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रिश्ता तेरा मेराः कोई शक!

मुकेश का गाया हुआ एक गीत जो बहुत पहले सुना था लगता है इस पोस्ट के लिये फिट बैठता है, वो गीत था “कि हम तुम चोरी से बंधे एक डोरी से, जइयो कहाँ ऐ हुजुर”। अब आधी पोस्ट के बारे में तो आप लोगों को वैसे ही पता चल गया होगा जो रह गया [...]

[ More ] September 27th, 2006 | Comments Off | Posted in खालीपीली, बस यूँ ही |

क्रिकेट और बारिश का खेल

मलेशिया में डी एल एफ क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहे हैं, पहला मैच वेस्ट इंडीज हारा तो दूसरा जीत गया। इसी बात ने मजबूर किया कि कुछ क्रिकेट क्रिकेट खेला जाय। कहते हैं कि क्रिकेट अनिश्चिता का खेल है यानि कि जब तक अंतिम गेंद ना डाली जाय (कुछ कहते हैं अंतिम ओवर) कुछ कह नही [...]

[ More ] September 14th, 2006 | 1 Comment | Posted in क्रिकेट |

किसी हँसते हुए बच्चे को रूलाया जाय

आप सोच रहे होंगे मैने कहीं गलत तो नही लिख दिया इसलिये पहले ही बता दूँ बिल्कुल सही लिखा है बात हंसते हुए बच्चे को रूलाने की ही है। ये सब किया जा रहा है जबरदस्त फोटो खिंचने के लिये और ये सब किया है जिल ग्रीनबर्ग नाम की मोहतरमा ने। ये करती क्या हैं [...]

[ More ] September 7th, 2006 | 5 Comments | Posted in बस यूँ ही |

लगे रहो मुन्नाभाईः एकदम मस्त

बंदे में था दम – वंदे मातरम्, अब ये बंदा कौन है ये जानने के लिये तो आपको मुन्नाभाई से मिलने जाना पड‌ेगा क्योंकि मैं तो आपको बताने से रहा। ३ साल बाद एक बार फिर मुन्नाभाई अपने जिगरी सर्किट के साथ आपका मनोरंजन करने आ पहुँचे हैं। लगे रहो मुन्नाभाई एक बहुत ही मस्त [...]