तलाश
गुरू गोविंद दोऊ खड़े, काके लांगू पाँउ, बलिहारी गुरू आपनो, गोविंद दियो बताय। कबीर खुशनसीब थे जो उन्हें ऐसा गुरू मिला कि गुरू और गोविंद का फर्क पता चल गया। अब अपनी समस्या भी कुछ ऐसी ही है, ना गुरू का पता ना गोविंद का। अब लगे हाथ ये भी बताते चलें कि ये सब किस संदर्भ में कहा जा रहा है।
यह सब कहा जा रहा है इंडीब्लागीस के नामांकन के लिये। गुरू का पता तो आप लोगों कि टिप्णियों से चलेगा लेकिन गोविंद हैं इंडीब्लागीस की अलग-अलग श्रेणियां। खबर से लगता है कि एक ही श्रेणी के अंतर्गत नामांकन हो सकता है और यहीं समस्या खड़ी होती है। भला कौन सी श्रेणी चुनें निट्ठले चिन्तन के लियें। हमारी गुरू गोविंद की तलाश अभी जारी है तब तक आप अपना नामांकन करते रहें क्या पता बिल्ले के भाग्य से कब कोई छिंका टूट जाय।
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This post has 4 comments
December 20th, 2005
चक्कर में मत पड़ो भइया हर श्रेणी के लिये अप्लाई करो। न जाने मिल जायें नारायण किस भेस में।
December 21st, 2005
इसमें संशय कहाँ हो रहा है आपको? हिन्दी के चिट्ठे तो वैसे भी बेस्ट ईंडिक ब्लॉग(हिन्दी) श्रेणी के लिये ही नामांकित हो सकते हैं।
December 21st, 2005
Sahi keh rahe ho Anupji, Debu bhaiya ek Angrezi ka blog bhi hai line me….
December 26th, 2005
kuch kaha hain padhna chahte hain toh padh lijiye!!!
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