<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	>
<channel>
	<title>Comments on: धर्म बोले तो&#8230;&#8230;.</title>
	<atom:link href="http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/</link>
	<description>निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 04:27:50 +0000</pubDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.5.1</generator>
		<item>
		<title>By: विश्व हिन्दू समाज</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/#comment-256</link>
		<dc:creator>विश्व हिन्दू समाज</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Oct 2006 18:49:22 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=55#comment-256</guid>
		<description>हिन्‍दुत्‍व अथवा हिन्‍दू धर्म 

हिन्‍दुत्‍व एक जीवन पद्धति अथवा जीवन दर्शन है जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्षको परम लक्ष्‍य मानकर व्‍यक्ति या समाज को नैतिक, भौतिक, मानसि‍क, एवं आध्‍यात्मिक उन्‍नति के अवसर प्रदान करता है।आज हम जिस संस्‍कृति को हिन्‍दू संस्‍कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय या भारतीय मूल के लोग सनातन धर्म या शाश्‍वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्‍त है जिसे पश्चिम के लोग समझते हैं। 

अधिक के लिये देखियेः http://vishwahindusamaj.com</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्‍दुत्‍व अथवा हिन्‍दू धर्म </p>
<p>हिन्‍दुत्‍व एक जीवन पद्धति अथवा जीवन दर्शन है जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्षको परम लक्ष्‍य मानकर व्‍यक्ति या समाज को नैतिक, भौतिक, मानसि‍क, एवं आध्‍यात्मिक उन्‍नति के अवसर प्रदान करता है।आज हम जिस संस्‍कृति को हिन्‍दू संस्‍कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय या भारतीय मूल के लोग सनातन धर्म या शाश्‍वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्‍त है जिसे पश्चिम के लोग समझते हैं। </p>
<p>अधिक के लिये देखियेः <a href="http://vishwahindusamaj.com" rel="nofollow">http://vishwahindusamaj.com</a></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: चिट्ठाकारों द्वारा लगभग 18,000 शब्द लिखे गये at अक्षरग्राम</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/#comment-97</link>
		<dc:creator>चिट्ठाकारों द्वारा लगभग 18,000 शब्द लिखे गये at अक्षरग्राम</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Apr 2006 04:32:43 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=55#comment-97</guid>
		<description>[...] अनुगूंज 18 के लिए इन्होने लिखा हैं : दुनियाँ मेरी नजर से (अमित) (30 मार्च) जोगलिखी (संजय बेंगाणी) दिनांक 1 अप्रैल दस्तक (सागर चन्द नाहर ) दिनांक 2 अप्रैल खाली-पीली (आशीष श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निठल्ला चिंतन (तरूण) दिनांक 4 अप्रैल छींटे और बौछारें (रविशंकर श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निनाद गाथा (अभिनव) दिनांक 5 अप्रैल मेरा पन्ना (जितेन्द्र चौधरी) दिनांक 5 अप्रैल बीच-बजार (परग कुमार मण्डले) दिनांक 5 अप्रैल उन्मुक्त (उन्मुक्त) दिनांक 9 अप्रैल झरोखा (शालिनी नारंग) दिनांक 10 अप्रैल उडन तश्तरी (समीरलाल) दिनांक 11 अप्रैल फ़ुरसतिया (अनूप शुक्ला) दिनांक 12 अप्रैल मन की बात (प्रेमलता पाण्डे) दिनांक 12 अप्रैल (ई-स्वामी) दिनांक 14 अप्रैल मेरा चिट्ठा (आशीष) दिनांक 14 अप्रैल इधर उधर की (रमण ) दिनांक 14 अप्रैल [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] अनुगूंज 18 के लिए इन्होने लिखा हैं : दुनियाँ मेरी नजर से (अमित) (30 मार्च) जोगलिखी (संजय बेंगाणी) दिनांक 1 अप्रैल दस्तक (सागर चन्द नाहर ) दिनांक 2 अप्रैल खाली-पीली (आशीष श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निठल्ला