एक सोफ्टवेयर प्रोग्रामर मरने के बाद यमराज के पास पहुँचा, उसे बताया गया कि उसके कर्मो के आधार पर उसे ये च्वाइस दी जाती है कि वो स्वर्ग
या नर्क में से एक चुन ले। उसने कहा कि वो पहले दोनो जगह देखना चाहेगा। उसे जब दोनो जगह दिखाई गयी तो उसने देखा कि नर्क में लोग क्या मजे से हैं, अप्सरायें नाच रही है, सुरा की नदियां बह रही है, चारों तरफ मस्ती और मजे का आलम है जबकि स्वर्ग में लोग आराम से बैठे तो हैं, लेकिन ना सुरा है ना अप्सरायें, सिर्फ खाने के लिये फल वगैरह है। तो उसने यमराज को नर्क जाने को बोल दिया। कुछ दिनों बाद यमराज जायजा लेने पहुँचे तो देखते है सोफ्टवेयर प्रोग्रामर को जंजीरों से बाँध लटकाया हुआ है, नीचे आग जली है, पीठ पर कोड़े पर रहे हैं वो चीखे जा रहा है। यमराज उसके पास पहुँचे तो वो देखते ही बोला ये क्या नाइंसाफी है आपने तो कुछ और दिखाया था ऐसा तो कुछ नही था। यमराज छुटते ही बोले जो तुमने देखा दरअसल वो स्क्रीन सेवर था।
संता सिंह अंडरवियर खरीदने करने दुकान पर पहुँचे, जब एक पसंद करी तो दुकानदार ने उसका दाम बताया 150 रूपये। संता बोले अरे भाई डेलीवियर दिखाओ पार्टी वियर नही चाहिये।
एक बार संता ‘वांटेड’ का पोस्टर देखके सोच में पड़ गये, सोचने लगे कि साला वांटेड था तो फोटो खींचने के बाद उसे जाने क्यों दिया।
संता सिंह जी कार की बैटरी बदलवाने गये, मैकनिक बोला कि एक्साइड (Exide) कि डाल दूँ, संता बोले नही यार दोनो साइड की डालना नही तो बाद में फिर प्रोब्लम करेगी।
संता के भाई बंता एक बार बुक्स वापस करने लाइब्रेरी पहुँचे, मेज पर पटक कर बोले, क्या बकवास है - सारी बुक पड़ ली, इतने सारे करेक्टर थे, कोई कहानी ही नही थी। लाईब्रेरियन बोला अच्छा तो वो तुम थे जो टेलिफोन डायरेक्टरी ले गया था।
बंता सिंह एक बार संता को बोले ओये तु हर एस एम एस (SMS) को दो बार क्यों भेज रहा है। संता ने जवाब दिया कि क्योंकि तुझे अगर एक फोरवर्ड करना पड़े तो दूसरा तेरे पास रहे।
संता सिंह जी अपने एक दोस्त को बोले यार मैं ट्रेन में सारी रात नही सो पाया। दोस्त ने पूछा, क्यों? संता बोले, अरे वो ऊपर की बर्थ जो मिली थी। दोस्त ने कहा कि तुमने बदली क्यों नही। संता बोले, ओये नीचे की बर्थ में कोई था ही नही बदली करने को।
टीचर ने क्लास में जनसंख्या के बारे में बताया कि भारत में एक औरत हर दस सैकंड में एक बच्चे को जन्म देती है। संता खड़े होकर बोले, हमें तुरंत ही उसे ढूँढ कर रोकना चाहिये।
संता ने एक आदमी से पूछा, ये सारे लोग दौड़ क्यों रहे हैं? आदमी ने जवाब दिया कि ये दौड़ है जो जितेगा उसे कप मिलेगा। संता बोले कि अगर सिर्फ जीतने वाले को कप मिलेगा तो बाकी लोग क्यों दौड़ रहे हैं।
संता ने एक लड़की को प्रपोज किया, लड़की बोली मैं तुम से 1 साल बड़ी हूँ। संता बोले, ओये नो प्रोब्लम सोणिये, मैं तुम से अगले साल शादी करूँगा।
संता एक बार अपनी आखिरी इच्छा बता रहे थे कि मैं अपने दादा की तरह शांति के साथ नींद में ही जन्नत को प्यारा होऊँ ना कि जिस गाड़ी को मेरे दादा चला रहे थे उसमें बैठे चीखते चिल्लाते पैसेंजरों की तरह।
संता आर्ट गैलरी में पहुँच बोले, इस खतरनाक सी दिखने वाली तस्वीर को आप मार्डन आर्ट कहते हो। गैलरी वाला बोला, ‘माफ कीजिये सर, ये तो मिरर (दर्पण) है।
एक बार संता बहुत धीरे धीरे लिख रहे थे, दोस्त ने कहा इतने धीरे क्या लिख रहे हो। संता बोले अपने 6 साल के बेटे को लैटर लिख रहा हूँ वो तेज नही पढ़ सकता ना।
एक आदमी ने एक बार संता सिंह से पूछा, ये मनमोहन सिंह जी वॉक पर शाम को क्यों जाते हैं सुबह क्यों नही? संता ने जवाब दिया, “अरे भई मनमोहन इज पीएम (PM) नोट ए एम (AM)।
3 Responses
संजय बेंगाणी
July 15th, 2006 at 2:04 am
1पहला व अंतिम अच्छे रहे.
:-)
रवि
July 15th, 2006 at 2:16 am
2मज़ेदार चुटकुले हैं
अवलोकन - चुटकुलों की 21 वीं अनुगूंज at अक्षरग्राम
July 20th, 2006 at 3:54 am
3[…] जोगलिखे तीरों ने बढ़िया गुदगुदियाँ मचाईँ. कुछ इधर उधर की से चुटकुलों जैसे विचारों के बेलगाम प्रवाह बहे तो बरबस हँसी छूट गई. रीडर्स कैफ़े पर निठल्ला चिंतन करते चुटकुलों की तो बात ही क्या थी. […]
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