क्रिकेट वर्डकप 2011 - कि पैसा बोलता है
तो आखिर 3 हफ्ते देर से पर्चा दाखिल करने के बावजूद एशिया को मिली क्रिकेट वर्डकप 2011 की मेजबानी। तो आखिर ऐसा क्यों कर हो गया, सीधा सा जवाब है पैसा बोलता है। एशिया की मेजबानी से होने वाली आय (अनुमानित) आस्ट्रेलिया-न्यूजीलैण्ड में क्रिकेट होने से होने वाली आय से कहीं ज्यादा बतायी गयी। अब पैसे की खनक के आगे सुविधायें (इनफ्रा स्ट्रकचर) किसी को नजर नही आयी। पहले से ही रईस आई सी सी और बी सी सी आई की चांदी ही चांदी। अब देखना है इस होने वाली आय से क्रिकेट की सुविधाओं (इनफ्रा स्ट्रकचर) में कितना खर्च किया जाता है।




अरे भई, आस्ट्रेलिया न्यूज़ीलैन्ड को 2015 का वर्ल्डकप आयोजन मिल गया!!
वैसे मेरे अनुसार न्यूज़ीलैन्ड में तो क्रिकेट वर्ल्डकप जैसे बड़े मुकाबले होने ही नहीं चाहिए, उनकी पिचें और मौसम तो भई वल्लाह, अद्वितीय है!! 
मुझे तो इस खेल के प्रति लोगों की दीवानगी को देखकर आश्चर्य होता है।
एक बार सोरव गांगुली के विषय में एनडीटीवी पर बहस हो रही थी तो सिद्धु साहब ने तो पूरे देश को ही अहसान फरामोश कह दिया, मैं सिद्धु से पूछना चाहता हूं कि क्या कोई क्रिकेटर क्रिकेट खेलकर हम भारतवासियों पर अहसान करता है क्या?
विज्ञापन और मेच फीस के माल में से कभी कोई नेक कार्य किया है क्या?
ईमरान खान को देखो उसने पाकिस्तान में अस्पतान बनवा दिया, जबकी उससे ज्यादा कमाने वाले क्रिकेटर हमारे देश में पाये जाते हैं।