माजरा क्‍या है

पहले पढ़ सुन कर तो लगा इस बार बड़ा कॉमन सा विषय मिला है अनुगुँज के लिए, कॉमन इसलिए कह रहा हूँ क्‍योंकि ये ३ शब्‍द अक्‍सर लोगों के मुहँ से एक दूसरे को कहते हुए सुने जा सकते हैं। मसलन, “अरे मिंयाँ आज बड़े चहक रहे हो ‘माजरा क्‍या है’ और या फिर कभी […]

होली के वक्‍त अंग्रेजी ब्‍लोग में लिखे लेख का अनुवाद, वैसे ही जैसे बेमौसम की बरसात।
फाल्‍गुन के महीने होली का आना अक्‍सर मुझे ले जाता है बहुत पीछे बचपन की उन गलियों में, जहाँ न कोई चिन्‍ता थी और ना ही नौकरी का टेंशन सिर्फ मस्‍ती और हुड़दंग। अपने जीवन की अधिकतर मस्‍त होली मैंने […]

अरे नहीं जनाब, मुझमे वो कुव्‍वत कहाँ। मैं तो खुद अपनी ही किसी जद्दोजहद में उलझा हुआ था। टैम्‍पो रूका हुआ था, इशरत अली सोच रहा था ना जाने कहाँ से ये नामाकूल थानेदार आ टपका, उसने बाहर झांक के देखा दुकान पास पर ही थी, अली ने टैम्‍पो से उतरने में ही भलाई समझी।
टैम्‍पो […]

मेरे मौला, मेरा रहनुमा बन तू मेरे साथ में चल
अपने कल का भरोसा नही मुझको
कम से कम आज तो तू मेरे साथ में चल।
धर्म के नाम पर आदमी ने दिये तुझको नाम कई
बनाया मंदिर, कहीं मस्‍जिद और बनाये चर्च कहीं।
तू सिर्फ एक है, इस बात को तो ये लोग भूल गये
इनको ये एहसास दिलाने तू […]

  

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