मुकेश का गाया हुआ एक गीत जो बहुत पहले सुना था लगता है इस पोस्ट के लिये फिट बैठता है, वो गीत था “कि हम तुम चोरी से बंधे एक डोरी से, जइयो कहाँ ऐ हुजुर”। अब आधी पोस्ट के बारे में तो आप लोगों को वैसे ही पता चल गया होगा जो रह गया […]
14 Sep
Posted by Tarun as क्रिकेट
Tags:आस्ट्रेलिया, क्रिकेट, डकवर्थ लेविस, भारत, वेस्ट इंडीजमलेशिया में डी एल एफ क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहे हैं, पहला मैच वेस्ट इंडीज हारा तो दूसरा जीत गया। इसी बात ने मजबूर किया कि कुछ क्रिकेट क्रिकेट खेला जाय। कहते हैं कि क्रिकेट अनिश्चिता का खेल है यानि कि जब तक अंतिम गेंद ना डाली जाय (कुछ कहते हैं अंतिम ओवर) कुछ कह नही […]
07 Sep
Posted by Tarun as बस यूँ ही
Tags:जिल ग्रीनबर्ग, फोटो, बच्चे, बच्चों, बस यूँ ही, लालीपॉपआप सोच रहे होंगे मैने कहीं गलत तो नही लिख दिया इसलिये पहले ही बता दूँ बिल्कुल सही लिखा है बात हंसते हुए बच्चे को रूलाने की ही है। ये सब किया जा रहा है जबरदस्त फोटो खिंचने के लिये और ये सब किया है जिल ग्रीनबर्ग नाम की मोहतरमा ने। ये करती क्या हैं कि […]
01 Sep
Posted by Tarun as फिल्म, फिल्म समीक्षा
Tags:फिल्म, फिल्म समीक्षा, रिव्यू, लगे रहो मुन्नाभाईबंदे में था दम - वंदे मातरम्, अब ये बंदा कौन है ये जानने के लिये तो आपको मुन्नाभाई से मिलने जाना पडेगा क्योंकि मैं तो आपको बताने से रहा। ३ साल बाद एक बार फिर मुन्नाभाई अपने जिगरी सर्किट के साथ आपका मनोरंजन करने आ पहुँचे हैं। लगे रहो मुन्नाभाई एक बहुत ही मस्त […]