इन तीनों का साथ एक खतरनाक कंबीनेशन है और अलग अलग होने पर भी ये एक दूसरे से टकरा ही जाते हैं। आजकल यहाँ एक कामेडियन के ऐसे ही खिलाये कुछ गुल एक बहस का सबब बने बैठे हैं - अपने सहयोगी साथियों के साथ सेक्सुअल संबंध बनाने चाहिये या नही। बहस का नतीजा चाहे कुछ निकले या ना निकले इस कारवाँ ने ऐसे ही चलते जाना है। फिलहाल हम भी तीन सीन की तरफ थोड़ा नजर डालते हैं।
सीन - १
क्या औरत को अपना कुवाँरापन निलामी (या सेल) पर लगाना चाहिये? और अगर कोई लगाता भी है तो आप क्या समझते हैं, कोई कितना कमा सकता है। इससे पहले आप कोई नंबर सोचें मैं बता दूँ २२ साल की एक लड़की को 3.8 मीलियन डॉलर का ऑफर अभी तक मिल चुका है। और अगर ये कम लग रहा है तो बता दूँ निलामी अभी जारी है…..
सही गलत की बहस में पड़े बिना एक फायदा जो मुझे इसमें नजर आता है वो ये है कि इस तरह की हरकतें शायद टीन प्रीगनेंसी की घटनाओं में कुछ कमी ला दे। एक ऐसे समाज में जहाँ हर चीज पैसे में तौली जाती हो वहाँ इस तरह की बात कैसे बेमानी हो सकती है। ये मानना है उस लड़की का और अगर कोई बेवकूफ दौलत इस तरह से लूटाने के लिये तैयार है तो लड़की का क्या दोष। वैसे भी जिस देश में सेक्स को वैसे ही लिया जाता हो जैसे किसी दूसरे देश में नाच गाना तो इस तरह की बहस बेमानी सी लगती है। (नजर डालें - रेडियो शो में कुवाँरेपन की निलामी)
सीन - २
कुछ सालों पहले की ही बात है जब एक कॉफी की दुकान का बंद होना लगभग तय था तभी कुछ ऐसा हुआ कि वो शॉप सिर्फ चलने ही नही लगी बल्कि दौड़ने लगी और नयी नयी ब्रांच खोलने की बात करने लगी।
हुआ बस इतना ही था कि कॉफी देने वाली लड़कियों ने बिकिनी पहन कर कॉफी देना शुरू कर दिया। और जो नही कर पाये वो अपनी कॉफी की दुकान इन्हें थमा बिजनेस से रूखसत हो लिये।
लेकिन बात जब हद से ज्यादा बढ़ जाये तो तमाशा बन जाती है और कुछ ऐसा ही कहना है ऐसी ही एक कॉफी शॉप में २-३ दिन काम करके छोड़ने वाली एक लड़की का - पढ़ने के लिये यहाँ देखिये और देखने सुनने के लिये -
सीन - ३
अब तक दूसरों पर फिकरे कस पब्लिक को अपने शो में हँसाने वाले को आज अपनी झेंप मिटाने के लिये खुद पर ही फिकरे कस पब्लिक को हँसाना पढ़ रहा है। एक ही टीवी चैनल के लिये काम करने वाले दो बढ़े बढ़े नाम आमने सामने आ खड़े हुए और पब्लिक के सामने आया एक और सेक्स स्कैंडल। अभी तक तो इस बात पर इतना सीरियस माहौल बनता नजर नही आता जितना पहले के ऐसे स्कैंडलस में देखने में आया। क्योंकि सारी बात हँसी में उड़ायी जा रही है और इस बात का सबसे बड़ा फायदा भी डेविड को हुआ है। उसके शो को देखने वालों की संख्या डबल हो गयी है। अब ज्यादा मैं क्या बताऊँ आप खुद पढ़ लीजिये क्योंकि कहीं ऐसा ना हो ‘सार सार लॉस्ट इन ट्रांसलेशन और थोथा रह जाये‘।
चलने से पहले मेरा नाम जोकर का एक गीत याद आ रहा है, कहता है जोकर सारा जमाना, आधी हकीकत आधा फसाना…….. अपने पे हँसके जग को हँसाया बनके तमाशा मेले में आया।











