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दिल ढूँढता है फिर वो ही फुरसत के रात दिन

दुनिया के इस कोने से उस कोने तक मौसम की ऊठापटक जारी है और ऐसे ही इस साल के जाड़ों में हर सप्ताह पड़ने वाली बर्फवारी के बीच एक सुबह की खिली खिली धूप ने याद दिलायी, इस गीत की – दिल ढूँढता, है फिर वो ही, फुरसत के रात दिन। इस गीत को सुनते [...]

[ More ] January 22nd, 2011 | 1 Comment | Posted in Golden Melody, Happy Go Lucky |

आँखों पर एक चर्चा: आँखों पर लिखे कुछ बेहतरीन हिंदी फिल्मी गीत – भाग १

मैंने पिछले एक पोल में पूछा था कि शरीर के किस अंग की तारीफ में लिखे गीत ज्यादा पसंद हैं और उसमें नंबर एक पसंद थी “आँखें (Eyes)“। आज से आगे की कुछ पोस्ट तक उन गीतों की बात करेंगे जो आँखों के ऊपर लिखे गये हैं या जिन गीतों में आँखों का जिक्र आता [...]

[ More ] July 23rd, 2010 | 3 Comments | Posted in Ek Shabd Sau Afsaane |

तुम्हारा इश्क इश्क और हमारा इश्क बच्चा है जी

याद है वो एक पुराना विज्ञापन जो टीवी में आता था जिसमें एक महिला अपने पति को कहती थी, अब तो बड़े बन जाईये। याद है वो टाईम जब आप को कहा जाता था, ये जिद वगैरह छोड़ो अब तुम बच्चे नही हो, बड़े हो गये हो या फिर ये बच्चों जैसी हरकतें छोड़ो और [...]

[ More ] January 30th, 2010 | 9 Comments | Posted in Filmy, Romantic, Situational |

मिर्जा गालिब १: हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे

अगली कुछ पोस्टों की श्रृंखला में बात करेंगे मिर्जा गालिब की, उनकी लिखी कुछ गजलों की, और सुनेंगे कुछ गजलें। मिर्जा गालिब के ऊपर वैसे तो पहले ही बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है लेकिन फिर भी अपनी तरफ से उन पर लिखने की कुछ गुस्ताखी तो हम भी कर ही सकते हैं। [...]

[ More ] February 28th, 2009 | 4 Comments | Posted in Gazals, Mirza Ghalib |

दिल विल ३: हमने देखी है उन आँखों की महकती खुशबू

पिछले दो एपिसोड में हमने नजर डाली थी प्यारी की स्टाईल और प्यार की कैटेगरी पर। प्यार के बाद आता है शादी का नंबर, देखते हैं प्राचीन भारत में हिन्दू धर्म में कितने तरह से विवाह होते थे। कई लोग पहले आपस में प्यार करते हैं फिर इस रिश्ते को शादी में तब्दील करते हैं [...]

[ More ] February 4th, 2009 | 16 Comments | Posted in For Your Valentine, Romantic |

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान

मौका भी है दस्तूर भी, गणतंत्र दिवस दूर नही इसलिये अगले तीन दिन तीन गीत देश और शहीदों के नाम। शुरूआत कर रहे हैं फिल्म काबुलीवाला के लिये मन्ना दा के गाये गीत ऐ मेरे प्यारे वतन से। काबुलीवाला कहानी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखी थी और इसी पर बनी थी फिल्म काबुलीवाला, पहले बंगाली [...]

[ More ] January 24th, 2009 | 8 Comments | Posted in Patriotic Songs |

तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नही

पिछली पहेली में अब तक के रिकार्ड उत्तर आये साथ में सभी ने गीत को पहचान भी लिया। वो डॉयलाग फिल्म आंधी के मधुर गीत ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नही‘ के मध्य से लिया गया था। इस खुबसूरत गीत को संगीतबद्ध किया था राहुल देव बर्मन ने और शब्दों से सजाया (यानि [...]

[ More ] January 8th, 2009 | 5 Comments | Posted in Romantic |

हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है

1971 में संपूरण सिंह कालरा निर्देशित फिल्म आयी थी, नाम था मेरे अपने और यही संपूरण सिंह यानि गुलजार के फिल्म निर्देशन की शुरूआत भी थी। इस फिल्म की कहानी एक विधवा और कुछ दिशाहीन, बेरोजगार और अनाथ युवक (युवकों) के इर्दगिर्द घूमती है। फिल्म में मुख्य भूमिका थी मीना कुमारी, विनोद खन्ना और शत्रुघ्न [...]

[ More ] November 23rd, 2008 | 5 Comments | Posted in Situational |