धर्म और बोलने की आजादी
बोलने या लिखने की आजादी है इसका मतलब ये नही कि कोई कुछ भी लिखता जाय, अब अगले ने लिख दिया और हमें पसंद नही आया तो इसका मतलब ये भी नही कि गुस्से में अपने ही देश की संपत्ति को नुकसान पहुँचायें या क्रौध की अग्नी के जलजले में अपने ही लोगों की चिता जलायें। दोनों ही बातें गलत है।
ऐसे ही एक ताजा वाक्ये से हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं, और अब भारत में भी ये मशरूम (कुकुरमुत्ते) की तरह फैलती जा रही है। काश्मीर से लेकर हैदराबाद तक हर कोई धीरे-धीरे लपेटे में आ रहा है, उत्तर प्रदेश आ ही चुका है। ये सब काफी नही था इसलिये यू.पी. में, जहाँ किसी भी वक्त चुनाव हो सकते हैं, एक फाइव स्टार होटल की ऐसी तैसी तो हुई ही लेकिन साथ में स्वतंत्र भारत के इतिहास में अब तक की पहली इस तरह की घटना घटी है जहाँ एक मंत्री ने (समाजवादी पार्टी) कार्टुन बनाने वाले व्यक्ति के सिर के लिये 51 करोड़ प्लस सोना (शायद करोड़ ही है) का इनाम आफॅर किया।
क्या बुरा वक्त आ गया है भारत की राजनीति के लिये, जहाँ एक जन प्रतिनीधि बजाय जनता के क्रोध को शान्त करने के उसे और हवा दे रहा है। संविधान और देश की रक्षा करने की कसम खाने वाले एक मंत्री के इस आचरण के खिलाफ क्यों कोई कारवाही नही की जा रही।
कुछ वक्त पहले भी, हिन्दू देवी देवता के कुछ चित्र टॉयलेट कवर, जूतों, अंडरवियर आदि में छपे थे। ये कुछ एक कंपनियाँ (शायद बहुवचन यही होगा) प्रचार के लिये इतना सस्ता और लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ का रास्ता क्यों अख्तियार करती हैं। इस तरह के कृत्य रोके जाने चाहिये जो इंसाने के अंदर छुपे शैतान को जगा देता है और तब उसका फल कतिपय निर्दोष जनता और देश को भुगतना पड़ता है।
भई, पहली बात तो यह कि ऐसे विवाद का विषय बनने वाले कार्टून आदि कोई नई बात नहीं हैं। ईरान फ़िलिस्तीन आदि में ईसा के ऐसे कार्टून अखबारों में छपना आम बात है। अभी पीछे हिन्दु देवी-देवताओं आदि के भी कुछ चित्र टॉयलेट पेपर आदि पर छपे थे, और डेविड बेखम व उसकी बीवी को भी शिव-पार्वती के रूप में एक अंग्रेज़ी अखबार में दिखाया गया था। परन्तु हिन्दुओं ने इसका विरोध सभ्य रूप से किया था और दोषियों ने इसकी क्षमा भी माँगी थी। परन्तु यह इस्लामी कट्टरपंथी ही हैं जो राई का पहाड़ बना देते हैं। नहीं तो क्या तुक बनती है कि इस्लामाबाद में दंगाई ब्रिटिश और फ्रैन्च एम्बैसी में घुस तोड़ फ़ोड़ करने की कोशिश करें, कार्टून तो एक डैनिश अखबार में छपा था!! और अपने यहाँ की चीज़ें तोड़-फ़ोड़ कर क्या हासिल हो जाएगा? कुछ नहीं!!
दरअसल बात सीधी सी है, असमाजिक तत्वों को तो मौका मिल गया तोड़ फ़ोड़ करने का, वही लोग यह सब कर रहे हैं। उन्हे कार्टून छपने न छपने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता। इस्लामी लीडरों को अपनी बकवास करने के लिए बना बनाया मंच मिल गया है। और रही बात उस इनाम को घोषित करने वाले नेता की, तो सरकार को तो सबसे पहले यह जाँच करनी चाहिए कि उसके पास इतना धन आया कहाँ से। दूसरे, यह बिलकुल किसी व्यक्ति की हत्या करने की सुपारी देने जैसा है, तो उसको गिरफ़्तार कर उस पर मुकदमा चलना चाहिए। परन्तु ऐसा नहीं होगा। रही बात वह यह क्यों कर रहा है, तो उत्तर है कि वह ऐसा मात्र लोकप्रियता के लिए कर रहा है, वोटों के लिए कर रहा है। संविधान की रक्षा गई तेल लेने, मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि किसी भी मंत्री को तो यह भी याद न होगा कि उसने पद ग्रहण करते समय क्या शपथ ली थी, वह तो मात्र औपचारिकता है जो कि उस समय पढ़कर बोल दी और भूल गए!!
