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ऐ मेरे वतन के लोगों

दुनिया में युद्ध का सबसे ऊँचा मैदान, खतरनाक पहाड‌ियाँ, एक मुश्किल सा नजर आने वाला काम। भारतीय फौज के जवानों के हौसले बुलंद थे और इरादे मजबूत उन्होंने आतंकियों और उन के भेष में छुपे पाकिस्तानी सैनिकों को भेड़ बकरियों की तरह देश की सीमा से बाहर खदेड़ दिया। इस बात को अब ७ साल [...]

खालीपीली का चिंतन

सोचा चिंतन का तरीका थोड‍ा बदला जाय, निठल्ला चिंतन करते करते बोर हो गये हैं। इस बार खालीपीली भंकस (बकवास) करने की सोची, बकवास हम किये देते हैं चिंतन आप बैठ कर करते रहो। अब देखो ना अपनी दुनिया गरीब की चादर जैसी हो गई है, एक जगह से सिलो (सिलाई करना) तो दूसरी जगह [...]

कॉल सेंटर

ये जनाब शायद इंडिया के कॉल सेंटर से रूबरू हुए बिना ही यह मूवी बना बैठे, १२ मिनट की मूवी आप भी देखिये और मजा लीजिये।

[ More ] July 24th, 2006 | 2 Comments | Posted in फिल्‍म, बस यूँ ही |

नीम हकीम खतरा-ए-जान

काफी पुरानी कहावत है, अब सबको इसका मतलब पता है कि नही कह तो नही सकता लेकिन इतना बता सकता हूँ कि भारतीय ब्लोगर (जो भारत से ब्लोग करते हैं) जरूर इसका मतलब अब तक जान गये होंगे। हुआ यों कि भारतीय सरकार ने, जो भी कारण रहा हो उसके चलते कुछ इंटरनेट साईटस (20-22) [...]

एक सिक्के के दो पहलू

ये कोई पहेली नही जिसे बूझने का ईनाम हो – सिक्का है आतंकवाद, दो पहलू हैं शांति वार्ता और युद्व। सिक्का उछाला गया अब किस को क्या मिला ये कोई मुकद्दर की बात नही। ईजरायल के दो सिपाहियों को हिजबुल्लाह के लोगों ने बंदी बना लिया, ईजरायल ने किसी को ये कहने का भी मौका [...]

अनुगूँज 21: चुटकुलों की गूँज

एक सोफ्टवेयर प्रोग्रामर मरने के बाद यमराज के पास पहुँचा, उसे बताया गया कि उसके कर्मो के आधार पर उसे ये च्वाइस दी जाती है कि वो स्वर्ग या नर्क में से एक चुन ले। उसने कहा कि वो पहले दोनो जगह देखना चाहेगा। उसे जब दोनो जगह दिखाई गयी तो उसने देखा कि नर्क [...]

[ More ] July 14th, 2006 | 3 Comments | Posted in अनुगूँज |

जयचंद आला रे

आप भी सोच रहे होंगे ये जयचंद कौन है और कहाँ से आ रहा है, सोचने वाली बात ही नही है जाहिर सी बात है अपने ही देश में होगा। खबर में सुना देता हूँ, डिसाईड आप खुद कर लीजिये। मुम्बई पुलिस ने सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफॅ इंडिया) को संदिग्धों की लिस्ट में डाला [...]

[ More ] July 13th, 2006 | 6 Comments | Posted in राजनीति |

सीरियाना और बहकता मैं

अभी कुछ दिनों पहले ही ये फिल्म देखी थी, इसके बारे में कुछ लिखने से पहले ही धमाके हो गये। मुम्बई वाले सीना चोड़ा करके फिर से घुमने लगे जैसे कह रहे हों देख लो हम नही डरे अगली बार ज्यादा तैयारी के साथ आना। जब ईराकी हर दिन होने वाले विस्फोटों के बाद भी [...]

[ More ] July 12th, 2006 | Comments Off | Posted in बस यूँ ही |

रक्तबीज और मुम्बई घमाके

एक बार फिर दहली मुम्बई, एक के बाद एक 7 बम घमाके। भारत को झुकाना इन आतंकवादियों के बस की बात नही लेकिन इनकी ये कोशिश जारी है सरकार के कमजोर जवाबी कारवाही के कारण। मृतक के परिवार को 5 लाख रूपये और एक सदस्य को नौकरी की जगह अगर ये घोषणा की जाती कि [...]

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