चिंतन (तरूण) दिनांक 4 अप्रैल छींटे और बौछारें (रविशंकर श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निनाद गाथा (अभिनव) दिनांक 5 अप्रैल मेरा पन्ना (जितेन्द्र चौधरी) दिनांक 5 अप्रैल बीच-बजार (परग कुमार मण्डले) दिनांक 5 अप्रैल उन्मुक्त (उन्मुक्त) दिनांक 9 अप्रैल झरोखा (शालिनी नारंग) दिनांक 10 अप्रैल उडन तश्तरी (समीरलाल) दिनांक 11 अप्रैल फ़ुरसतिया (अनूप शुक्ला) दिनांक 12 अप्रैल मन की बात (प्रेमलता पाण्डे) दिनांक 12 अप्रैल (ई-स्वामी) दिनांक 14 अप्रैल मेरा चिट्ठा (आशीष) दिनांक 14 अप्रैल इधर उधर की (रमण ) दिनांक 14 अप्रैल [...]</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: जोगलिखी &#187; चिट्ठाकारों द्वारा लगभग 18,000 शब्द लिखे गये</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/#comment-96</link>
		<dc:creator>जोगलिखी &#187; चिट्ठाकारों द्वारा लगभग 18,000 शब्द लिखे गये</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Apr 2006 12:26:57 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=55#comment-96</guid>
		<description>[...] अनुगूंज 18 के लिए इन्होने लिखा हैं :   दुनियाँ मेरी नजर से (अमित) (30 मार्च) जोगलिखी (संजय बेंगाणी) दिनांक 1 अप्रैल दस्तक (सागर चन्द नाहर ) दिनांक 2 अप्रैल खाली-पीली (आशीष श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निठल्ला चिंतन (तरूण) दिनांक 4 अप्रैल छींटे और बौछारें (रविशंकर श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निनाद गाथा (अभिनव) दिनांक 5 अप्रैल मेरा पन्ना (जितेन्द्र चौधरी) दिनांक 5 अप्रैल बीच-बजार (परग कुमार मण्डले) दिनांक 5 अप्रैल उन्मुक्त (उन्मुक्त) दिनांक 9 अप्रैल झरोखा (शालिनी नारंग) दिनांक 10 अप्रैल उडन तश्तरी (समीरलाल) दिनांक 11 अप्रैल फ़ुरसतिया (अनूप शुक्ला) दिनांक 12 अप्रैल मन की बात (प्रेमलता पाण्डे) दिनांक 12 अप्रैल (ई-स्वामी) दिनांक 14 अप्रैल मेरा चिट्ठा (आशीष) दिनांक 14 अप्रैल इधर उधर की (रमण ) दिनांक 14 अप्रैल [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] अनुगूंज 18 के लिए इन्होने लिखा हैं :   दुनियाँ मेरी नजर से (अमित) (30 मार्च) जोगलिखी (संजय बेंगाणी) दिनांक 1 अप्रैल दस्तक (सागर चन्द नाहर ) दिनांक 2 अप्रैल खाली-पीली (आशीष श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निठल्ला चिंतन (तरूण) दिनांक 4 अप्रैल छींटे और बौछारें (रविशंकर श्रीवास्तव) दिनांक 4 अप्रैल निनाद गाथा (अभिनव) दिनांक 5 अप्रैल मेरा पन्ना (जितेन्द्र चौधरी) दिनांक 5 अप्रैल बीच-बजार (परग कुमार मण्डले) दिनांक 5 अप्रैल उन्मुक्त (उन्मुक्त) दिनांक 9 अप्रैल झरोखा (शालिनी नारंग) दिनांक 10 अप्रैल उडन तश्तरी (समीरलाल) दिनांक 11 अप्रैल फ़ुरसतिया (अनूप शुक्ला) दिनांक 12 अप्रैल मन की बात (प्रेमलता पाण्डे) दिनांक 12 अप्रैल (ई-स्वामी) दिनांक 14 अप्रैल मेरा चिट्ठा (आशीष) दिनांक 14 अप्रैल इधर उधर की (रमण ) दिनांक 14 अप्रैल [...]</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Amit</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/#comment-93</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Apr 2006 06:54:26 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=55#comment-93</guid>
		<description>&lt;blockquote&gt;मेरे लिये मंदिर, मस्‍जिद, चर्च, गुरूद्वारा सब एक जैसे हैं जाहिर है एक के लिये कुछ कहूँगा वो दूसरे के लिये भी लागू होगा, कुछ गलत तो नही कहा ना।&lt;/blockquote&gt;
भई मैंने कब कहा कि किसी एक के बारे में कुछ कहो? बुराई तो सभी में है, विकृत तो सभी हो गए हैं!! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>मेरे लिये मंदिर, मस्‍जिद, चर्च, गुरूद्वारा सब एक जैसे हैं जाहिर है एक के लिये कुछ कहूँगा वो दूसरे के लिये भी लागू होगा, कुछ गलत तो नही कहा ना।</p></blockquote>
