प्रेम कविता

प्रेम कविता लिखने की, एक दिन हमने भी ठानी
लिखने से पहले मन बोला, कहाँ है दिल की रानी।

कहाँ है दिल की रानी, जो प्रेम रस को घोले
अपना भी दिल कभी, कुछ इलु इलु बोले।

आये कोई, हमें भी, जो थोड़ा दर्द दे जाय
कवि ना बन पाये ये दिल तो शायर बन जाय।

तभी अचानक सामने, आयी अति सुंदर बाला
चंदा सा मुखड़ा था, और थी हाथों में माला।

आकर बोली, अब तक तुम, छुपे कहाँ थे नाथ
चाहे कितनी प्रलय आये, रहे तुम्‍हारा साथ।

साथ हसीना का पाकर, हम भी लगे इतराने
यार दोस्‍त बढ़ने लगे, कुछ लोग लगे खिसयाने।

कुछ लोग लगे खिसयाने, तभी एक धक्‍का खाया
आखँ खुली, अपने को, खटिया से नीचे पाया।

टूटा सपना, सपने की तस्‍वीर चकनाचूर हुई
प्रेम कवि बनने की हमसे, ‘तरूण’ भारी भूल हुई।

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Tarun

2 Responses to “ प्रेम कविता ”

  1. Hi ,
    Aap ki Kavita ati Sundar lagi ..

  2. 564y6

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