चुनाव का दौर
कृपया इस पोस्ट को अन्यथा ना लें आप चाहें तो सीरियसली ले सकते हैं लेकिन अन्यथा तो कतई नही
अरे ये देश के चुनाव की बात नही हो रही बल्कि उस चुनाव की बात हो रही जिसके लिये कुछ नौसिखिये (चुनाव लडने की शर्त ही ये ही है ;), २००६ से लिखना शुरू किया हो) धडाधड अपना घोषणा पत्र लिखे जा रहे हैं। अब चुनाव हो रहे हों और उम्मीदवारों की शान में कसीदे ना पडे जायें कैसे हो सकता है। अब चूंकि सारे उम्मीदवार असली नेताओं से प्रभावित लगते हैं उसी ईस्टायल में घोषणा पत्र लिख रहे हैं तो हमने सोचा कि क्यों ना हम भी वो ही चार लाईन यहाँ चेप दें जो कभी असली चुनावों के लिये लिखी थी।
चुनाव का दौर है, देखो चारों ओर
सफेद कपडे पहन के घूम रहे हैं चोर।
घूम रहे हैं चोर, मचा रहे हैं हल्ला गुल्ला
इनके कस्मे वादों से गूँज रहा है गली मोहल्ला।
खैर ये नादान लोग नही जानते चुनाव भले ही यें लोग जीत जायें प्रधानमंत्री तो वो ही बनेगा जिसके बाल सफेद हों, कमर झूकी हो, चालढाल धीमी हो मतलब अगर कम शब्द में कहूँ तो पैर कब्र में लटके हों यानि कि वो जो २००६ से पहले से ब्लागिंग कर रहे हैं। अब क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के लिये कोई चुनाव जीतने की जरूरत नही होती है वो आप बाद में भी लड सकते हैं।
वैसे हमने अपना उत्तरांचल ब्लोग भी २००६ से ही शुरू किया था लेकिन हमें पता है हम में नेताओं वाले गुण हैं नही इसलिये अपनी जमानत जब्त हो जानी है। इसके भी ज्यादा चांसेज हैं कि चुनाव आयोग अपना घोषणा पत्र ही रद्द कर दे इस बात पे कि आप तो भैये पहले से ब्लोगिंग कर रहे हैं। फिलहाल चुनाव लडने वाले सभी उम्मीदवारों को अपनी शुभकामनायें और हम आशा करता हूँ कि देश के चुनावों की तरह इसमें भी वो ही सस्पेंस और रोमांच बना रहेगा।
Send to Twitter and Follow me on Twitter










This post has 4 comments
December 23rd, 2006
चोरो के बीच साहूकार का नामांकन भी होना चाहिए. अन्यथा न लेते हुए नामांकन भरे.
December 24th, 2006
हे-हे जरुर भरो जी नामांकन। “राजनीति के इस हमाम में प्यारे भाई सब नंगे हैं”
December 24th, 2006
हमाम मे सब नंगे ? मतलब ख़ुदा भी

December 24th, 2006
ढ़ेरों शुभकामनायें. आपने तो हमारे मन का काम कर दिया. दिली इच्छा है कि आप ही जीतें और इस बात को अन्यथा न लें.
:)(अर्थात मै तो मजाक कर रहा था वाला अर्थ न लगाया जाये)
Add a comment