बच्‍चों के सपने खतरे में

नासा, अमेरिका द्वारा आयोजित ‘स्‍पेस सेटेलमेंट डिजाईन कांटेस्‍ट’ में उड़ीसा के चार होनहार बच्‍चों ने जीता दूसरा पुरस्‍कार। उनकी इस उप्‍लब्‍धि पर नासा ने इस्‍पात इंगलिस मीडियम, राउलकेला के उन चार बच्‍चों (उल्‍हास, अमितव, असिम और सोम्‍या) को नासा आने का नोय्‍ता दे भेजा। लेकिन उन होनहार कल के वैज्ञानिकों को क्‍या मालूम था कि इस देश में प्रायोजक तभी मिलता है जब उसे कुछ रिटर्न की उम्‍मीद हो यानि की प्रायोजित करने पर कुछ कमाने की उम्‍मीद।

131 पेज की थीसिस लिख कर 96 देशों के 200 उम्‍मीदवारों में दूसरे आये पर अब एक प्रायोजक के लिये तरस रहे हैं। इन बच्‍चों को जरूरत है पाँच लाख रूपये की , जिसके मिलने पर आउतट स्‍पेस पर जीवन के अध्‍ययन की अपनी इच्‍छा को वो पूरा कर सकें। इन लोगों ने राउलकेला स्‍टील प्‍लांट को अर्जी भेजी है अब इंतजार है वहाँ से जवाब आने का। हम तो यही चाहेंगे कि इनका ये इंतजार ज्‍यादा लंबा ना हो और जो कदम आगे बढ़े हैं उन्‍हे पीछे ना करना पड़े।

न्‍यूज यहाँ है

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Tarun

2 Responses to “ बच्‍चों के सपने खतरे में ”

  1. Nothing surprising this is common in this country, where a batsman get lakhs on hitting a hundred finds governments , companies and media get queued , other side the person who saved the lives of several without caring his own get only some rupees and no attention.
    this is the reallity of shining and intellectual India.

  2. But I read a update on Alka’s blog that something positive happened in this regard.

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