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सूरज जरा, आ पास आ, आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम

संगीत किसी भी गीत की मधुरता के लिये चार चाँद लगाने का काम करता है, किसी भी गीत के कर्णप्रिय या मधुर होने का ज्यादातर श्रेय या तो संगीतकार को चला जाता है या इसके गाने वाले को। उस गीत को लिखने वाले का नाम बहुत कम ही लिया या याद किया जाता है। आज [...]

[ More ] January 16th, 2010 | Comments Off | Posted in Filmy, Situational |

सावन की रिमझिम में थिरक थिरक नाचे रे मन्ना दा

मन्ना डे के गाये जितने मधुर फिल्मी गीत होते हैं उतने ही मधुर होते हैं नॉन फिल्मी गीत, अगर मेरी बात का विश्वास नही तो हाथ कंगन को आरसी क्या खुद ही इस गीत को सुनकर डिसाइड कर लीजिये। ये गीत किसी भी एंगिल से नॉन फिल्मी नही लगता लेकिन हकीकत यही है कि है। [...]

[ More ] September 1st, 2009 | 1 Comment | Posted in Non Filmy |

अलबेली नार प्रीतम द्वार खड़ी – मन्ना डे की आवाज में

1962 में रीलिज जिस फिल्म का ये गीत है वो तो मैं अब कह नही सकता लेकिन आप में से बहुत होंगे जिनके पास अभी भी ये मौका है कि वो कहें – मैं शादी करने चला। जी हाँ इसी फिल्म का ये गीत है, अलबेली नार प्रीतम द्वार खड़ी, आवाज है वन एंड ओनली [...]

[ More ] May 1st, 2009 | 6 Comments | Posted in Classical |

माँ पर एक खुबसूरत गीतः उसको नही देखा हमने कभी

माँ पर लिखी कविताओं की चर्चा पढ़ते हुए माँ पर मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत “उसको नही देखा हमने कभी, पर इसकी जरूरत क्या होगी, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी“, मुझे स्ट्राईक किया। जब मैं छोटा था तो ये गीत विविध भारती पर खूब बजता था। उस वक्त गीत [...]

[ More ] April 15th, 2009 | 16 Comments | Posted in Maa (mother) |

सुनिये मन्ना डे और लता मंगेशकर का गाया गीत “शाम ढले जमुना किनारे”

जब मैं दिल्ली में था तब इस गीत को बहुत सुनता था, इस गीत को मन्ना दा ने इतनी मधुरता से गाया है कि बस सुनते जाओ और रिप्ले करते जाओ। राग खमाज (Khamaj) पर बेस्ड ये गीत है फिल्म पुष्पांजली से जो 1970 में रीलिज हुई थी। संगीत दिया था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने, आवाज [...]

[ More ] April 3rd, 2009 | 11 Comments | Posted in Filmy, Raag Khamaj, Raaga Based Songs |

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान

मौका भी है दस्तूर भी, गणतंत्र दिवस दूर नही इसलिये अगले तीन दिन तीन गीत देश और शहीदों के नाम। शुरूआत कर रहे हैं फिल्म काबुलीवाला के लिये मन्ना दा के गाये गीत ऐ मेरे प्यारे वतन से। काबुलीवाला कहानी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखी थी और इसी पर बनी थी फिल्म काबुलीवाला, पहले बंगाली [...]

[ More ] January 24th, 2009 | 8 Comments | Posted in Patriotic Songs |

मधुशाला: सुन कल-कल छल-छल मधुघट से

सन् 1935 में 135 रूबाईयों (चार लाईन की छंद टाईप कविता) को अपने में सिमटी एक किताब छपी थी, नाम था मधुशाला और इसे लिखा था हरिवंश राय बच्चन ने। इसी मधुशाला ने हरिवंश राय बच्चन को नाम और प्रसिद्धि दोनों दिलाया। मधुशाला एक ट्राईओलोजी (Triology) का हिस्सा थी जो इन्होंने उमर खय्याम की रूबाईयों [...]

[ More ] November 7th, 2008 | 4 Comments | Posted in Non Filmy |

अभी तो हाथ में जाम है

जरा याद करो १९७२ में आयी फिल्म सीता और गीता, फिर याद करो शराब की बोतल हाथ में लिये लड़खड़ाता हुआ धर्मेन्द्र। क्या याद आया? मन्ना डे का गाया हुआ यही गीत ना। मुझे इस फिल्म का ये गीत सबसे ज्यादा पसंद है, इसे बहुत बार सुना है, फिर भी अभी तक मन नही भरा, [...]

[ More ] October 23rd, 2008 | 6 Comments | Posted in Drunkard (sharabi) |
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