आवारा पागल दीवाना यानि परफेक्ट लवर
क्या वक्त आ गया है, जिस बारे में आज तक कभी सोचा नही उसके बारे में लिखना पड़ रहा है। संतोषी माता वाले पर्चे कभी आगे नही बड़ाये, चेन-मेल की चेन कभी किसी को फार्वड नही करी लेकिन यह सोच के इसे लिख रहा हूँ चलो इसमें कुछ तो मेहनत है (अलका मेहनत पर ध्यान दिया जाय)।
आवारा पागल दीवाना होना यह प्रेमी कहलाने या बनने से पहले की पूर्व आवश्यकतायें हैं, अगर यह गुण आप में नही तो बेहतर होगा कि कोई और कैरियर (पति/पत्नी) तलाश लें। अगर आप अपने काम में या कहीं किसी और बात में व्यस्त रहेंगे तो जनाब प्रेम या प्रेमी के लिये वक्त कहाँ से निकालेंगे इसलिये आवारा होना जरूरी है। आवारा वो जो कोई काम ना करे या किसी काम का ना हो, तभी तो गालिब कह गये -
‘इश्क ने गालिब निक्कमा कर दिया वरना हम भी आदमी थे काम के’।
जो सारी दुनिया से हट के सोचता है, या फिर बंधी बंधाई लीक से हट के काम करता है उसे दुनिया पागल कहती है तभी तो कोई कहता है
‘आशिक हूँ एक महजबीं का लोग कहें मुझे पगला कहीं का’।
और अब आते हैं दीवाना होने के गुण पर, इस गुण के होने ना होने की जरूरत समझाने कि जरूरत होनी तो नही चाहिये क्योंकि
‘दिल दीवाना बिन सजना के माने ना, ये पगला है समझाने से समझे ना’।
यह तीन गुण आप के Resume में हैं तो आप हुए प्रेमी और अब आप निपुण प्रेमी होने के लिये आवेदन (Apply) कर सकते हैं।
काफी समय पहले एक फिल्म देखी थी, ना ही उस वक्त और ना तब से कुछ दिनों पहले तक यह कभी जेहन में आया कि ‘परफेक्ट’ शब्द लवर (प्रेमी) के साथ भी लग सकता है। अब लगे हाथ फिल्म का नाम भी बता दूँ वह फिल्म थी ‘परफेक्ट मर्डर’।
इससे पहले कि आप मेरी सोच पर कुछ कहें तो मैं बता दूँ कि आज तक जितने भी प्रेमियों की मिसाल दी जाती है (लैला मजनूँ से रोमियो जूलियट तक) वो सब मिलने से पहले खुदा को प्यारे हो गये। कहना का तात्पर्य है कि या तो समाज के हाथों मार दिये गये या खुद की जान लेने के लिये मजबूर किये गये। और इस के लिये कभी किसी को कोई सजा मिली हो इसका कहीं उल्लेख नही मिलता तो यह हुआ ना परफेक्ट मर्डर, जिसमें कातिल का पता नही या उसको कोई सजा नही। यहाँ तक कि एक मात्र प्रेमी भगवान यानि कृष्ण भी अपनी प्रेमिका का साथ ना पा सके, जब तक जिंदा रहे रूक्मिणी के होकर, राधा का साथ मिला तो मरने के बाद मंदिर में।
मेरा मानना है कि हर बात (या चीज) का एक वक्त होता है और कोई भी बात बेवजह नही होती। फर्ज करो वो सारे प्रेमी एक दूसरे के हो जाते और एक सफल पति या पत्नी सिद्व नही होते तो क्या होता? अगर ऐसा होता तो शायद ही प्रेम की मिसाल बनते और ना ही प्रेमी शब्द (या व्यक्ति) की ओर इतनी तवज्जो दी जाती जितनी आज दी जाती है। और ना ही आज हममें से कोई अपनी-अपनी यूँ लिस्ट दे रहा होता। दुनिया में तो कितने ही सफल दंपति हुये होंगे फिर क्यों उनकी कोई मिसाल नही मिलती, क्या उनके बीच कोई प्रेम नाम की चीज नही रही होगी। फिर क्या वजह है हर बार असफल प्रेमी की ही मिसाल दी जाती है। वजह सिंपल है समाज और दुनिया प्यार से, बिना कहे भी कह देती है कि देख लो ज्यादा कहीं प्यार व्यार के चक्कर में पड़े तो वैसा ही अंत ना हो, इसलिये प्यार भी करो तो समझदारी से।
कभी आपने सोचा कि कितनी अजीब बात है जब कभी प्रेम की मिसाल दी जाती है उन लोगों कि जो इसमें असफल हुये या एक दूसरे से मिल ना पाये लेकिन प्रेम के अलावा अगर मिसाल देनी हो तो हमेशा किसी सफल व्यक्ति की ही दी जाती है, जो मेहनत करके भी असफल हो जाये उसकी ये समाज चर्चा भी नही करता।