<p>भई मैंने कब कहा कि किसी एक के बारे में कुछ कहो? बुराई तो सभी में है, विकृत तो सभी हो गए हैं!! <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/#comment-92</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Apr 2006 01:16:01 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=55#comment-92</guid>
		<description>&lt;b&gt;@युगल&lt;/b&gt;, कितने लोग वास्‍तव में मुल्यों के निर्माण के लिये धर्म का उपयोग करते हैं।

&lt;b&gt;@अमित&lt;/b&gt;, मेरे लिये मंदिर, मस्‍जिद, चर्च, गुरूद्वारा सब एक जैसे हैं जाहिर है  एक के लिये कुछ कहूँगा वो दूसरे के लिये भी लागू होगा, कुछ गलत तो नही कहा ना।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>@युगल</b>, कितने लोग वास्‍तव में मुल्यों के निर्माण के लिये धर्म का उपयोग करते हैं।</p>
<p><b>@अमित</b>, मेरे लिये मंदिर, मस्‍जिद, चर्च, गुरूद्वारा सब एक जैसे हैं जाहिर है  एक के लिये कुछ कहूँगा वो दूसरे के लिये भी लागू होगा, कुछ गलत तो नही कहा ना।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Amit</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/#comment-90</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Apr 2006 17:00:29 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=55#comment-90</guid>
		<description>वाह वाह, क्या लिखा है तरूण भाई, हर तरह से साफ़ सुथरे निकल गए!! ;)
&lt;blockquote&gt;कहीं लिखा हैं काफिरों को मारो&lt;/blockquote&gt;
संजय भाई, जहाँ तक मैं जानता हूँ, कुरान में यह नहीं लिखा कि काफ़िरों को मारो। यह तो मौलवियों आदि द्वारा फ़ैलाई गई बकवास है, ठीक उसी तरह जिस तरह हज़ार-डेढ़ हज़ार वर्ष पूर्व रोम पर पोप का शासन था और वे लोग जो ईसाई धर्म को नहीं अपनाता था उसका नाश कर देते थे।
&lt;blockquote&gt;लेकिन मैं संजय भाई से यह जानना चाहूँगा कि हिन्दू धर्म की किस पुस्तक में लिखा है - मलेच्छों का नाश हो। हाँलाकि दूसरी बात से मैं अपनी सहमति ज़ाहिर करता हूँ।&lt;/blockquote&gt;
इसका उत्तर तो मैं दे सकता हूँ पर मैं $%^&#038;*(#, कुछ नहीं कह रहा। ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाह वाह, क्या लिखा है तरूण भाई, हर तरह से साफ़ सुथरे निकल गए!! <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>कहीं लिखा हैं काफिरों को मारो</p></blockquote>
<p>संजय भाई, जहाँ तक मैं जानता हूँ, कुरान में यह नहीं लिखा कि काफ़िरों को मारो। यह तो मौलवियों आदि द्वारा फ़ैलाई गई बकवास है, ठीक उसी तरह जिस तरह हज़ार-डेढ़ हज़ार वर्ष पूर्व रोम पर पोप का शासन था और वे लोग जो ईसाई धर्म को नहीं अपनाता था उसका नाश कर देते थे।</p>
<blockquote><p>लेकिन मैं संजय भाई से यह जानना चाहूँगा कि हिन्दू धर्म की किस पुस्तक में लिखा है - मलेच्छों का नाश हो। हाँलाकि दूसरी बात से मैं अपनी सहमति ज़ाहिर करता हूँ।</p></blockquote>
<p>इसका उत्तर तो मैं दे सकता हूँ पर मैं $%^&#038;*(#, कुछ नहीं कह रहा। <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: युगल मेहरा</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2006/04/03/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/#comment-89</link>
		<dc:creator>युगल मेहरा</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Apr 2006 16:48:29 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.readers-cafe.net/nc/?p=55#comment-89</guid>
		<description>धर्म को किस रूप में हम अपनाते हैं यह हमारा काम है। धर्म का निर्माण मुल्यों के निर्माण के लिये हुआ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धर्म को किस रूप में हम अपनाते हैं यह हमारा काम है। धर्म का निर्माण मुल्यों के निर्माण के लिये हुआ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>
