दुनिया में युद्ध का सबसे ऊँचा मैदान, खतरनाक पहाडियाँ,
एक मुश्किल सा नजर आने वाला काम। भारतीय फौज के जवानों के हौसले बुलंद थे और इरादे मजबूत उन्होंने आतंकियों और उन के भेष में छुपे पाकिस्तानी सैनिकों को भेड़ बकरियों की तरह देश की सीमा से बाहर खदेड़ दिया। इस बात को अब ७ साल बीत चुके हैं, ७ साल अपने गौरव को वापस मिले हुए। तब से जुलाई की २६ तारीख को कारगिल शहीदों की याद में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कारगिल ने देश को बहुत जाबांज सिपाही दिये उनमें से कैप्टन अनुज नैय्यर, कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे का नाम तो हर घर में सुनायी देता है।
भारतीय सेना के ६०० जवान इस युद्ध में शहीद हुए, ६०० परिवारों को बच्चों, पिता और पति के साये से महरूम होना पड़ा लेकिन देश को उसका गौरव उसकी इज्जत वापस मिल गयी।
हे कारगिल के शहीदों! कोई भी डिक्शनरी तुम्हारी शहादत को बयान नही कर सकती, मैं तुम्हे सलाम करता हूँ, ये देश तुम्हें सलाम करता है।
2 Responses
आशीष
July 26th, 2006 at 10:13 pm
1मातृभूमी की रक्षा करते हुये शहीद हुये हर वीर को मेरा नमन
जय हिन्द
SHUAIB
July 27th, 2006 at 1:07 am
2भारत कि लिए शहीद हुए महान लोगों को मेरा सलाम
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