सूरज जरा, आ पास आ, आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम

संगीत किसी भी गीत की मधुरता के लिये चार चाँद लगाने का काम करता है, किसी भी गीत के कर्णप्रिय या मधुर होने का ज्यादातर श्रेय या तो संगीतकार को चला जाता है या इसके गाने वाले को। उस गीत को लिखने वाले का नाम बहुत कम ही लिया या याद किया जाता है।
आज ये [...]


सावन की रिमझिम में थिरक थिरक नाचे रे मन्ना दा



अलबेली नार प्रीतम द्वार खड़ी - मन्ना डे की आवाज में



माँ पर एक खुबसूरत गीतः उसको नही देखा हमने कभी



सुनिये मन्ना डे और लता मंगेशकर का गाया गीत “शाम ढले जमुना किनारे”



ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान



मधुशाला: सुन कल-कल छल-छल मधुघट से