< Browse > Home /

| Mobile | RSS

ठुमक ठुमक पग दुमक कुंज मधु (अनकही) – पंडित भीमसेन जोशी

पंडित भीमसेन जोशी अपना सुर मिलाने हमसे बहुत दूर चले गये, आज इस पोस्ट के मार्फत उनको विनम्र श्रृद्धांजलि फिल्म अनकही के लिये गाये उनके इस विशेष गीत से। पंडितजी के बारे में मुझे कुछ मालूम नही था, और सबसे पहले उनके बारे में पता चला जब दूरदर्शन में पहली बार बजा “मिले सुर मेरा [...]

[ More ] January 25th, 2011 | 1 Comment | Posted in Classical |

पीतल की मेरी गागरी दिल्ली से मोल मंगायी रे

अफलातूनजी ने जब जयदेव का संगीत सुनाया तो मुझे ध्यान आया ये गीत, वैसे तो जयदेव साहब के संगीतबद्ध किये बहुत सारे मधुर गीत हैं लेकिन मुझे ये थोड़ा जुदा लगता है। ये गीत शायद बहुत कम लोगों ने सुना हो ये भी एक वजह है इसे सलेक्ट करने की। इस गीत को लिखा है [...]

[ More ] August 22nd, 2009 | 5 Comments | Posted in Situational |