इस से पहले कि यह रोमांटिक सा लगने वाला टोपिक (विषय) गंभीर होने लगे मैं आ जाता हूँ अपनी लिस्ट पर, कहीं ऐसा ना हो यह सब पढ़ कर जो बचे हैं वो अपने हथियार ही डाल दें और अपनी लिस्ट लिखने से मुकर जायें। क्या करें दिल से तो हम भी काफी रोमांटिक किस्म के व्यक्ति हैं जिसे ये शरीफ दुनिया दिलफेंक कहती है लेकिन इस कमबख्त दिमाग का क्या कीजिये जो प्यारी सी किसी प्रेमिका के जालिम बाप सा बार-बार बीच में आ खड़ा होता है, खबरदार कोई ऐसी वेसी हरकत करी तो।
इसलिये जब तक ये दिमाग बीच में अड़ंगा लगाये क्यों ना बता दूँ परफेक्ट प्रेमी कैसा हो। दुनिया के सभी असफल प्रेमियों को हाजिर नाजिर जान के कह रहा हूँ, जो कहूँगा सच कहूँगा और किसी छोरी के सिवा किसी के लिये कुछ ना कहूँगा।
१. सभी अंदाजे हुस्न प्यारे हैं, हम मगर सादगी के मारे हैं।
मगर ये दिल है कि मानता नही, कह रहा है
२. ‘अदायें भी हों, मोहब्बत भी हो, शराफत भी हो मेरे महबूब में। वो दीवानापन, वो जालिम अदा, शरारत भी हो मेरे महबूब में।
३. कोमल हो कमजोर नही क्योंकि शक्ति का नाम ही नारी है यानि कि आत्मनिर्भर हो जरूरत पड़ने पे खुद के दम पर जी सके।
४,५,६.
इज्जत करे जो सभी की, इतनी हो सामर्थ्य जिसमें।
हँस के करे वो बात सब से, गुस्सा ना हो तनिक उसमें।।
७.
ना मजनूँ के किस्से, ना लैला की बातें
प्यार से वो गुजारे, क्या दिन, क्या रातें।
८.
करे सेवा गरीबों की, बदले में हो ना कोई चाहत।
देखते ही उसको, मेरे थके मन को मिल जाय राहत।।
अथ् श्री रेवाखंडे परफेक्ट लवर अध्याय समाप्तम्। अब इससे भी बड़ा मुसीबत का काम है, बकरे ढूँढना क्योंकि जिन बकरों और बकरियों में नजर है उनकी तो पहले ही बकरीद मन चुकी है अर्थात् किसी ना किसी के हाथों हलाल हो चुके हैं। फिर भी नीचे लिखे गये लोगों से गुजारिश है कि अगर वो इस विषय में कुछ लिख दें या आदर्श प्रेमी के कोई आठ गुण बता दें तो लैला मजनूँ या शीरी फरहाद् जैसे नाकाम प्रेमियों की आहत आत्मा को शायद थोड़ी शांति मिल जाय। इतना ना कर सके तो कम से कम सब्जेक्ट लिख और खेल के नियम यहाँ (हिन्दी) या यहाँ (English) से टीप कर (कापी पेस्ट कर) अपने बकरों की लिस्ट छाप दें तो शायद आज के युग के ही सड़क छाप रोमियों का कुछ भला हो जाय।
१. अनुप शुकुल जी - आपको फिर से टैग किया जा रहा है अब तो लिख ही दें
२. अतुल अरोड़ा - शायद इसी बहाने कुछ लिखा, पढ़ने को मिल जाय
३. वेंडी - टीचर जी इस पर भी कुछ हो जाये
४. एस वी - लगता है तुम अभी तक बची हो
५. प्रसाद और अखिल - छुट्टियाँ खत्म थोड़ा लिखना हो जाय
६. लोग अपनी अपनी ताल दिये जा रहे है लेकिन सुर का कोई पता नही
७. मीनल - आलू की टिक्की के बाद थोड़ा सा रूमानी हो जाय
८,९. अगर किसी में थोड़ी भी शर्मो हया बाकी हो, जरा सी भी जिंदगी में रोमियोगिरी करी हो तो आगे आय इनमें से (८,९) कोई सा भी नंबर पिक (Pick) कर ले।
और अब आखिर में, अभी अभी पता चला है कि आज बसंत पंचमी है। अपने Resume में उन तीन जरूरी गुणों के ना पाये जाने की वजह से हमें कोई और कैरियर तलाश करना पड़ा था। और ऐसी ही किसी बसंत पंचमी से हमने अपने उस नये कैरियर की शुरूआत की थी। इसलिये आज की यह पोस्ट अपने उस कैरियर की बॉस के नाम। अरे ये कमबख्त दिमाग कहाँ से आ गया इस वक्त, आगे की लाईन ये जबरदस्ती लिखवा रहा है -
जब से हुई है शादी, आंसू बहा रहा हूँ,
आफत गले पड़ी है उसको निभा रहा हूँ।
चुन्नू करे परेशाँ, मुन्नी को ढूँढता हूँ,
राशन नहीं है घर पे बाजार जा रहा हूँ।।मैडम है घर से गायब, सखियों से जा मिली है,
जलता नही है चूल्हा, कब से जला रहा हूँ।
आयेगा मेरा भी एक दिन, मैं भी राजा बनूँगा,
फिर कहूँगा आजा, नहीं तो दूजी ला रहा हूँ।।












This post has 12 comments
February 2nd, 2006
तो आप भी “लपेटे” में आ ही गये .
