किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार

अभी अभी राजकपूर की आवाज यानि मुकेश साहेब की वर्षगाँठ निकली है और जिस तरह से मैंने अनजाने ही सही उनको गीत गाता चल में भूला सा दिया वैसे ही समय की कमी के चलते वर्षगाँठ में भी उनके गाये किसी गीत का जिक्र तक नही किया।
आज जब थोड़ा वक्त मिला तो सोचा मुकेश साहब [...]


सूरज जरा, आ पास आ, आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम



दिल विल ६: धानी चुनरी पहन सज के बन के दुल्हन