< Browse > Home

| Mobile | RSS

दिल क्यूँ ये मेरा कहे जिन्दगी दो पल की

आप कभी पतंगों के पीछे भागे हैं, मेरा मतलब उन पतंगों से नही जो दिये की लौ की तरफ भागते हैं बल्कि काईट से है यानि पतंगबाजी वाली पतंग। अगर कभी आपने पतंग उड़ायी हो तो मालूम ही होगा शुरू शुरू में अक्सर जैसे ही वो थोड़ा ऊँचा जाती थी तो कोई दूसरा अपनी पतंग [...]

[ More ] April 28th, 2010 | 1 Comment | Posted in Filmy, New Songs, Romantic |

हाय रे तेरे चंचल नैनवा, कुछ बात करें रूक जायें

बालीवुड की फिल्मी दुनिया के कई ऐसे मधुर गीत हैं जो भूला बिसरा दिये गये हैं, किसी रेडियो स्टेशन या टेलीविजन के माध्यम से शायद ही सुनने को मिलते हैं। ऐसे ही एक गीत की बात आज कर रहे हैं जो 1965 में रीलिज फिल्म ऊँचे लोग से है। इस मधुर गीत को संगीतबध्द किया [...]

[ More ] March 5th, 2010 | 4 Comments | Posted in Filmy |

Holi: होली की मदहोशी आबिदा परवीन, शोभा गुर्टू और छन्नूलाल मिश्रा की आवाज के साथ

होली के अवसर पर लिखी इस पोस्ट में क्लासिकल और फिल्मी गीतों के द्वारा आनंद लेंगे होली की मस्ती का। अक्सर होली के आते ही फिजा में रेडियो और टेलिविजन के माध्यम से सुनायी पड़ते हैं होली के गीत। ये गीत मुख्यतया फिल्मी होते हैं और अक्सर चुनिंदा फिल्मों के वो ही चुनिंदा गीत होते [...]

[ More ] February 24th, 2010 | 8 Comments | Posted in Filmy, Holi Songs, Non Filmy, Raaga Based Songs |

वैलेंटाईन डे स्पेशियलः लव स्टोरी के लव में ट्विस्ट

एक बार फिर वही दिन, कहाँ से दिन शुरू हुआ कहाँ कहाँ फैल गया। आज के दिन कोई गुलाबी गुलाबी होकर घूमे तो कोई मुँह काला करके, विरोध का रंग काला ही होता है ना। युवाओं में बड़ा जोश होता है वैलेंटाईन डे मनाने का, वैसे ही जैसे अधजल गगरी की कहानी, अरे वो ही [...]

[ More ] February 14th, 2010 | 1 Comment | Posted in For Your Valentine, Romantic, Situational |

तुम्हारा इश्क इश्क और हमारा इश्क बच्चा है जी

याद है वो एक पुराना विज्ञापन जो टीवी में आता था जिसमें एक महिला अपने पति को कहती थी, अब तो बड़े बन जाईये। याद है वो टाईम जब आप को कहा जाता था, ये जिद वगैरह छोड़ो अब तुम बच्चे नही हो, बड़े हो गये हो या फिर ये बच्चों जैसी हरकतें छोड़ो और [...]

[ More ] January 30th, 2010 | 9 Comments | Posted in Filmy, Romantic, Situational |

सूरज जरा, आ पास आ, आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम

संगीत किसी भी गीत की मधुरता के लिये चार चाँद लगाने का काम करता है, किसी भी गीत के कर्णप्रिय या मधुर होने का ज्यादातर श्रेय या तो संगीतकार को चला जाता है या इसके गाने वाले को। उस गीत को लिखने वाले का नाम बहुत कम ही लिया या याद किया जाता है। आज [...]

[ More ] January 16th, 2010 | Comments Off | Posted in Filmy, Situational |

एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव

बहुत सालों पहले की बात है जब मैं छोटा था, जब सिर्फ दूरदर्शन होता था, जब टीवी प्रोग्राम सिर्फ कुछ घंटों के लिये आते थे। तब दो प्रोग्रामों के बीच में फिलर की तरह अलग अलग गायकों के गैर फिल्मी गीत और गजल बजते थे। उन्हीं में से एक थी राजेन्द्र मेहता और नीना मेहता [...]

[ More ] October 29th, 2009 | 4 Comments | Posted in Gazals |

सावन की रिमझिम में थिरक थिरक नाचे रे मन्ना दा

मन्ना डे के गाये जितने मधुर फिल्मी गीत होते हैं उतने ही मधुर होते हैं नॉन फिल्मी गीत, अगर मेरी बात का विश्वास नही तो हाथ कंगन को आरसी क्या खुद ही इस गीत को सुनकर डिसाइड कर लीजिये। ये गीत किसी भी एंगिल से नॉन फिल्मी नही लगता लेकिन हकीकत यही है कि है। [...]

[ More ] September 1st, 2009 | 1 Comment | Posted in Non Filmy |