गतांक से आगे…..
मुंगेरी बड़ा खुश था उसने दिल्ली जाने वाली ट्रैन जो पकड़ ली थी। लेकिन अन्दर से एक डर था मन मे, अन्जान शहर और वो कभी अकेला किसी शहर कभी गया भी नही था। एक गाँव से दुसरे गाँव यही एक सफर उसने अकेला किया था, उसमे भी अक्सर कोई यार-दोस्त साथ मे […]
आशा ही जीवन है, सुनने मे बड़ा अच्छा लगता है लेकिन अगर देखा जाये तो अपने देश में क्या ये संभव है। क्योंकि आशा स्त्रीलिंग है, जीवन पुलिंग और अपने देश में आशा और जीवन के बीच कितना अन्तर है ये बताने की जरूरत नही है। जहाँ आशा को किसी श्राप से कम नही […]
इन से मिलये, ये हैं मुंगेरी, वैसे तो इनका नाम बजरंगी है, लेकिन जब से ये सोते जागते सपने देखने लगे गांव वालो ने इनका नाम मुंगेरी रख दिया॥ बाप का क्या नाम है यह तो नही मालूम लेकिन गांव में सब उन्हें र्मिची सेठ कहके पुकारते हैं, सुना है ये पहले र्मिची बेचने का […]
Civilization के बुखार से किसी तरह निजात पायी तो अब सोच रहा हूँ कि कुछ निठल्ला चिन्तन कर लिया जाय॥ सबसे पहले layout change….कडि़यॉ तो पहले ही जोड़ ली हैं॥