Archive for January 2006

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नि‍ठल्‍ले दोहे

मेरा तेरा करता रहता ये सारा संसार,
खाली हाथ सभी को जाना छोड़ के ये घरबार।
उत्तर, दक्षिण, पूरब पश्‍चिम, चाहे तुम कहीं भी देखो,
वही खुदा है सब जगह, घर देखो या मंदिर देखो।
जब से जोगी जोग लिया, और भोगी ने भोग लिया,
तब से ही इस कर्म गली में, कुछ लोगों ने ढोंग लिया।
पहन के कपड़े उज्‍जवल [...]