कहते हैं पानी का अपना कोई रंग नही होता जिसमें मिला दो उसी जैसा हो जाता है, क्‍या यही बात कपड़ों के संदर्भ में भी कही जा सकती है। एक बार मैं शॉपिंग माल में घूम रहा था, घूम क्‍या रहा था विंडो शॉपिंग कर रहा था तो एक दुकान में मैने कुछ जींस डमी के ऊपर टंगी देखी। दाम देखा तो समझ नही आया इतनी महंगी क्‍यों, आप सोच रहे होंगे ऐसा क्‍या था जो इतनी महंगी थी। कुछ खास नही बस जगह जगह से फटी थी, मैं तो यही कहूँगा चाहे जानबूझ कर ही क्‍यों ना काटी हो। (शायद फैशन हो और फैशन में चीजें वैसे ही महंगी होती हैं।)

उस दिन सोचा इसे कौन पहनता होगा शायद स्‍कूल कालेज के नवयुवक लेकिन कुछ महीनों बाद देखने का भी सौभाग्‍य प्राप्‍त हो गया। हमारे अक्षय खन्‍ना जी एक दिन वैसी ही फटी जींस पहन सा रे गा मा में अवतरित हो गये। फिर १-२ ऐपिसोड बाद कार्यक्रम के होस्‍ट शान भी वही पहने नजर आये। आखिर में अभी कुछ दिनों पहले ही सल्‍लू मियां यानि कि सलमान खान वही पहने स्‍टेज में डांस कर रहे थे। (यहाँ अभी हालीवुड के कलाकारों को इस ड्रैस में देखना बाकी है)

यानि ऊंचे लोग ऊंची पसंद। इन्‍होने फटा पहना तो फैशन, जींस फटी तो फैशन लेकिन मजबूरी में अपनी तंगी में फटा सूती कपड़ा पहन कोई निकले तो गरीब। वो साहेब लोग सीना तान फटा पहन घूमें और बेचारा गरीब फटे को टांका लगा पहन के निकलने में भी शरमाये। तो अब आप लोग ही बताओ कि पानी के लिये रंगहीन कही जाने जैसी बात कपड़े के लिये भी कही जा सकती है कि नही। कौन पहन रहा है उस हिसाब से कपड़े कि कीमत और किस्‍मत तय होती है।

पुराने जमाने में किसी राजा ने कहा था, अतिथी का स्‍वागत उसके कपड़े देख भले ही कर लो लेकिन उसके बाद उसका सम्‍मान सत्‍कार उसके विचारों को देख के करना चाहिये। लेकिन आज जमाना बदल गया है, ज्‍यादातर जगह अब स्‍वागत, सत्‍कार और सम्‍मान सिर्फ पहचान, ओहदा और बैंक बैलेंस (जेब) देख कर ही किया जाता है।

कुछ भी हो एक बात तो तय है कि पांच सितारा जैसे होटल, टीवी कार्यक्रम में आम जनता को चाहे फटा पहनने के कारण आने ना दिया जाय लेकिन जाने पहचाने बड़े चेहरों को शायद ही कोई रोके। आप चाहें तो आजमा सकते हैं, निकल जाईये एक दिन फटी पेंट पहन पांच सितारा में डिनर करने फिर यहाँ जरूर बताईयेगा कि कैसा रहा ये प्रयोग।

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