अमित ने काफी सही लिखा हैं. मंत्री महोदय को वोट बैंक से मतलब हैं बाकी चीजे गयी तेल लेने. जिस तरह से कट्टर माने जाने वाला मुस्लिम समाज भारत में शान्त रहा इसकी प्रसन्नसा होनी चाहिए. और आगे भी इन स्वार्थी नेताओं के बयानो के फेर में न आये एसी कामना करनी चाहिए. रही बात दंगाईयों की तो उन्हे क्या मतलब राष्ट्र से, राष्ट्रिय सम्पत्ति से. पता नहीं इन्होने वे कार्टून देखे भी हैं या नहीं. धार्मिक कट्टरता विध्वंशक होती हैं, वे इमारते गिरा सकते हैं बना नहीं सकते.
अमित, संजय,
यही तो मैं भी कह रहा हूँ चाहे वो बोलने की आजादी का अनुचित उपयोग हो या उसके बाद उपजा धार्मिक उन्माद दोनों ही सही नही है। रहा सवाल नेता का तो वो मैने पहले ही लिख दिया था कि किसी भी समय चुनाव हो सकते हैं। ज्यादा खुल कर इस लिये नही लिखा कि चुनाव लिखना ही सब कुछ कह देता है। जहाँ तक असामाजिक तत्वों का सवाल है तो इतना ही कहूँगा कि किसी देश में धार्मिक कट्टरता ज्यादा है कहीं कम। गुस्सा सिर्फ कार्टून को लेकर होता तो शायद इतना नही होता। हो सकता है, ईराक और अफगानिस्तान में चल रही परिस्थितियों से जनमी खीज भी इस समय उत्प्रेरक का काम की हो। नेता पर मुकदमा चलने का सवाल मैने भी उठाया ही था अब चलता है कि नही ये तो नेता ही जानें वो कहते हैं ना चोर चोर मौसेरे भाई।
मालूम है तरूण भाई, हमने सोचा कि अपना भोंपू भी बजा लें!!
कसम उड़ानझल्ले की, ज्यादा से ज्यादा उस नेता से माफ़ी मँगवा ली जाएगी, परन्तु उसे निष्कासित न किया जाएगा, मुकदमा चलना तो बहुत दूर की बात है। और वैसे भी, अपने देश में कितने ही नेताओं मंत्रियों और संत्रियों पर मुकदमे चलें है, पर सज़ा किसे हुई है?
मैं तो दावे के साथ कह सकता हूँ कि सल्लू भाई भी किसी न किसी तरह जेल जाने से बच लेगा, आखिर लोगों का हीरो है(चाहे रील लाईफ़ ही क्यों न) और हीरो को तो सौ खून माफ़ होते हैं, उसने तो फ़िर भी केवल एक हिरण ही मारा था!!
I am sorry for writing in English. But Tarun and your fellow bloggers has summed up the whole incident aptly. I really love reading Hindi. Lagata hai Pren Chand, Shivani, Jai Shankar Prasad, Dharam Veer Bharati aadi ko phir se duhara (revise) liya jaay. Aree Agaya aur Rahul Ji ko to to bhool hi gayi.
Alka, I think you should stop writing this now, its getting kinda repetitive!!
I’ll email you on how to write in Hindi!! 
[...] पहले भी धर्म से संबंधित लिखा था (तेरा पानी अमृत, मेरा पानी पानी, धर्म और बोलने की आजादी) और पहले ही कभी लिखी ‘सुन मेरे मौला‘ की ये चंद लाईन यहाँ पर सटिक बैठती है इसलिये दोबारा पोस्ट कर रहा हूँ। [...]