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	<title>Comments on: फटी है जींस, फटने दो&#8230;.</title>
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	<description>निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥</description>
	<pubDate>Wed, 03 Dec 2008 02:43:03 +0000</pubDate>
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		<title>By: Amit</title>
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		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Mar 2006 20:58:31 +0000</pubDate>
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		<description>ऐसा ही होता है भईये, व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से ही की जाती है आजकल। यदि कोई दुष्ट भी चमक दमक वाले कपड़े पहन ले तो सज्जन लगता है और यदि कोई महात्मा फ़टे कपड़े पहने हैं तो तिरस्कार के पात्र होते है।

अभी कुछ दिन पहले की बात है, मैं यार-दोस्तों के साथ खेलने के बाद घर जा रहा था तो सोचा कि मिठाई ले लूँ। पैसे देने जब काऊँटर पर पहुँचा तो वहाँ बैठे व्यक्ति ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं कोई अजूबा हूँ(साधारण से कपड़े पहन रखे थे, बाल कुछ बिखरे हुए थे)। पर जब उसे पाँच सौ का नोट और अंग्रेज़ी में उत्तर दिया तो तुरन्त उसके चेहरे के भाव सम्मान वाले हो गए व मुख़ड़े पर मुस्कान आ गई। ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसा ही होता है भईये, व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से ही की जाती है आजकल। यदि कोई दुष्ट भी चमक दमक वाले कपड़े पहन ले तो सज्जन लगता है और यदि कोई महात्मा फ़टे कपड़े पहने हैं तो तिरस्कार के पात्र होते है।</p>
<p>अभी कुछ दिन पहले की बात है, मैं यार-दोस्तों के साथ खेलने के बाद घर जा रहा था तो सोचा कि मिठाई ले लूँ। पैसे देने जब काऊँटर पर पहुँचा तो वहाँ बैठे व्यक्ति ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं कोई अजूबा हूँ(साधारण से कपड़े पहन रखे थे, बाल कुछ बिखरे हुए थे)। पर जब उसे पाँच सौ का नोट और अंग्रेज़ी में उत्तर दिया तो तुरन्त उसके चेहरे के भाव सम्मान वाले हो गए व मुख़ड़े पर मुस्कान आ गई। <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /></p>
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