अभी अभी देखा कि एक बार फिर संसद में नेताओं के बीच हाथापाई होते होते रही तो सोचा क्यों ना लगे हाथ इन्हें एक सलाह दे डालें। सलाह ये है कि क्यों ना साल के एक दिन संसद को अखाडे में तब्दील कर दिया जाय, अन्दर से नही संसद के बाहर। और उस दिन इन नेताओं को खुल्ला छोड़ दिया जाय कि भैय्या जितनी जोर आजमाईश करनी है कर लो, हाथ लात सब माफ। जी भरके लडो, दिल खोल के एक दूसरे को गाली दो लेकिन उसके बाद संसद के अन्दर तमीज से पेश आओ, उसकी गरिमा बना के रखो। जो ना संभले उसे बगैर सुरक्षा के जम्मू काश्मीर तबादले में भेज दिया जाय (वैसे ही जैसे ये लोग सत्ता में आते ही आई पी एस वालों को भेजते हैं) या फिर ईराक, अफगानिस्तान या पाकिस्तान का राजदूत बनाकर भेज दिया जाय, हाँ भाई हाँ ये भी कोई कहने की बात है कि बगैर सुरक्षा के। आप लोगों का क्या विचार है अवगत कराने से भूलियेगा नही।
5 Responses
समीर लाल
August 24th, 2006 at 8:02 pm
1तरुण
जम्मू के हालात तो यूँ ही बहुत खराब हैं, इनको भेजोगे, तो क्या होगा, सोच के परे है.
Tarun
August 24th, 2006 at 9:49 pm
2समीरजी जब बगैर सुरक्षा के भेजेंगे यकीन मानिये इनका सारा समय अपनी जान बचाने की जुगत में ही जायेगा इसलिये कुछ गडबड नही कर पायेंगे। बच गये तो अगली बार फिर पंगा नही करेंगे और अगर नही ब……
प्रियंकर
August 25th, 2006 at 2:02 am
3प्रस्ताव का समर्थन है . शुभस्य शीघ्रम .
SHUAIB
August 25th, 2006 at 6:20 am
4जब सारे गुन्डे एक जगाह जमा होजाएं तो ऐसा ही होता है - और इन गुन्डों को वोट देने वाले तो हम ही हैं ना - लो अब हम ही को भुगतना है
cuckoo
August 26th, 2006 at 11:15 am
5aapka sujhav acha hai. Kripya amal kiya jaye.
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