अभी अभी देखा कि एक बार फिर संसद में नेताओं के बीच हाथापाई होते होते रही तो सोचा क्यों ना लगे हाथ इन्हें एक सलाह दे डालें। सलाह ये है कि क्यों ना साल के एक दिन संसद को अखाड‌े में तब्दील कर दिया जाय, अन्दर से नही संसद के बाहर। और उस दिन इन नेताओं को खुल्ला छोड़ दिया जाय कि भैय्या जितनी जोर आजमाईश करनी है कर लो, हाथ लात सब माफ। जी भरके लड‌ो, दिल खोल के एक दूसरे को गाली दो लेकिन उसके बाद संसद के अन्दर तमीज से पेश आओ, उसकी गरिमा बना के रखो। जो ना संभले उसे बगैर सुरक्षा के जम्मू काश्मीर तबादले में भेज दिया जाय (वैसे ही जैसे ये लोग सत्ता में आते ही आई पी एस वालों को भेजते हैं) या फिर ईराक, अफगानिस्तान या पाकिस्तान का राजदूत बनाकर भेज दिया जाय, हाँ भाई हाँ ये भी कोई कहने की बात है कि बगैर सुरक्षा के। आप लोगों का क्या विचार है अवगत कराने से भूलियेगा नही।

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