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सssssश चुप!

बोलोगे तो……….ऐसा ही कुछ हुआ मेहर भार्गव के साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में। जब उन्‍होने अपनी बहु के साथ हो रही छेड़खानी का विरोध किया तो उनमें से ही एक युवक ने उन्‍हें सरेआम गोली मार दी। एक महीने तक मौत से जुझने के बाद आखिर मेहर ने दम तोड़ दिया। एक महीने [...]

तेरा पानी अमृत, मेरा पानी पानी

ये सारांश कह रहा हूँ उस बात की चर्चा का जो अफगानिस्‍तान की गलियों और पश्‍चिमी देशों के गलियारों के बीच चल रहा है। (आप चाहें तो तेरा को मेरा कर दें और मेरा को तेरा अर्थ नही बदलने वाला) अभी तक अगर नही समझे तो कुछ यहाँ पढ़ोकुछ यहाँ पढ़ो और कुछ यहाँकुछ यहाँ। [...]

फटी है जींस, फटने दो….

कहते हैं पानी का अपना कोई रंग नही होता जिसमें मिला दो उसी जैसा हो जाता है, क्‍या यही बात कपड़ों के संदर्भ में भी कही जा सकती है। एक बार मैं शॉपिंग माल में घूम रहा था, घूम क्‍या रहा था विंडो शॉपिंग कर रहा था तो एक दुकान में मैने कुछ जींस डमी [...]

[ More ] March 17th, 2006 | 1 Comment | Posted in फैशन, रहन-सहन |

नहले पे देहला

आस्‍ट्रेलिया ने 434 रन बनाकर नेहला मारा तो किसने सोचा था कि बहुत जल्‍द ही साऊथ अफ्रीका 438 रन बनाकर दहला मार देगी। आज जोहनसबर्ग में खेले गये पांचवें एक दिवसीय क्रिकेट मैच में ऐसा ही कुछ हुआ। पहले खेलते हुए जब आस्‍ट्रेलिया ने 4 विकेट खोकर 50 ओवर में 434 रन बनाये होंगे तो [...]

[ More ] March 12th, 2006 | 3 Comments | Posted in क्रिकेट |

उजाला

हर तरफ फैला उजाला, हर कली खिलने लगी। आई सूरज की किरण, रात घर चलने लगी।। पंछी जो सब चुप थे अब तक, सहसा चहचहाने लगे। कहीं शोर बच्चों का है तो, कहीं गीत बजने लगे।। अब भी कुछ ऐसी जगह हैं, जहाँ रहता हरदम अंधेरा। गोलियों की शोर के बीच, सिसकियाँ लेता सवेरा।। पंछी [...]

[ More ] March 6th, 2006 | 3 Comments | Posted in शायरी और गजल |

जाने भी दो यारों

एक के बाद दूसरा जब विसंगति की बात करने लगा तो हमें लगा क्‍यों ना हम भी अपनी ढपली बजा बहती गंगा में हाथ धों लें। अब सवाल यही था कि नाक को पकड़ा कैसे जाय, पहले ने सीधा पकड़ा सब को दिख गया तो लगे सब गलियाने, दूसरे ने थोड़ा समझदारी दिखायी हाथ पीछे [...]