< Browse > Home /

| Mobile | RSS

मिर्जा गालिब १: हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे

अगली कुछ पोस्टों की श्रृंखला में बात करेंगे मिर्जा गालिब की, उनकी लिखी कुछ गजलों की, और सुनेंगे कुछ गजलें। मिर्जा गालिब के ऊपर वैसे तो पहले ही बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है लेकिन फिर भी अपनी तरफ से उन पर लिखने की कुछ गुस्ताखी तो हम भी कर ही सकते हैं। [...]

[ More ] February 28th, 2009 | 4 Comments | Posted in Gazals, Mirza Ghalib |

एक चमेली के मंडवे तले, दो बदन प्यार की आग में जल गये

आज वी-डे के उपलक्ष्य में ये गीत सुनिये दो बिल्कुल जुदा अंदाज और संगीत के साथ, एक में फिल्मी गीत वाला अंदाज है तो दूसरे में गजल का। फर्क बस संगीत और गायकी का है, गीत के बोल और भाव वही हैं। “एक चमेली के मंडवे तले, दो बदन प्यार की आग में जल गये”, [...]

[ More ] February 14th, 2009 | 6 Comments | Posted in For Your Valentine, Romantic |

एक ब्रहामण ने कहा है कि ये साल अच्छा है

शायरों की जमात ही ऐसी होती है कि वो सपने देखती है, उन सपनों को फिर बुनती है और फिर तैयार होती है एक नज्म, एक गजल जिसे सुनकर हम कह उठते हैं, वाह ये गजल अच्छी है। आज के दौर में जहाँ आपसी मतभेद बड़ रहे हैं, ताकतवर लोग जुल्म पर जुल्म करने में [...]

[ More ] November 15th, 2008 | 7 Comments | Posted in Gazals |