17 Jul
Posted as जरा हट के, बस यूँ ही
Tags:जरा हट के, बस यूँ ही, आतंकवाद, ईजरायल, भारत, युद्व, हिजबुल्लाहये कोई पहेली नही जिसे बूझने का ईनाम हो - सिक्का है आतंकवाद, दो पहलू हैं शांति वार्ता और युद्व। सिक्का उछाला गया अब किस को क्या मिला ये कोई मुकद्दर की बात नही। ईजरायल के दो सिपाहियों को हिजबुल्लाह के लोगों ने बंदी बना लिया, ईजरायल ने किसी को ये कहने का भी मौका नही दिया कि इस समस्या को बातचीत से हल किया जाय। अब कहानी ये है कि ईजरायल-हिजबुल्लाह को नेस्तनाबुद करने के लिये एक तरफ लड़ रहा हैं, अमेरिका, ब्रिटेन-अल कायदा नेटवर्क को तबाह करने के लिये दूसरी तरफ। भारत बीच में शांति बनाये रख के लश्करे-तायबा को मदद ना देने की पाकिस्तान से गुहार लगा रहा है। सबको समझना होगा कि अगर आतंकवाद से बिना शर्त निपटना है तो एक ही जुबान बोलनी होगी।
4 Responses
संजय बेंगाणी
July 17th, 2006 at 11:50 pm
1क्या भारत इस के लिए तैयार हैं?
याद करे परमाणु परिक्षण पर खुश हुए लोग ही प्रतिबन्धो से घबरा कर इसे अनावश्यक करार दे रहे थे. भारती युद्धखोरी के लिए तैयार हैं?
खुन्दक
July 18th, 2006 at 1:18 am
2हां, एक ही जुबान बोलनी पड़ेगी। प्रश्न है वह किसकी जुबान होगी?
anunad
July 18th, 2006 at 5:17 am
3युद्ध केवल तोपों या बम से ही नहीं लडे जाते: युद्ध हजारों तरह के हो सकते हैं| समस्या यह है कि भारत अपने लिये उपयुक्त युद्ध की पहचान नहीं कर पा रहा है| भारत की वर्तमान सुरक्षा-नीति निहायत ही रक्षात्मक, असफल और आत्मघाती है|
eshadow
July 18th, 2006 at 2:11 pm
4उसका समय आ रहा है।
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The pursuit of happiness is a most ridiculous phrase; if you pursue happiness you'll never find it. - C. P. SnowCategories
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