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	<title>Comments on: तेरे नाम</title>
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	<description>निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥</description>
	<pubDate>Fri, 08 Aug 2008 19:20:29 +0000</pubDate>
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		<title>By: Pratik Pandey</title>
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		<dc:creator>Pratik Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Dec 2006 15:45:23 +0000</pubDate>
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		<description>वाक़ई यह बहुत दु:खद है कि मज़हब के नाम पर राजनेता अपनी रोटियाँ सेंकते हैं। आज के राजनेता भी अंग्रेज़ों की 'फूट डालो, राज़ करो' की नीति पर चल रहे हैं और यह विभाजनकारी नीति निश्चय ही घातक है। हिन्दू-मुसलमान में फूट डाली जा रही है, सवर्ण-दलित में फूट डाली जा रही है, क्षेत्रवाद के नाम पर उत्तर-दक्षिण में फूट डाली जा रही है। इन राजनेताओं ने भारत की आत्मा को खण्डित करने का कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ा है। इस विषय पर आपका लिखना इस बात को इंगित करता है कि राष्ट्र अब जागृत हो रहा है और शीघ्र ही इन विभेदकारी नीतियों और इनके नियन्ताओं के ख़ात्मे के लिए सन्नद्ध हो चुका है। और यह जितना जल्दी हो सके, उतना ही राष्ट्र के हित में है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाक़ई यह बहुत दु:खद है कि मज़हब के नाम पर राजनेता अपनी रोटियाँ सेंकते हैं। आज के राजनेता भी अंग्रेज़ों की &#8216;फूट डालो, राज़ करो&#8217; की नीति पर चल रहे हैं और यह विभाजनकारी नीति निश्चय ही घातक है। हिन्दू-मुसलमान में फूट डाली जा रही है, सवर्ण-दलित में फूट डाली जा रही है, क्षेत्रवाद के नाम पर उत्तर-दक्षिण में फूट डाली जा रही है। इन राजनेताओं ने भारत की आत्मा को खण्डित करने का कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ा है। इस विषय पर आपका लिखना इस बात को इंगित करता है कि राष्ट्र अब जागृत हो रहा है और शीघ्र ही इन विभेदकारी नीतियों और इनके नियन्ताओं के ख़ात्मे के लिए सन्नद्ध हो चुका है। और यह जितना जल्दी हो सके, उतना ही राष्ट्र के हित में है।</p>
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		<title>By: Pankaj बेंगाणी</title>
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		<dc:creator>Pankaj बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Dec 2006 06:29:30 +0000</pubDate>
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		<description>आप पाप कर रहे हैं। देश को बाँटने का काम कर रहे हैं। यह ठीक नही है।

ऐसी बाते करना अपराध है। अभी भी वक्त है... झोला लटकाकर झंडे उठाकर हाय हाय करने चले चलो। देश को बाँट लो... और बहुसंख्यकों की ऐसी तैसी कर दो।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप पाप कर रहे हैं। देश को बाँटने का काम कर रहे हैं। यह ठीक नही है।</p>
<p>ऐसी बाते करना अपराध है। अभी भी वक्त है&#8230; झोला लटकाकर झंडे उठाकर हाय हाय करने चले चलो। देश को बाँट लो&#8230; और बहुसंख्यकों की ऐसी तैसी कर दो।</p>
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		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
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		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Dec 2006 03:53:44 +0000</pubDate>
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		<description>यही बात अगर हिन्दूओं के लिए कही जाती तो बवाल खड़ा हो जाता. हम किस ओर जा रहें है? आज जरूरत है हर क्षेत्र को धर्म से मुक्त करवाने की और हम इसी पर राजनीति कर रहें हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यही बात अगर हिन्दूओं के लिए कही जाती तो बवाल खड़ा हो जाता. हम किस ओर जा रहें है? आज जरूरत है हर क्षेत्र को धर्म से मुक्त करवाने की और हम इसी पर राजनीति कर रहें हैं.</p>
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		<title>By: Nitin Vyas</title>
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		<dc:creator>Nitin Vyas</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Dec 2006 00:05:29 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत बढिया!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत बढिया!!</p>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/12/13/%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae/#comment-421</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Dec 2006 21:10:23 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;b&gt;नेतागिरी एक ऐसी सेंटर आफॅ ग्रेविटी है जो देश के सारे संसाधनों को अपनी ओर खिंचती है और फिर किसी जोंक की तरह चुसती जाती है।&lt;/b&gt; 

--बहुत सही. आपके लेख से पूर्णतः सहमत हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>नेतागिरी एक ऐसी सेंटर आफॅ ग्रेविटी है जो देश के सारे संसाधनों को अपनी ओर खिंचती है और फिर किसी जोंक की तरह चुसती जाती है।</b> </p>
<p>&#8211;बहुत सही. आपके लेख से पूर्णतः सहमत हैं.</p>
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