व्यक्तित्व
कालेज के वक्त लिखी एक कविता -
आड़ी तिरछी रेखांओ से
बना हुआ
मेरा व्यक्तित्व,
काँटों के बीच फूल सा
खिला हुआ
मेरा व्यक्तित्व।
पत्ता,
सूखा पिला
टहनी,
कुछ सीधी, कुछ तिरछी
पतझड़ के मौसम में
पेड़ों का कैसा व्यक्तित्व,
शायद
ये मेरा व्यक्तित्व।




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