इलेक्‍सन स्‍पेशियल

पिछले साल, चुनाव के दौरान कुछ पंक्‍तियां लिखीं थीं सोचा चलो आज इन्‍हें हिन्‍दी मे लिख दिया जाय। ब्‍लागनाद तो इनका पहले ही हो चुका है।

इलेक्‍सन का शोर है, देखो चारों ओर
सफेद कपड़े पहन के, घूम रहे हैं चोर।
घूम रहे हैं चोर, मचा रहे हल्‍ला गुल्‍ला
इनके कस्‍मे-वादों से, गुंज रहा हर गली मुहल्‍ला।

इनकी कोई जात नही, फैलाते जातिवाद हैं
सिंगिल कुर्सी न मिले, तो करते बंदर-बांट हैं।
करते बंदर-बांट, देते हैं एक दूजे को गाली
देश में बिजली है नही, इनके घर रोज दिवाली।

About the Author

Tarun
निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारों की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की; संक्षेप में कहूँ तो ये है थोड़ी मस्ती थोड़ा चिंतन।

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