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गीत गाता चल में होती हैं बातें गीत और संगीत की, गीत जो कभी गजल बनकर आते हैं तो कभी भजन। इनका कभी सूफियाना अंदाज होता है तो कभी कव्वाली बन गूँजने लगते हैं। गीत जो मुझे पसंद हैं, शायद आपको भी पसंद हों या हो सकता है इनके बारे में जानकर, सुनकर आपको भी पसंद आ जायें। क्यों ना आप भी इसके नियमित श्रोता बन गीत-संगीत की इस मधुर दुनिया के हमसफर बन जायें? इसके लिये नीचे दिये गये तरीकों में से कोई एक चुनकर आप भी कहने लगेगें- गीत गाता चल ओ साथी गुनगुनाता चल।

नियमित श्रोता-पाठक बनने के कई तरीके हैं -

1. Email Notification: आप चाहें तो ईमेल के द्वारा जान सकते हैं, जब भी कुछ नया पोस्ट होगा आपको Subscription/Notification ईमेल से उसकी सूचना मिल जायेगी आलेख की थोड़ी झलक के साथ। आपको काम का लगे तो आप ईमेल में दिये लिंक पर क्लिक करके पूरा आलेख पढ़ सकते हैं। ईमेल द्वारा सदस्य बनने के लिये नीचे दिये गये बॉक्स में अपना ईमेल पता डाल कर सब्सक्राइब के बटन पर क्लिक कीजिये। आपका ईमेल कभी भी किसी के साथ ना शेयर किया जायेगा और ना ही आलेख से संबन्धित ईमेल के अलावा कोई और ईमेल भेजी जायेगी। साथ ही आप जब चाहें ईमेल के अंत में दिये Unsubscribe के लिंक पर क्लिक करके इसे स्टॉप कर सकते हैं।

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2. Read in your favorite reader:
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बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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