस से रखूं गिला
जब हर साख उल्लू बैठा हो
अंजाम-ए-गुलिस्ता क्या होगा
सही कहा आपने, ऐसे बुलेटिन देखने से बेहतर ब्लॉग पढ़ना और टिप्पणियां करना ही भला जान पड़ता है.
शशि सिंह जी बिल्कुल सही कह रहे हैं कि
” हर शाख पर उल्लू बैठा है
अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा”
लगभग सारे न्यूज चैनलों का यही हाल है, अरे इंडिया टीवी की मुख्य खबरों में तो होता है राखी सावंत के प्यार का इकरार और बिग बॉस में उसके जाने वाले नाटक यानि रोना रुलाना।
बाकी कुछ और लिखने से बेहतर है १-२ पोस्ट पढ़के उन पर ही कुछ टिप्पणी कर ली जाय। …..अरे, वाह, आइये न!! इंतजार लगवा दिया आपने तो.सहूलियत के लिये लिंक भी हाजिर है
http://www.udantashtari.blogspot.com/
वैसे अमरीकी जी टीवी के हम भी भुक्तभोगी हैं.
क्षमा कीजियेगा. आपको वक्त बरबाद करने का कोई दूसरा उपाय ढूँढ़ना था वजाय ज़ी न्यूज या टीवी एशिया न्यूज के.
एकदम सही फरमाया जी। इसीलिए अपुन ने तो इन वाहियात सीरियलों और न्यूज चैनलों से तंग आकर टीवी देखना ही छोड़ दिया। अखबार पढ़ने में कम से कम ये तो है कि अपनी मर्जी की खबर पढ़ो।
I have suffered from the same pain for long time. Frustrated I gave up watching Indian Channels in US. Watching IBNLIVE online is better, though it is also not great always but still better than Zee News
Its painful to watch. When my wife leaves it on, it gives me headaches.
शायद ये कहानी दूसरे हिन्दी समाचार चैनलों पर भी लागु है।मैं छह वर्षों से चेन्नई में रहता आ रहा हूँ।इनको नागपुर के नीचे का भारत शायद दिखलाई भी नहीं पड़ता।उत्तर पूर्व तो जैसे है ही नहीं। इनको देखकर लगता है कि देश विदेश की नहीं बल्कि दिल्ली और आसपास का प्रादेशिक समाचार देख रहें है।हम हार कर आकाशवाणी के समाचार सुनने लगें है, कम से कम वो पूरे भारत को कवर करते हैं। और जैसे विज्ञान से जुड़े समाचार तो शायद इन चैनलों को शायद समझ भी नहीं आते। पर कोई तिल का ताड़ बना कर हल्ला बेजोड़ मचाते हैं।
अरे भाई, कभी किसी ज़माने में मैं भी अख़बार पढ़ता था और समाचार चैनल देखता था, फ़िर सब छोड़ दिया, काहे टैम खोटी करें!! समाचारपत्रों और चैनलों में बकवास ही आती है, सब के सब पेज-३ किस्म के बनते जा रहे हैं। इससे बढ़िया मुझे लगता है कि इंटरनेट पर समाचार की वेबसाइट खोलो और वहाँ समाचार पढ़ लो, चैनलों और समाचारपत्रों से बहुत तेज़ हैं वेबसाइटें, नई ताज़ा खबरें पढ़ने को मिलती हैं।