छोटी क्लास में एक कविता पढ़ी थी - यदि मैं होता किन्नर नरेश, राजमहल में रहता। सोने का सिंहासन होता सिर पर मुकुट चमकता। आज के परिपेक्ष्‍य में अगर कहना हो तो कहूँगा - यदि मैं होता भारतीय डाक्टर, एम्स में नौकरी करता। 2 दिन काम में होता 5 दिन हड़ताल मैं करता। लेकिन क्या करें ये ना थी हमारी किस्मत।

वैसे एक बात तो है, पहले अक्सर सुनने में आता था कि मजदूरों ने हड़ताल कर दी है लेकिन अब हम थोड़ा एडवांस हो गये हैं इसलिये अब अक्सर सुनने में आता है डाक्टरों ने हड़ताल कर दी है। इन लोगों को हड़ताल का बहाना चाहिये वैसे ही जैसे पीने वालों को पीने का बहाना चाहिये। अब देखिये ना डॉक्टर वेणुगोपाल पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए बुधवार को उन्हें उनके पद से बर्ख़ास्त कर दिया गया बदले में डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया और आपातकालीन सेवाएँ भी ठप्प कर दी। जिसके कारण दो मरीजों की मौत भी हो गयी है, लेकिन इससे इन डाक्टरों को क्या। अब ऐसा अगर मरीज के साथ करेंगे तो मरीजों के रिश्तेदार क्या इनकी पूजा करेंगे (पहले ऐसे ही किसी मरीज के रिश्तेदार ने पिटाई कर दी थी)।

एम्स ही नही डॉक्टर वेणुगोपाल का समर्थन कर रहे कई डॉक्टरों ने आमरण अनशन शुरु कर दिया है वहीं मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज, लोकनारायण जयप्रकाश अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल और यूनिर्वसिटी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंसेस के डॉक्टरों ने भी हड़ताल कर दी है। अब कारण चाहे जो भी हो, आपातकालीन सेवाएँ ठप्प करना कहाँ तक उचित है। गलती चाहे किसी की भी हो क्या हड़ताल ही इसका इलाज है, आज डाक्टर गये कल अगर पुलिस या आर्मी भी हड़ताल पर चली गयी तो आखिर उन्हें भी तो ये हक है डेमोक्रेसी के नाम पर।

अमेरिका में एक जानवर की जान की कीमत भी भारत में एक इंसान की कीमत से ज्यादा है और ये बात मैं जीवन बचाने के लिये होने वाली कोशिशों के बेस पर कह रहा हूँ। हो सकता है मेरी कही ये बात बहुतों को नागवार गुजरे लेकिन ये सच है। लोग पहले ये कहते थे

“हम इतनी परेशानियों के बावजूद दिल्ली आकर इलाज करा रहे हैं. अगर अपने इलाक़े में ही एम्स जैसा अस्पताल होता तो यहाँ फ़ुटपाथ पर रहकर महीनों अपनी बारी का इंतज़ार क्यों करते. पता नहीं हमारे राज्य में एम्स जैसा अस्पताल कब बनेगा….”

लेकिन जिस तरह के डाक्टरों की फसल तैयार हो रही है उनसे इस तरह के हस्पतालों में जाने वाले मरीजों को कितना फायदा होगा कोई नही बता सकता।मेडिकल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने इलाज के लिए आनेवाले विदेशियों को मेडिकल वीज़ा देने का फ़ैसला किया है. लेकिन डाक्टरों का अगर ऐसा ही रवैया रहा तो क्या इस तरह के वीजा सफल होंगे। कहीं ऐसा ना हो वीसा जारी करने के बाद सरकार को इन्ही मेडिकल पर्यटकों को कहना पड़े, खबरदार! हड़ताल अभी जारी है।

चलते चलते
खबर थोड़ा हट के जरूर है लेकिन हड़ताल से जुड़ी है। अमेरिका के न्यूजर्सी राज्य के गवर्नर ने राज्य के घाटे को कम करने के लिये सेल्स टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्ही की पार्टी के लोग अड़ गये। बजट पास नही हुआ नतीजा सरकारी कर्मचारियों को बगैर वेतन की छुट्टी, जुआंघर बंद, पार्क बंद, यानि आवश्यक सेवाओं को छोड़ सब जगह बंद करने का आदेश। लेकिन 5-6 दिन बाद बातचीत से इसका हल निकल ही गया

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