अपनी भी बकरीद मना ही ली .
प्रत्यक्षा
February 3rd, 2006
वाह तरुण, अच्छा लिखा है। अपने ब्लाग पर आपका कमेन्ट पढ कर लगा था आपकी शादी होनी बाकी है। आपके कविता को पढ़ कर लगा, आपकी कहानी कहती है कविता आपकी |
February 3rd, 2006
वाह, क्या लिखते हो यार, पढ़कर ही दिमाग की सुईं घूम जाती है!!
दुनिया में तो कितने ही सफल दंपति हुये होंगे फिर क्यों उनकी कोई मिसाल नही मिलती, क्या उनके बीच कोई प्रेम नाम की चीज नही रही होगी।
क्यों भईये, शाहजहाँ-मुमताज़ की मुहब्बत की दास्तां कभी नहीं सुनी, जिसकी आज तीन सौ साल बाद भी जीती जागती मिसाल “ताजमहल” के रूप में खड़ी है?
February 3rd, 2006
Tarun, well done indeed. You have a fine sense of humour.
February 3rd, 2006
तरुण जी,
Seth Speaks की किताब तीन वोल्यूमस् में है. मुझे इसका वोल्यूम दो (part 1 and 2) सबसे अधिक दिलचस्प लगा. लेखक का नाम है Jane Roberts और publisher है Bantam books, जो edition मेरे पास है वह १९८६ में छपा था. सुनील
February 5th, 2006
आप मेरे बकरे बने है!!
February 6th, 2006
बुरा फँसाया आपने। यह रही विशलिस्ट की व्यथाकथा।
February 7th, 2006
क्यों भईये, शाहजहाँ-मुमताज़ की मुहब्बत की दास्तां कभी नहीं सुनी
सही कह रहे हो मियाँ, लेकिन कसम उड़ान झल्ले की इससे बड़ा जालिम आशिक मैने तो नही देखा।
एक तरफा प्रेम ज्यादा था, अब तुम्हें तो पता ही होगा मुमताज १४ बच्चे को जनते हुए जन्नत नशीं हुई थी।
अब तुम्हीं बताओ भैय्या ये प्यार था या उस नन्हीं और प्यारी सी जान पर अत्याचार। ये कम था इसलिये उन सारे कारीगरों के हाथ ही कटवा दिये जिन्होनें ताजमहल जैसा मकबरा बनाया। अपने प्रेम ग्रंथ में ऐसे आशिकों की जगह नहीं।
February 8th, 2006
नए घर पर सफ़लतापूर्वक स्थानांतरित होने पर बधाई। अब बस एकठो बढ़िया काम और करो, ईमेल द्वारा नई टिप्पणियों की सूचना देने वाले इस प्लगिन को और इन्स्टाल कर लयो, फ़िर मजा ही मजा आ जाई!!
और यदि अभी तक नहीं करा है तो भाई स्पैम कर्म को भी इन्स्टाल कर लो यदि केवल चिट्ठा लिखने की ओर ध्यान देना चाहते हो तो, अन्यथा स्पैम साफ़ करने में ही हर समय लगे रहोगे!!
कोई और समस्या हो तो बताना, दूर करने का प्रयत्न करेंगे!!
February 8th, 2006
इस प्लगिन को इंस्टाल करने की जरूरत तो नही लगती क्योंकि तुम्हारी टिप्पणी मुझे ई-मेल से ही पता चली है। मै वर्डप्रेस २.० यूज कर रहा हूँ, काफी कुछ inbuilt है। स्पैम कर्म १.५ को ही सपोर्ट करता है, वैसे डाउनलोड करके रखा है, ट्राई मारूंगा।
February 9th, 2006
भईये, वह ईमेल वाला प्लगिन आपके लिए नहीं, हम लोगों के लिए है जिन्हें बार बार आकर नई टिप्पणियों को देखना पड़ता है। उसके द्वारा हमें ईमेल द्वारा नई टिप्पणियों की खबर मिल जाया करेगी!!
और स्पैम कर्म २.१ अब प्राप्य है जो कि वर्डप्रैस २ या बाद के अध्यायों को सपोर्ट करता है!!
January 27th, 2009
गजनट! तो क्या अब लिख डालें?
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