सीविलाइजेशनः कंक्वेशट आफॅ द मंथ - इंडिया
भारत हमेशा से ही आक्रमणकारियों के लिये स्वर्ग रहा है, ना जाने कितने ही पर्शियन, ग्रीक, चाइनीज नोमेड, अरब, पुर्तगाली, और अंग्रेज आये और फिर उन्हे वापस लौटना भी पड़ा, और लोकल हिन्दू राज्य इन सबके बावजूद अपने संस्कारों की जड़ें मजबूत करता रहा।
खेल शुरू होता है पहले से ही तय किये गये ७ खुन के प्यासे विरोधी राज्यों (सभ्यताओं) के साथ, और इस खेल में भी गांधी और उसका भारत ना सिर्फ अंत तक बचा रहा बल्िक विजय भी हुआ। खेल शुरू होता है इस छोटे से दिखायी देने वाले जमीन के टुकड़े के साथ। गांधी के सेटलर के दिल्ली को बसाने के साथ ही शुरू होती है भारत की दुनिया को खोजने की दौढ़।

१७८६ एडी, भारत का मध्य भाग, नीचे की छोटी सी विंडो में पर्पल दिखायी देने वाला हिस्सा है भारत का नक्शा, लाल है जापान और बाकी अन्य सभ्यता, यहाँ तक आते आते, पर्शियन ने चाईना का नामोनिशां मिटाया, सुमेरियन, जापान और पर्शिया तीनों ने मिलकर खेल खत्म किया अरबों का। शक्ित के नशे में चूर पर्शियन ने जिंदगी की सबसे बड़ी गल्ती करते हुये भारत में आक्रमण कर दिया और नतीजा भारत ने एक एक शहर करके सारा पर्शिया अपने कब्जे में कर लिया।

चक्कर खा गये ना! ये हो क्या रहा है ऐसा तो इतिहास में कभी पढ़ा नही। और गांधी अहिंसा के पुजारी यहां क्या कर रहे हैं। अब मैं शुरूआत से सब शुरू करता हूँ। यहाँ मैं वास्तव में बात कर रहा हूँ, बारी (टर्न) बारी दिमाग के कौशल के साथ खेलने वाले एक खेल की जिसका नाम है सिविलाइजेशन (सभ्यता)। मैं इस खेल का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ, बल्िक कहना चाहिये इस खेल का बहुत बड़ा नशेड़ी हूँ।
ये खेल वास्तव में शतरंज का बहुत ही बड़ा विस्तार जैसा है, इतिहास की कुछ रोचक घटनाओं और बड़े और छोटे आश्चर्यो के साथ, जहाँ हम एक से ज्यादा विरोधियों के साथ एक साथ खेल सकते हैं। ये बाकी सारे विरोधी होता है कंप्यूटर (AI), और इसकी हर चाल आपके चाल पर निभर्र करती है। खेल शुरू होता है ४००० बीसी से और हम विश्व की किसी सभ्यता के साथ शुरूआत करते हैं नयी दुनिया खोजने की और उस अपने हिसाब से बसाने की। इसी दौरान आप अन्य सभ्यताओं से भी मिलते हैं। खेल के आगे बड़ने के साथ आपको दुनिया पर अपना वर्चस्व स्थापित करना है अब आप चाहे ये जंग से करें या अमन से कूटनीति से और या फिर अपनी संस्कृति का विस्तार करके और या फिर स्पेस रेस का अगुआ बनके। एक गलत कदम या चाल और आप समझ लो चल पड़े पतन की ओर।
तो इस महीने के कंक्वेशट की सभ्यता थी - भारत, अगस्त का महीना और COTM इंडिया तो मैं अपने आप को खेल खेलने से रोक नही पाया। और १७८६ एडी तक आते आते गांधी के भारत की होती है कूटनीतिक जीत।

और ये जीत संभव हो पायी भारत के दिल्ली में युनाइटेड नेशन (UN) के बनाने के साथ



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